इस होनहार छात्र की एक Presentation और CBSE की लापरवाही सामने आई
देश में शिक्षा के सबसे बड़े बोर्ड यानी सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव को एक साथ हटाया जाना मोदी सरकार का एक बहुत बड़ा decision है, पर सवाल खड़ा है कि केंद्र सरकार ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा प्रक्रिया में लापरवाही सामने आने के कईं दिनों बाद बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटाया केंद्र , ऐसा क्यों , सरकार ने इन दोनों को पद से हटाने का फैसला पहले नहीं लिया गया, मतलब साफ था कि इन गलतियों के लिए सरकारी गाज किन्हीं नीचे स्तर के कर्मचारियों पर ही गिरनी थी वो तो भला हो इस सिस्टम का शिकार 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत का, जिसके तेज दिमाग और परीक्षा में की गई खामियों की तैयार की गई प्रजेंटेशन का, सार्थक के सात पेज के प्रजेंटेशन ने cbsc में चल रही तमाम धांधलियों की पोल खोल दी। सार्थक ने ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स यानी कंपनियों का चयन करने की टेंडर प्रक्रिया में कईं गलतियां सामने रखकर हर किसी की आंखे खोल दी।
12 वीं कक्षा के छात्र ने CBSE के 576 से अधिक दस्तावेजों, टेंडर शर्तों और वित्तीय रिकॉर्ड को टटोला
आपको बता दें कि 18 साल का सार्थक सिद्धांत रांची का रहने वाला है , CBSE बोर्ड से 12 वीं का एगजाम दिया और रिजल्ट आया तो सार्थक ने नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाए , अपने अंकों को लेकर उन्हे संदेह हुआ और जब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए उन्होंने अपनी स्कैन आंसर शीट मांगी तो उन्हें लगा कि कुछ ज्यादा ही गड़बड़ है, उन्होंने जांच पड़ताल शुरू की उन्होंने सीबीएसई के 576 से अधिक दस्तावेजों, टेंडर शर्तों और वित्तीय रिकॉर्ड को ध्यान से देखा और टेंडर प्रक्रिया की तमाम विसंगतियों को सामने लाए। फिर नए मार्किंग सिस्टम की खामियों को अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर शेयर करके cbsc और सरकार दोनों की ही आंखें खोली। अपनी पड़ताल में सार्थक को पता चला कि हैदराबाद की कंपनी की एक कंपनी को टेंडर देने के लिए बोर्ड ने तीन बार नियमों में बदलाव किया। इस कंपनी पर पहले भी गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, ऐसे में दोबारा उसी कंपनी को टेंडर दिया गया।
कब तक चलेगा शिक्षा प्रणाली से खिलबाड़ सार्थक ने पहल की और CBSE में चल रही ये धांधली सामने आ गई पर साथ ही यब सवाल भी खडा हो गया कि क्या इन दो अधिकारियों को हटाने से पिछले कईं सालों से शिक्षा के क्षेत्र में चल रही अनियमिताओं में रोक लग जाएगी , जी हां पिछले काफी समय से बड़ी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक होना, परीक्षा करवाने में धांधली, नकल होना आदि के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब cbsc में हुई धांधली का मामला सामने आ ही गया जिसके चलते शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए शायद दो बड़े अधिकारियों की कुर्बानी दे दी गई। पर मोदी सरकार को समझना होगा कि देश के विकास की पहली सीढ़ी ही शिक्षा से शुरू होती है और मोदी सरकार यहां चल रही धांधलियों ,कमियों, लापरवाही को रोकने में नाकामयाब साबित हो रही है, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या पूरी शिक्षा प्रणाली को rss का experiment केंद्र बना दिया है, जो जब चाहे इस शिक्षा नीति, में जमा-घटा ,गुणा-भाग करके लाखों छात्रों के भविषय से खिलवाड़ करता रहे, समय रहते ही मोदी सरकार को इस तरफ ध्यान देना होगा, कहीं ऐसा ना हो बहुत देर हो जाए और देश का युवा इसके खिलाफ बगावत कर उतर जाए।
राहुल गांधी को भी मौका मिला राजनीति करने का
हैरानी और शर्म की बात तो यह भी है कि देोश का विपक्ष भी शिक्षा पर राजनीति करने का कोई मौका नहीं छोड़ता , जिसमें राहुल गांधी का नाम सबसे पहले आता है। यह बात तो अब आम जनता की समझ में आ ही गई है कि राहुल गांधी चर्चाओं में रहने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं , उन्हें देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापत खामियों से शायद ही कोई दिलचस्पी हो , पर हां हाल -फिलहाल में पेपर लीक होने के मामलों को वो जोरशोर से जनता के सामने आए, और अब जिस तरह से वो सार्थक के साथ फोटो शूट करवा रहे हैं उनकी मीडिया में रहने की मंशा सामने दिख रही है, मतलब सरकार लापरवाह तो विपक्ष राजीति की रोटियां सेंकने में मशगूल, क्या होगा देश की शिक्षा का।
