By Ruby Kumari
गजब है गंगा नदी को भी लगी लू—बुखार हो रहा—pollution का प्रकोप
यदि हम आपको कहें कि गंगा नदी को लू लगनी शुरू हो सकती है और वो इससे गंभीर रूप से बीमार पड़ सकती है तो आपको एक मजाक ही लगेगा , क्या नदी को भी कभी लू लग सकती है, क्या वो लू से बीमार पड़ सकती है, पर वास्तविकता में यह हो रहा है और ये एक भयानक सच है बढ़ते pollution का, आधुनिक समय की बदलती जीवन-शैली ने गंगा साफ निर्मल ,पावन स्वरूप पर संकट खड़ा कर दिया है। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि गंगा के जल में लगातार तापमान बढ़ रहा है और ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम हो रहा है, अब ये जानना जरूरी है कि इस कारण से गंगा नदी को कैसे लू लग सकती है, जब नदी का पानी लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक गर्म रहता है तो इसे ‘रिवराइन हीटवेव’ या नदी में पड़ने वाली ‘लू’ कहा जाता है। वैसे वैज्ञानिकों ने चेतावनी दे दी है यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा गति से जारी रहा तो 2090 तक गंगा के आधे से अधिक हिस्से में ‘लू’ की घटनाएं काफी बढ़ सकती हैं।
नदियों के पानी में हो रही Oxygen की कमी
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वैसे हाल ही में आईआईआईटी हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिसर्च से पता चला है कि गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में 2009 से 2025 के बीच यानी 16 सालों में पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। इससे पहले इस क्षेत्र में पारा बढ़ने की वार्षिक औसत दर 0.9 डिग्री सेल्सियस थी। और ऐसा रहा तो गंगा के काफी हिस्सें आने वाले समय में लू का शिकार बन सकते हैं। वैसे पानी का तापमान बढ़ने और आक्सीजन घटने से गंगा में रहने वाले जीव-जंतुओं पर भी असर पड़ेगा, ऑक्सीजन मछलियों, जलीय कीटों और अन्य जलीय जीवों के लिए जीवनदायी होता है। आक्सीजन घटने पर मछली पालन पर सीधा असर पड़ सकता है, साथ ही यह कृषि, पीने के पानी की उपलब्धता पर भी भयंकर असर डालेगा , magzine science एडवांसेज में छपी एक research के मुताबिक, बीते चार दशकों में दुनिया की 78 फीसदी से ज्यादा नदियों में ऑक्सीजन का स्तर घटा है। वैज्ञानिकों बताते हैं कि नदी के जल के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर पानी में ऑक्सीजन घुलने का स्तर 2.3 प्रतिशत तक घट सकता है। गंगा के साथ और नदियों में लू लगने के कईं कारण बन रहे हैं जैसे जलवायु में आ रहे बदलाव, बारिश का सामान्य से कम होना, नदियों में घटता जल प्रवाह, नदियों में छोड़ा जाने वाला कारखानों और शहरों का गंदा पानी, नदी किनारे हरियाली की कमी, ग्लेशियरों में आ रहा सिकुड़न नदियों का तापमान बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
नदियों में गिरने वाले गंदे पानी को रोकना होगा
संकट से निपटना है तो समय रहते नदी किनारे हरित पट्टियों का विकास जरूरी है, नदियों के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ को रोकना होगा, नदियों में गिरने वाले औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। और सबसे ज्यादा जलवायु परिवर्तन को कम करने, उसे रोकने के लिए विकास के साथ साथ इस तरफ भी ध्यान देना होगा।
