Congress के दो झूठ विफल – क्या अब करेगी तीसरा झूठ फैलाने की तैयारी

क्या कभी पहले देखा या सुना है कि कोई चुनाव हारने के बाद , विजयी टीम से ज्यादा हारने वाली टीम की चर्चा हो रही है और ये चर्चा किसी जिले में नहीं , राज्य में नहीं बल्कि देशभर में हो रही है, शायद आप समझ गए होंगे कि हम किसी की बात कर रहे हैं, जी हां बात हो रही है डूसू यानी Delhi University students union चुनाव के परिणामों की , ये चुनाव देशभर के युवाओं की आवाज माने जाते हैं और साथ ही इन्ही चुनावों में जीत हासिल करके कईं युवा नेता Congress BJP के Top Post पर पहुंचे , List बहुत लंबी है पर थोड़े बहुत नेताओं की बात कर सकते हैं, बीजेपी के Top नेता रहे अरूण जेटली, जो अब नहीं रहे पर विजय गोयल से लेकर दिल्ली की CM रेखा गुप्ता, विजय जौली तमाम नाम हैं जो DUSU के रास्ते सीढी चढ़कर BJP पहुंचे और Congress के अजय माकन, अलका लांबा भी DUSU के जरिए की आगे पहुंचे नेता बन गए इसलिए इसके रिजल्ट काफी मायने रखते हैं , लेकिन इस बार DUSU चुनाव परिणामों की अलग ढंग से चर्चा हो रही है, चर्चा ये नहीं चल रही की बीजेपी समर्थित ABVP की जबरदस्त जीत हुई, पर चर्चा ये चल रही है कि Congress की छात्र विंग को कैसे एक भी सीट नहीं मिली। 11 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ कि एनएसयूआई को डूसू चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली।

Dusu हार ने बताया Modi अभी भी ZenG के नेता

DUSU चुनाव में एनएसयूआई का सूपड़ा साफ होने से कांग्रेस के तमाम नेता सकते में हैं और खासतौर पर राहुल गांधी और बताया जा रहा है वो इससे काफी नाराज हैं , अब समझने की कोशिश करते हैं कि इन चुनावों के रिजल्ट से congress में इतनी हैरानी परेशनी क्यों है, इसका सबसे बड़ा काऱण है कि कांग्रेस की युवा टीम उस समय हारी जब खुद राहुल गांधी देशभर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम चलाकर ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वो ही युवाओं का बेहद चेहरा हैं अब ऐसे में देश का एक बहुत बड़ा युवा वर्ग उनको dusu चुनाव में नाकार रहा है तो जाहिर है राहुल को तो गुस्सा आएगा, ‘क्योंकि चुनाव रिजल्ट का सीधा असर छात्रों की गूंज’ और पार्टी की रणनीति पर पड़ा है, राहुल युवाओं को पार्टी से जोड़ने की रणनीति बना रहे हैं पर DUSU रिजल्ट से उनकी पूरी रणनीति पर पूरा पानी फेर दिया। इस हार ने कांग्रेस और उसकी रणनीति को गहरा झटका दिया है. dusu में कांग्रेस की हार बीजेपी के हाथ में तुरूप के इक्के जैसा है, बीजेपी के ‘छात्रों की गूंज’ की जगद ‘झूठ की गूंज’ अभियान को बहुत ज्यादा बल मिल गया। पता चला है कि राहुल इतने नाराज हैं कि बाकायदा संगठन महासचिव बस इससे राहुल और ज्यादा खफा है पता चला है उन्होंने केसी वेणुगोपाल से हार के कारणों पर पूरी रिपोर्ट मांग ली है। DUSU में जबरदस्त हार से Congress को दूसरा झटका ये भी लगा कि देशभर में उनके द्बारा बनाए जाने वाला नेरेटिवपूरी तरह से बिखर गया, औंधे मुंह गिरा, जी हां जंतर मंतर पर ZEN G के प्रदर्शन के बाद से ही कांग्रेस पूरी तरह से बोल रही थी कि देश का Zeng बीजेपी और खासकर मोदी जी के खिलाफ है, वो मोदी को पसंद नहीं करता पर देश में युवाओं के सबसे शक्तिशाली मंच यानी DUSU में बीजेपी की जबरदस्त जीत और कांग्रेस की जबरदस्त हार से कांग्रेस का यह वार भी खाली चला गया तो जाहिर है कांग्रेस को परेशानी होगी, और दूसरी तरफ ये इस जीत ने बीजेपी के युवा नेताओं के हौंसले और ज्यादा बुलंद कर दिए और वो हर मंच पर Congress को टक्टर देने के लिए और ज्यादा उत्साह से काम करेंगे।

DUSU पहली बार हुआ है किसी छात्र ने निर्दलीय उम्मीदवार बनकर जीत हसिल की

अब जाहिर सी बात है कि जब DUSU में मिली जबरदस्त हार से राहुल गांधी नाराज हैं तो किसी ना किसी पर तो आने वाले समय पर गाज गिरेगी, माना जा रहा है कि एक समय में राहुल गांधी के चहेते रहे एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार पर यह गाज गिर सकती है, उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि वो पार्टी की अंदरूनी कलह और गलत टिकट वितरण को क्या रोकते उसी का भाग बन गए। पता चला है कि NSUI में टिकटों को लेकर पहले से ही घमासान शुरू हो गया था. जिसका असर सामने आ गया, उपाध्यक्ष पद के लिए दीपांशु शौकीन की जगह वीर चतरथ को टिकट दिए जाने का परिणाम भुगतना पड़ा, शौकीन ने बगावत की और निर्दलीय मैदान में उतर कर उपाध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया. आपको बता दें क DUSU में यह पहली बार हुआ है कि किसी छात्र ने निर्दलीय उम्मीदवार बनकर जीत हसिल की। बीजेपी की छात्र यूनिट के इस जीत के बाद हौसले बुलंह हैं क्योंकि पहले नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर बीजेपी सरकार के खिलाफ आंदोलन डूसू चुनाव से ठीक साउथ कैंपस के पास एक प्राइवेट हॉस्टल की इमारत ढह गई जिसमें कुछ छात्रों की मौत हो गई. इससे लग रहा था चुनाव मुशिकल है पर इसके ये अहम मुद्दे भी NSUI अपनी गलतियों अपनी कलह से भुना नहीं पाई , इस हार के बाद अब ये भी चर्चाएं हैं कि पहले कांग्रेस पार्टी राज्यों में अपनी आपसी लड़ाई से चुनाव हारती थी और अब ये सिस्टम कालेजों में ZEN G के बीच भी पहुंच गया।