Cockroach जनता पार्टी क्या BJP की सी टीम क्यों लग रहे ये आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन किया सबको मालूम है, मांगे क्या है, यह भी सबको मालूम है। लेकिन अचानक पूरी पार्टी का मेल्ट डाउन क्यों हो रहा है? जिस तरह से लगभग 22 मिलियन लगभग 22 करोड़ लोगों के फॉलोवाला ये एक ऑर्गेनाइजेशन है वो उतनी ताकत नहीं दिखा पाया। बावजूद इसके कि जितने भी भाजपा विरोधी प्रमुख सोशल मीडिया हैंडलर्स थे वह लगातार इनको प्रमोट कर रहे थे और इनसे बड़ी उम्मीद देख रहे इनमें बड़ी उम्मीद देख रहे थे कि ये जो है राजनीति बदलेंगे और यंग लोग हैं। लेकिन जो कुछ जंतरमंतर पर हुआ उसमें कईं फैक्टर्स सामने दिखे, पहला भीड़ नहीं जुट पाई जितना ये लोग उम्मीद कर रहे थे। जो नेतृत्व है वह उसके पास कोई विजन नहीं है। कोई कभी पहुंचा, कोई कभी पहुंचा। दूसरा यह कि इसमें जनजी यानी युवाओं की समस्याओं पर कोई बात नहीं करने वाला नजर आया। पुराना वही राग अलाप आ गया। चाहे लेके रहेंगे आजादी वाला हो, चाहे जय भीम वाला हो, चाहे जो जेएनयू का एक विरोध करने वाला एक गैंग हो वो नजर आया। इसके अलावा वहां पर कोई यह बात करता नहीं नजर आया या जो जिनके साथ मुश्किल थी जिन लोगों के पेपर लीक हुए नुकसान हुआ सीबीएसई के या नीट वाले बच्चे वो कोई प्रदर्शन में नहीं नजर आया। तो इससे इसकी कोई क्रेडिबिलिटी नहीं दिखी, अब इससे ज क्रेडिबिलिटी गई और जो लोग नेता थे वो भी कुछ बहुत अच्छा नहीं प्रस्तुत कर पाए तो सब ने अब एक नया राग अलापना शुरू कर दिया कि यह पूरा का पूरा कार्यक्रम जो है वो बीजेपी के द्वारा प्रायोजित था और यह सारे के सारे लोग भाजपा के हैं और ये भाजपा ने ही जो नाराजगी है सरकार के खिलाफ, उस नाराजगी को दूर करने के लिए एक पैरेलल फ्रंट निकाला जहां से कि जो नाराजगी है वह निकल जाए। अब ये किस तरह के तर्क आ रहे हैं और यह बताने की कोशिश की जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी इस तरह के काम में माहिर है और यह उन्हीं का किया धरा है। लेकिन अल्टीमेटली हुआ क्या? अल्टीमेटली यह हुआ कि इस पूरे मूवमेंट की हवा निकल गई और पूरा मूवमेंट डिसक्रेडिट हो गया और इनके कंधे पर जो विपक्ष अपनी भविष्य की राजनीति करने वाला था वह पूरी की पूरी राजनीति का भट्ठा बैठ गया या शुरू होते ही उसने दम तोड़ दिया।
Mamata दीदी अभिषेक बनर्जी को निकालना ही पड़ेगा नहीं तो सिर्फ बगावत होगी

tmc के 58 से 60 विधायक अलग होकर के उन्होंने असेंबली के स्पीकर को अपना बता दिया है कि वो एक अलग ग्रुप के रूप में अब असेंबली में रहेंगे। वैसा ही संकट जो है वह अब पैदा हो गया है लोकसभा सांसदों को लेकर के और इस तरह की बात निकल कर के आई है कि 28 में से लगभग 21 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिख के बता दिया है कि वो लोग तृणमूल कांग्रेस हैं। ओरिजिनल तृणमूल कांग्रेस यही है। अब यह दोनों हो गया। विधायक दल टूट गया, संसदीय दल टूट गया। राज्यसभा में बहुत सारे लोग जो हैं वो नाराजगी हैं जता रहे हैं और नहीं जाना चाहते हैं ममता बनर्जी के साथ। मतलब वो किसी तरह से इनडायरेक्टली ममता बनर्जी को तो साथ लेके या ममता बनर्जी को तो स्वीकार करने के लिए तैयार हैं लेकिन वो अभिषेक बनर्जी को स्वीकार करने के लिए नहीं तैयार हैं। अब क्या अभिषेक बनर्जी इन लोगों के लिए क्या ममता बनर्जी इन लोगों के लिए अभिषेक बनर्जी को छोड़ देंगी? ये प्रश्न तो है लेकिन क्या ऐसा होने के बाद भी जो विघटन है जो नाराजगी है वो समाप्त होगी? क्या लोग एक बार फिर एकजुट होकर के तृणमूल कांग्रेस के नेता के तौर पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चेबंदी करेंगे। पॉलिटिकल लड़ाई लड़ेंगे। ये दूसरा प्रश्न है। इसलिए कि इसमें से बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अब शायद यह चाह रहे हैं कि भाजपा उनको स्वीकार कर हालांकि भाजपा में इस बात को लेकर के बहुत जिसको बोलते हैं सख्ती है या भारतीय जनता पार्टी इस मामले में बहुत फूंक-फूंक के कदम उठाना चाह रही है कि तृणमूल कांग्रेस के किन लोगों को लिया जाना चाहिए लिया भी जाना चाहिए कि नहीं लिया जाना चाहिए उसके दो कारण हैं कि अगर इनको तृणमूल कांग्रेस में लिया जाना लिया जाएगा तो 2029 में ये टिकट की दावेदारी भी करेंगे। फिर इनके अपने कैंडिडेट्स जाएंगे। प्लस इन लोगों पर एंटी इनकंबेंसी है। इसमें से बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो जो दो-दो तीन-तीन टर्म से हैं। तो ये सिर्फ पार्टी बदलेंगे लेकिन इनके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी रहेगी। तो क्या इस एंटी इनकंबेंसी का भारतीय जनता पार्टी को नुकसान नहीं होगा? और अगर नुकसान होगा तो इनको क्यों लिया जाना चाहिए? ये बहुत सारे प्रश्न हैं जिन पर चर्चा हो रही है और जिन जिनका जवाब भारतीय जनता पार्टी भी खोजने की कोशिश कर रही है और तीसरा ये कि क्या ऐसा तो नहीं है कि यह सारे लोग जो विभाजित कर रहे हैं यह ममता बनर्जी के कहने पर विभाजित हो रहे हैं और बाद में जाकर के भारतीय जनता पार्टी के अंदर की खबर लेकर के और फिर अह भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर चारों खानेचित करें। ये ये राजनीति में कुछ भी संभव है। लेकिन कुल मिलाकर के अभी भारतीय जनता पार्टी के लोग चौकन्ना है और अंदर से ये बात निकल कर के आ रही है कि इनको भारतीय जनता पार्टी ना ज्वाइन कराया जाए।

