क्या शेख हसीना के वापस लौटने से स्थिति सुधरेगी
बांग्लादेश की बात कर रहे हैं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री जो अभी निर्वासित हैं ,खालिद शेख हसीना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और अपनी देश वापसी की चर्चा की। बताया कि उनकी क्या योजना है और वह कब अपने देश वापस लौटने वाली हैं। अब उनका जो निर्वासन हुआ था वहां के जो कट्टरपंथी हैं विशेष रूप से जमात इस्लामी, उन्होंने छात्रों को अपने साथ ले लिया है। विदेश के और बहुत सारे उसमें चाइना की भूमिका थी। उसमें अमेरिका की भूमिका थी और उनको अपना देश छोड़ना पड़ा और भारत में शरण लेनी पड़ी। इन सब के मद्देनजर जो उनकी वापसी की बात है उसको लेकर के उन्होंने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस किया अब इसको लेकर के बवाल होने तय है। बांग्लादेश ने भारत सरकार से कहा कि उनकी जमीन पर भारतबांग्लादेश सरकार के खिलाफ में एक निर्वासित व्यक्ति जो जेनोसाइड के लिए जो आरोपी है इस तरह की बात कर रहा है। लेकिन भारत सरकार ने पहले ही इस मामले में अपना हाथ साफ कर लिया था कि किसी भी बयान से भारत सरकार का कोई लेना देना नहीं है। अब ये एक पक्ष हो गया।
शेख हसीना के समय Minorities सुरक्षित थी
दूसरा पक्ष ये है कि क्यों बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं शेख सीना और वहां पर जाने के बाद क्या होगा? जो कट्टरपंथी नेता हैं, कट्टरपंथी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि उनको डिपोर्ट किया जाना चाहिए। बांग्लादेश आना चाहिए और बांग्लादेश में उनको डेथ सेंटेंस दिया जाना चाहिए एक ये पक्ष हो गया। इसके अलावा एक पक्ष ये हो गया कि शेख हसीना के राज्य में या शेख हसीना के टेन्योर में वहां के जो हिंदू माइनॉरिटीज हैं उनको प्रोटेक्शन रहता था। जिस तरह का अन्याय, जिस तरह का रेप, मर्डर और किलिंग्स होती हैं। विशेष रूप से जब उनको अपदस्त किया गया था और मोहम्मद यूनुस केयरटेकर एडमिनिस्ट्रेटर बने थे तब या बाद के दिनों में। हालांकि जो नई रहमान सरकार आई है वो उसके समय में अभी उन पर प्रतिबंध लगाय हुआ है। लेकिन मतलब उस पर रोक लगी हुई है। लेकिन उसमें भारत की बड़ी भूमिका है। भारत पर बांग्लादेश की निर्भरता भारत पर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था एक बड़ा फैक्टर है। कट्टरपंथी जिसको नहीं मानते हैं और उन कट्टरपंथियों को चाइना और अमेरिका जैसे देश पीछे से पुश करते रहते हैं। उनको फाइनेंशियल ऐड देते रहते हैं। जिसके कारण वो बहुत इंबोल्ड हो के अपना काम करते रहते हैं। और यह सारा का सारा मामला विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर का ज्यादा है। भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर पर जो अह माइनॉरिटी जो इन कंसंट्रेशन है विशेष रूप से जमात इस्लामी का जो इस बार चुनाव में लगभग वो 60 65 67 सीटें जीत करके आई है। वो रेस्ट ऑफ द बांग्लादेश नहीं है। वो ब- बॉर्डर वाले इलाके में है। और उनकी मंशा यही थी कि बॉर्डर वाले इलाकेमें अपना प्रभाव बढ़ा करके और एक ग्रेटर बांग्लादेश की योजना जो बात वो करते रहे। अब इसमें एक और महत्वपूर्ण बात हुआ। एक यंग व्यक्ति जो है वो बांग्लादेश की जो पूर्व प्रधानमंत्री हैं उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपीयर हुआ और उसके घर पर बांग्लादेश में पेट्रोल बम फेंके गए गए। तो ये सारी चीजें होंगी। यह भी तय है कि शेख हसीना का बांग्लादेश लौटना ना केवल कठिन होगा बल्कि रिस्की भी होगा। इस बात की भी पूरी संभावना है कि उनके बांग्लादेश के लौटते ही उनको गिरफ्तार कर लिया जाए। उनको जेल भेज दिया जाए और उनको फौरन तौर पर एग्जीक्यूट भी किया जा सकता है। जैसा उनके पिता के साथ हुआ था। अब जो इसमें दूसरा पक्ष है वह शेख हसीना का कहना है कि चाहे उनको जेल में डाल दिया जाए चाहे उनको मार दिया जाए वो लौटेंगी और इसीलिए उन्होंने लौटने की की तारीख जो फिक्स की है वो दिसंबर की फिक्स की है। 16 दिसंबर को बांग्लादेश अपना मुक्ति वाहिनी जो थी उस ने जो प्रयास किया था और भारत सरकार ने वो हमला करके या भारत सरकार ने उनकी मदद की थी तो पाकिस्तान जिसको ये बांग्लादेश जो पूरी पाकिस्तान था वो बांग्लादेश बना पाकिस्तान के जो चंगुल है उससे निकल कर के तो उसी दिन को उसी समय को आधार बनाकर या उसी समय पर बांग्लादेश की जो अभी पूर्व निर्वासित प्रधानमंत्री हैं वो वापस जाना चाह और यह बताना चाह रही हैं बांग्लादेश की जनता को कि स्वतंत्रता बड़ी मुश्किल से मिली थी और वो कट्टरपंथियों में के हाथ में जाकर के इस देश का की बर्बादी नहीं हो इसमें सेुलर इसके सेुलर क्रेडेंशियल को बरकरार रखना चाहिए। माइनॉरिटीज को प्रोटेक्शन दिया जाना चाहिए और डेवलपमेंट की इकॉनमी की बात होनी चाहिए। बावजूद इसके कि सारा का सारा जो इस पूरे जो वहां पर उत्पात हुआ या जो सारा का सारा जिसके कारण शेख हसीना को वहां से छोड़ के आना पड़ा। उसमें कुछ फॉरेन फोर्सेस की भूमिका थी।
बांग्लादेश को विकास के लिए India की सख्त जरूरत
लेकिन उस बांग्लादेश के डेवलपमेंट में केवल भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है और जब से वहां पर कू यानी बगावत हुआ हुआ है वहां पर ये बदलाव हुआ है उसके बाद से उनकी इकॉनमी की हालत बहुत खराब है और बांग्लादेश लगातार भारत से मदद की गुहार मांग रहा है कि वो मदद करें तब वो उनकी इकॉनमी होगी। अब इसमें भी दो पक्ष हैं। पहला यह कि सरकार का पक्ष है। दूसरा कट्टरपंथियों का पक्ष है। अब सरकार कट्टरपंथियों के समर्थन से तो जीत के आई है। लेकिन सरकार को वहां डिलीवर भी करना है। अगर वो डिलीवर नहीं कर पाएगी तो फिर उनके लिए मुश्किल होगा और फिर उस सरकार को भी जाना पड़ेगा। रहमान की अभी जो सरकार है उसको भी जाना पड़ेगा। इसलिए सरकार को अगर डेवलपमेंट वहां करना है तो भारत से मदद लेनी पड़ेगी। भारत जिस तरह से मदद करता है वैसी मदद ना अमेरिका करता है ना चाइना करता है। अमेरिका की नाराजगी सिर्फ यह बात थी कि वो वहां उनका एक आइलैंड जो है वो चाहता था जिसको देने से बांग्लादेश की तब की प्रधानमंत्री ने मना कर दिया था और इसके बाद ही सारा का सारा बवाल शुरू हुआ। अब जो चीजें निकल कर के आ रही है वो यह कि बांग्लादेश में चुनाव के बाद थोड़ी स्थिरता तो आई है। माइनॉरिटी पर हमले बंद हुए हैं। लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना है और वह बिना भारत के मदद संभव नहीं है। चाइना, अमेरिका या बाकी और जो देश हैं वो क्या मदद करेंगे यह अभी प्रश्न चिन्ह है। लेकिन भारत ने जो किया है वह पूरी तरह से स्थापित है। किस तरह की मदद करते हैं ना केवल व्यापार में बल्कि गाहे बगाहे सहायता भी करते रहते हैं। तो ये एक महत्वपूर्ण प्रश्न है विपक्ष के नाते शेख हसीना की मौजूदगी डेमोक्रेटिक प्रोसेस को मजबूती देगी। अब वो जा पाती हैं और उनके साथ वहां पर किस तरह का व्यवहार होता है ये आने वाला समय बताएगा।
