All is NOT WELL l एनडीए के अंदर —क्या करेंगे चाणक्य
गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान से एनडीए से जुड़े तमाम दलों में हलचल और बैचेनी दिख रही है, जी हां चाणक्य ने घोषणा करी है कि लोकसभा चुनावों से पहले वो अपने शास्ति तमाम राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी लागू कर देंगे। इस बयान के बाद JDU , चिराग पासवान के साथ अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी और एन चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के नेताओं के अलग अलग बयान सामने आ रहे हैं जिससे लग रहा है कि वो इस बयान से सहज नहीं है और ये भी लग रहा है कि पश्चिम हो या दक्षिण UCC के मुद्दे पर एनडीए में ऑल इज वेल नहीं है। पहले चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने यह बयान दिया की इसे अपनाने से पहले वो सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेंगे। फिर JDU के नेताओं ने भी कहा कि वह अमित शाह से बात करेंगे।आपको बता दें कि 2014 से ही टीडीपी और जेडीयू का बीजेपी के कुछ फैसलों में अपना अलग स्टैंड लेने का इतिहास रहा है।और इसी दौरान कईं मुद्दों के कारण दोनों पार्टियां ही एनडीए से अंदर-बाहर होती रही हैं।अब देखना यही है कि चाणक्य कैसे UCC पर अपने सहयोगी दलों को मनाते हैं और लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करवा पाते हैं
यूसुफ पठान के आग कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति कहां जाएंगे
क्रिकेटर से राजनेता बने यूसुफ पठान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आजकल वो ऐसे समय से गुजर रहे हैं कि उनके आग कुआं पीछे खाई है और वो जाएं तो जाएं कहां, यूसुफ पठान बड़े जोर -शोर से ममता की टीएमसी में शामिल हुए, सांसद भी बने लेकिन उनकी मुश्किलें तब बढ़ गई जब दीदी ने उनसे सीट छोड़ने के लिए कह दिया क्योंकि उस सीट पर ममता खुद लड़ना चाह रही थी, यूसुफ पठान ने मना कर दिया और सीट बचाने के लिए टीएमसी के बागी ग्रुप में शामिल हो गए। लेकिन लग रहा है कि यहां भी यूसुफ पठान की मुश्किले कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, क्योंकि टीएमसी के बागी सांसदों में शामिल जगदीश बासुनिया ने यह दावा करके बड़ी हलचल मचा दी है टीएमसी के 17 सांसद बीजेपी में दुर्गा पूजा के बाद शामिल हो सकते हैं। ऐसे में चर्चाएं यही चल रही हैं कि अगर 17 सांसद बीजेपी में चले जाएंगे तो यूसुफ पठान समेत दो और मुस्लिम सांसदों का क्या होगा। इनमें युसुफ पठान की सबसे ज्यादा चर्चा है क्योंकि अब ना तो उन्हें गुजरात से कोई तव्जो मिलने वाली है क्योंकि वो गुजरात छोड़कर बंगाल चले गए और दीदी को ज्वाइन कर लिया, गुजरात में लगातार युसुफ पठान पर आरोप लग रहे हैं, कहा जा रहा है कि अपने एक प्लॉट को लेकर यूसुफ पठान विवाद में हैं। आरोप है कि उनके प्लॉट के कब्जे और नीलामी को लेकर विपक्षी पार्षद निगम की बैठकों में लगातार विरोध हो रहा है। तो यूसुफ पठान अच्छी तरह जान गए कि गुजरात में अब उनकी किसी भी सूरत में दाल नहीं गलने वाली है। और अब उनके और बागी साथी बीजेपी में चले जाते हैं तो वो चाहते हुए भी वहां नहीं जाएंगे क्योंकि इससे उनके अपने वोटर्स नाराज हो सकते हैं और भविष्य की राजनीती में असर पड़ सकता है। सबको पता है कि यूसुफ पठान बहरामपुर क्षेत्र से हैं जो मुस्लिम बहुल इलाका है। ऐसे में उनका डर जायज है कि बीजेपी के साथ जाने से उनका पूरा वोट बैंक खत्म हो सकता है। ऐसे में चर्चाएं जोरों पर है कि यूसुफ पठान और अन्य बागी मुस्लिम सांसदों ने साफतौर पर बीजेपी या एनडीए में शामिल होने से मना कर दिया है।
क्या बाहर से सपोर्ट करेंगे NDA को
अब चर्चा यही है कि क्या यूसुफ पठान जो अपने क्रेिकेटर की लोकप्रियता को भुना कर सांसद बने हुए हैं क्या वो बीच में फंस गए हैं, अगर वो बीजेपी में नहीं जाएंगे तो फिर क्या विकल्प आजमा सकते हैं वैसे ये बातें भी जोर पकड़ रही हैं कि एनडीए में शामिल होने की बजाय बाहर से एनडीए के साथ रह सकते हैं। इससे उनके वोट बैंक पर भी इतना ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि वो कह सकते हैं कि क्षेत्र में काम करवाने के लिए एनडीए का सहारा लिया है, पर इन सब के बीच बीजेपी के कईं नेता इस खबर को खारिज कर चुके हैं, पर ये राजनीती हैं और यहां पर नेता कहते कुछ और हैं और हैं और करते कुछ और ही हैं तो समय ही बताएगी कि टीएमसी में कौन सी खिचड़ी पक रही है। अगर टीएमसी के अलग हुए बागी सांसदों में तीन मुस्लिम सांसद एनसीपीआई में रहते हैं तो इस पार्टी का भविष्य क्या होगा। बीजेपी की बंगाल यूनिट ने इस सांसदों को पार्टी में लेने से इंकार किया है। बासुनिया के बयान को समिक भट्टाचार्य खारिज कर चुके हैं। उन्होंने पूछा है कि वे कौन सी मंगल ग्रह वाली बीजेपी में जाने की बात कर रहे हैं।
