UP —अखिलेश की क्या मजबूरी जो मोहन यादव का दे रहे साथ
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सैकड़ों एकड़ जमीन उज्जैन में जो प्राइम लैंड है उसको खरीदने का उनका उनके परिवार उनके दूर के रिश्तेदार जिसमें उनके चचेरे भाई बहन अपनी बहन बहू बेटा सब शामिल है। अब यह एक भ्रष्टाचार का आरोप उन पर लगाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने परिवार के लोगों को फायदा पहुंचाया है। लेकिन इस मामले में कांग्रेस तो बहुत सख्ती के साथ बहुत मुखरता के साथ उनको उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। लेकिन आईएडीआई के दूसरे पार्टनर अखिलेश यादव जो हैं वह मोहन यादव की को डिफेंस में उतर आए हैं। उनकी उनका बचाव कर रहे हैं और यह बता रहे हैं कि क्या भारतीय जनता पार्टी को यह पहले से नहीं मालूम था कि वो रियलस्टेट बिजनेस में हैं। अब इसके दो पक्ष हैं। पहला पक्ष तो यह जो उन पर हमेशा से आरोप लगता रहा है कि वह अपनी जाति के लोगों को बचाते रहे हैं। वो कहीं भी रहा हो या किसी तरह की गतिविधि में अपरा इनवॉल्व रहा हो। अगर वो क्रिमिनल उसमें पाया जाता है तब भी वो चुप्पी साध लेते थे या और किसी गतिविधि में भी पाया जाता था तो वो उस पर चुप्पी साध रहे थे। अब यह जो मोहन यादव के बचाव में अखिलेश नजर आ रहे हैं, उसके पीछे जो पहला सबसे बड़ा कारण यह है वो यह बताया जा रहा है कि मोहन यादव और वो एक ही उसके हैं एक ही जाति से आते हैं इसलिए वो अपनी जाति के नेता के खिलाफ नहीं बोलना चाह रहे। दूसरा बात जो ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि बहुत सारे रिश्तेदार कुछ इस तरह के लोग हैं, जिनका इन्वेस्टमेंट जमीन पर है और वो समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। ये एक मजबूरी हो जाती है डिफेंड करना। अब दोनों परिस्थिति में अखिलेश के लिए मुश्किल होने वाली है। मोहन यादव का क्या होगा? उनके खिलाफ जो है उसको बीजेपी हालांकि डिफेंड कर रही है लेकिन वह स्टैंड कर पाएगी कि नहीं कर पाएगी उनको त्यागपत्र तो निश्चित तौर पर तुरंत नहीं होगा लेकिन जब भी होगा या जो भी होगा या इस पूरे मामले को जो भी किया जाएगा लेकिन जो राजनीति है 27 के चुनाव के पहले अखिलेश को जिस तरह से आक्रमक होना चाहिए था कि मैं कांग्रेस के समर्थन में हूं वो नहीं दिख रहा है ,इस पर कांग्रेस के ही मुस्लिम नेता और बाकी सारे लोग अखिलेश पर आक्रामक हो रहे हैं। ये इसकी जवाब इसका जवाब देना कांग्रेस अखिलेश को मुश्किल होगा।
Congress को सबसे ज्यादा embarrassment होगी

अब राफेल मामले में विपक्ष ने विपक्ष को एक बार फिर मुश्किल आ गई है। अब वो मुश्किल क्या है? विपक्ष लगातार यह कहता रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में राफेल को पाकिस्तान ने गिरा दिया था। इस समय बहुत सारे स्टेटमेंट चले थे, चाहे मिलिट्री के दो ऑफिसर्स के स्टेटमेंट की बात हो या डोनाल्ड ट्रंप की बात हो। लेकिन जो कल सूचना अभी आई है कि जो 36 राफेल के मेंटेनेंस का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ है तो वो स्पष्ट करता है कि भारत को जो भी राफेल आया है वो पूरी तरह से सुरक्षित है। अब उसमें और भी बहुत सारे पॉइंट्स दिए गए हैं कि जैसे जो इजेक्शन चेयर होती है उसका नोट बनायाजाता है। उसका एक-एक डिटेल रहता है। और भी जो अलग-अलग कंपनियां सप्लाई करती हैं राफेल को बनाने में वो सब इंडिविजुअली अपने जो इक्विपमेंट्स या जो भी चीज सप्लाई करती हैं उसकी उसको मेंटेन करती हैं। तो यह अब कांग्रेस को या जो भी लोग यह कह रहे थे कि पाकिस्तान ने राफेल गिरा दिया या पाकिस्तान का दावा था कि उन्होंने जो उनके यहां से बात आती थी कि वो 10 तैयार गिरा दिए या 15 तैयार गिरा दिए। वो सब पूरी तरह से बुरी तरह से फ्लॉप हो गया है और इसका डोमेस्टिक पॉलिटिक्स में असर भी होगा कि किस तरह से सेना के खिलाफ भी कांग्रेस अब अनसबेंशिएटेड जो बातें हैं उनको प्रचारित करती है। उनको बता आगे बढ़ाने की कोशिश करती है। झूठ बोलती है। राफेल में किकबैक लिया गया था। इसको लेकर के अकांग्रेस पहले से ही डिफेंसिव है। अह हिंडनबर्ग को लेकर के भी जिस तरह से कोर्ट की रूलिंग आई है उसमें कांग्रेस को शर्मिंदगीगी उठानी गई है। राफेल हो गया, हिंडनबर्ग हो गया और भी इस तरह के मामले हैं जिसमें कांग्रेस को शर्मिंदगीगी उठानी पड़ी। अब ये जो गिरा है गिराए जाने का दावा किया जा रहा था राफेल की वो भी एक बार फिर से गलत साबित हुआ और इस नैरेटिव्स के साथ इन नैरेटिव्स के साथ क्या विपक्ष चुनाव की तैयारी कर पाएगा हालांकि भारतीय जनता पार्टी के लिए तीन प्रदेशों में बहुत मुश्किल है। बिहार मेंअभी चुनाव हुए हैं। वहां मुश्किल लगातार बढ़ रही है। एनकाउंटर को लेकर के मध्य प्रदेश में मोहन यादव का मामला आ गया और उत्तर प्रदेश में राम मंदिर का। लेकिन क्या ये सारी चीजें विपक्ष भारतीय जनता पार्टी पर चिपका पा रहा है? अभी तक तो ऐसा नहीं दिख रहा है।
BJP के लिए कुछ नहीं कर पाए इन दोनों को मिली सजा

जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दे दिया है। वो मोदी सरकार में मंत्री थे, राज्यसभा उनको दोबारा नहीं दी गई। अब जॉर्ज कुरियन कोई भारतीय जनता पार्टी में आए ऐसे नेता नहीं है जो हाल फिलहाल में आए हो। जॉर्ज कुरियन अपने यूथ ये से भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के साथ जुड़े रहे और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। लेकिन उनको तो राज्यसभा नहीं दिया गया और वैसा ही हाल बिटू के साथ हुआ। रवनीत सिंह बिटू रवनीत सिंह बिटू को लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया और जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए। हालांकि वो चुनाव हारे। फिर भी उनको राज्यसभा दिया गया। दो साल मंत्री रहे लेकिन दोबारा उनको राज्यसभा नहीं दिया गया। इसका मतलब देर-सवेर उनको भी अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ेगा। अब इसके पीछे जो सबसे बड़ा कारण यह था कि दोनों मंत्री जो हैं वो अपने प्रदेशों में संगठन को मजबूत करने में या संगठन से लोगों को जोड़ने में नाकामयाब रहे। कुरियन साहब केरल में क्रिश्चियंस को जोड़ने में नाकामयाब रहे। बिटू साहब पंजाब में सिखों को जोड़ने में नाकामयाब रहे। और यह रिजल्ट जो है वह विधानसभा के चुनाव और जो लोकल बॉडी के चुनाव पंजाब में हुए उनसे स्पष्ट हुआ। लेकिन अब इन दोनों नेताओं का भविष्य क्या है? इन दोनों नेताओं का भविष्य पहला तो यह है कि कुरियन साहब तो कहीं नहीं जा रहे हैं। वो भारतीय जनता पार्टी में रहेंगे वो कांग्रेस में जाएंगे नहीं। रनीत सिंह बिटू को जिस तरह से गद्दार कहा है राहुल गांधी ने अगर वह वापस जाते हैं तो यह उनके लिए भी फजीहत की बात है। तो इन दोनों नेताओं के पास बचा ऑप्शन क्या है? इन दोनों नेताओं के पास सिर्फ और सिर्फ एक ऑप्शन है कि यह दोनों नेता संगठन में रहकर के काम करें। विधानसभा चुनाव में हो सकता है अह विधानसभा चुनाव में रवनीत को भारतीय जनता पार्टी टिकट दे उनको उतारे। तो ये वहां पर चुनाव लड़े। केरल में विधानसभा के चुनाव हो गए हैं तो वहां इस तरह की संभावना नहीं है। लेकिन आगे के लिए काम करने के लिए बोला जाएगा जॉर्ज कुद्दीन साहब को। रनीत सिंह बिटू को मध्य प्रदेश में जा पंजाब में जाकर के काम करना पड़ेगा और काम करके एक बार साबित करना पड़ेगा कि वह पार्टी के लिए किस तरह से उपयोगी हैं और भविष्य में उनकी क्या भूमिका हो सकती है। ये बहुत अनिश्चित है कि उन्हें अब इस तरह की कोई जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। वहां पार्टी ने पहले ही अपना नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया है और वह काम कर रहा है। इस बार उन्होंने एक सिखको प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। तो सिखों के बीच भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करना यह रनीत सिंह बिटू की जिम्मेदारी होगी प्रदेश अध्यक्ष के साथ मिलकर , इसी काम के लिए अब उनको उनकी सेवाएं ली जाएंगी आगे के चुनाव के मद्देनजर।
