Bihar —क्या सम्राट चौधरी बार बार परीक्षा दे रहे हैं, क्या उनको फेल करने की कोई चाल
बिहार में जमुई घटना के बाद राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव से लेकर तमाम लोग सम्राट चौधरी की सियासत पर प्रश्न चिन्ह लगाने लगे, हैं बीजेपी सरकार पर प्रश्न चिनह लगाने लगे हैं। और लगने लगा है कि बिहार में बार-बार सम्राट चौधरी की परीक्षा हो रही है? बिहार की राजनीति लगातार जब से सम्राट चौधरी वहां के मुख्यमंत्री बने हैं तमाम तरह की घटनाएं वहां हो रही हैं, सोशल हो रही है, पॉलिटिकल हो रही है,क्रिमिनल घटनाएं हो रही हैं और हर बार सम्राट चौधरी के सामने कोई ना कोई चुनौती खड़ी रहती है। जब तक वो एक चुनौती से निपटते हैं, थोड़ा मामला शांत होता है, डैमेज कंट्रोल करते हैं। दूसरी चुनौती उनके सामने खड़ी हो जाती है अब जमुई में हुए शर्मनाक हादसे के बाद जो सम्राट चौधरी पर एक के बाद लगातार वार हो रहे हैं। कोई उन्हें बखश नहीं रहा।सबको मौका मिल गया है। रोहिणी आचार्य आरजेडी की प्रवक्ता है काफी वोकल रहती हैं। उनके साथ-साथ सुप्रिया श्रीनेत्र नेसम्राट चौधरी के पुराने वीडियो वायरल कर दिए हैं। जिसमें वो जब वो डिप्टी सीएम थे। नीतीश कुमार के टाइम पर डिप्टी सीएम थे। वो कहते थे कि रात को 12:00 बजे जो है बिहार में महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित घूम सकेंगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो इस्तीफा दे देंगे। तो वो पोस्ट वायरल करके लगातार ये दोनों ही सम्राट चौधरी से इस्तीफा मांग रहे हैं और यह घटना बहुत बड़ी है, बहुत सेंसिटिव भी है। इसको लेकर देश भर में गुस्सा है जमुई की घटना एक बार फिर सम्राट चौधरी की परीक्षा ले रही है
सबसे बड़ी चुनौती रही नीतीश कुमार जैसा CM बनकर दिखाना
शुरुआत से ही देखें तो सम्राट चौधरी को जब सीएम बनाया गया था। जाहिर तौर पे नीतीश कुमार के बदले सम्राट चौधरी सीएम बने थे और नीतीश कुमार बिहार में काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं। सब जानते हैं कि जनता उनको एक तरह से अपना पिता मानती है, अभिभावक मानती है। उनको रिप्लेस करके सीएम बनाया गया सम्राट चौधरी को। तो जो एक्सपेक्टेशन थी उसको पूरा करने के लिए सम्राट चौधरी को बहुत ज्यादा जतन करने पड़े, प्रयत्न करने पड़े और अभी तक वो कर रहे हैं क्योंकि नीतीश कुमार की जगह लेते-लेते उनको बहुत समय लग जाएगा। तो सबसे बड़ी चुनौती सम्राट चौधरी के साथ यही लगी हुई है कि नीतीश कुमार जैसा बनकर दिखाना है, फिर जेडीयू नेताओं के साथ तालमेल ठीक रखना है, जैसे की राज में नीतीश ने jdu के साथ ठीक से तालमेल रखा था। नीतीश कुमार काफी परिपक्व नेता हैं, काफी एक्सपीरियंस नेता हैं । सम्राट चौधरी इतने परिपक्व नहीं है और अब जेडीयू नेताओं के साथ उनका जो भी वाद विवाद होता है उससे भी उनको नीतीश की भांति निपटना होगा।
राज्य में विकास कार्य जारी रखना दूसरी बड़ी चुनौती
एक और चुनौती है कि चुनाव से पहले सम्राट चौधरी ने महिलाओं के खाते में ₹10,000 हजार रूपए जमा करवाए थे। उसको लेकर काफी बवाल भी हुआ था और माना यही जा रहा था कि जो ₹10,000 जमा करवाए महिलाओं ने खुश हो के बीजेपी को बहुत वोट दिए और सम्राट चौधरी को CM बनवा दिया। अब सम्राट चौधरी की सरकार को इसका वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है। जिसका असर विकास कार्य पर पड़ रहा है और यह सम्राट चौधरी के सामने बड़ी चुनौती है कि कैसे इस वित्तीय बोझ के चलते विकास कार्य को किया जाए।
योगी की एनकाउंटर Policy अपनाई पर फ्लाप रही
इसके बाद अगर हम बात करें अपराधों की, अपराधों को काबू करने के लिए सम्राट चौधरी ने योगी मॉडल को अपनाया। एनकाउंटर शुरू कर दिया, लेकिन बहुत जल्दबाजी करी और भरत तिवारी के एनकाउंटर ने इतना बवाल मचाया कि यू टर्न लेना पड़ा सम्राट चौधरी को और इससे अपराधियों के जो हौसले थे थोड़े बुलंद तो हुए हैं बिहार में क्योंकि सम्राट चौधरी सोच रहे थे कि बस फटाफट योगी मॉडल अपनाएं एनकाउंटर करें अपराधियों का और एक हीरो की तरह पेश आए जनता के सामने लेकिन उन पर उल्टा पड़ गया भरत तिवारी का एनकाउंटर इसके साथ-साथ तेजस्वी यादव लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सम्राट चौधरी यादवों को निशाना बना रहे हैं। वो कास्ट पॉलिटिक्स कर रहे हैं तो यह भी एक बड़ी चुनौती है रही है जिससे सम्राट चौधरी जूझ रहे हैं
युवा भी नाराज लग रहे हैं सम्राट चौधरी से-उन्हें मनाना सम्राट चौधरी की बड़ी चुनौती
इसके बाद अगर हम युवाओं की बात करें तो बिहार का युवा भी सम्राट चौधरी से कुछ नाराज लगा। जंतरमंतर की आग बिहार पहुंची और युवाओं ने बिहार में जमकर प्रदर्शन किया। सम्राट चौधरी के खिलाफ पेपर लीक को लेकर और तमाम मुद्दों को लेकर के तो इसको लेकर भी सम्राट चौधरी जो थे उनको लगा कि एक बड़ी चुनौती है लेकिन जैसे तैसे उन्होंने उस चुनौती को भी शांत किया युवाओं से बात की , अब यह चुनौती शांत हुई तो तो एक और चुनौती ने सम्राट चौधरी को परेशान कर दिया, वो थी उनके कार्यकाल में बांकेपुर का चुनाव पर बांकेपुर की सीट प्रशांत किशोर ने जीत ली। यही बांकीपुर की सीट है जिस पर बीजेपी लगभग चार या पांच बार चुनाव जीत चुकी है। नितिन नवीन है जो अध्यक्ष बने हैं बीजेपी के उनकी ये सीट खाली हुई थी और वो लगातार इस सीट से चुनाव लड़ रहे थे। अब उस सीट पर हारना कहीं ना कहीं ये जिम्मेदारी जो है यह रिस्पांसिबिलिटी है सीधी सम्राट चौधरी पर आई। तो एक बार फिर परीक्षा में घिर गए सम्राट चौधरी और फेल हो गए।
क्या फेल हो जाएंगे सम्राट चौधरी
इन तमाम चुनौतियों से सम्राट चौधरी जूझ रहे थे कि अचानक जमुई की घटना ने उनकी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है और यह घटना छोटी नहीं बहुत बड़ी घटना है।सुरक्षा का मुद्दा है और वो भी बच्चियों के बच्चों के सुरक्षा का। इसलिए इसकी चर्चा देश भर में हो रही है और यह बहुत बड़ी चुनौती है और अब हैं। देखना यही है कि कैसे सम्राट चौधरी इन तमाम चुनौतियों से कैसे निपटते हैं , या फिर फेल हो जाते हैं
