Dr Jitendra Nagpal


किशोरों से संवाद करो —-उन्हें समझाओं हर जगह हम तुम्हारे साथ हैं

किशोर अवस्था में मानसिक संतुलन को कायम रखने के लिए, बच्चों को साकरात्मक और खुश रखने के लिए पेरेंटस प्रेशर ना बने इस बात का ध्यान रखना जरूरी है। ये प्रेशर कईं बार अन्जाने में होता है, क्योंकि कोई भी मा बाप नहीं चाहेंगे कि जानबूझ कर बच्चे के उपर एचीवमेंट के लिए, मार्क्स के लिए, अवल नंबर के लिए, IIT में जाने के लिए, मेडिकल कॉलेज में जाने के लिए उसे तनाव दें पर कईं बार जाने अनजाने ऐसा हो जाता है जो बच्चों के लिए कतई ठीक नहीं है। बच्चों पर अपनी इच्छा लादने से पहले उससे संवाद करें , अपने बच्चे का कभी किसी से मुकाबला ना करें। बच्चों को समझाइए Competition किसी के साथ नहीं है, Competition खुद के साथ होना चाहिए, Competency खुद के साथ होनी चाहिए. बच्चे को एंकरेज करें कि जो बार तुम्हारे मन में हैं, जिस तरीके से तुम आगे बढ़ना चाहते हो, जिस Field में करना चाहते हो, लगन से, बहुत हिम्मत से, और मेहनत से, aim समझ कर उस पर मेहनत करो, हम तुमारे साथ हैं.

 

Dr M Wali

Dipression —-कितनी बीमारियों का कारण बन रहा

मॉडर्न माहौल की देन, डेवलपमेंट की देन, हमारे मशरूफ हो जाने की देन, ज्यादा स्क्रीम टाइम की देन, मोर ऑफ अवेकनिंग इन द नाइट एंड लेस ऑफ स्लीप इन द नाइट की देन, हमारे उन खानों की देन जो हम फूड्स खा रहे हैं बगैर विटामिन के बगैर न्यूट्रिशन के जिसको फास्ट फूड कहते हैं। इन सब की देन डिप्रेशन है। डिप्रेशन किसी भी उम्र में हो सकता है। आजकल स्कूल के बच्चों को डिप्रेशन हो रहा है। उनकी मां-बाप को टाइम नहीं मिल रहा बच्चों के लिए तो डिप्रेशन हो रहा है। बड़ों को हो रहा है। घरों में हो रहा है। हस्बैंड वाइफ को हो रहा है। डिप्रेशन से हर चीज फैकल्टी जो बॉडी की है वो सुस्त हो जाती है। आपका मन ही नहीं करता कुछ करने को। सुबह ऑफिस जाने को मन नहीं करता। डॉक्टर समझता है विटामिन डी कम हो रहा है। इसका विटामिन डी दे देता है। लेकिन वो डिप्रेशन है। डिप्रेशन में गुस्सा भी आता है। डिप्रेशन में हमारे बच्चे जॉब छोड़ के रिजाइन करके आ रहे हैं।कुछ करने को मन नहीं करेगा। नेगेटिव थॉट्स आएंगे। थकान होगी। भूख कम लगेगी या बहुत ज्यादा लगेगी? बहुत ज्यादा खाते हैं। डिप्रेशन में लोग मोटे हो रहे हैं। कभी-कभी आंसू से रोता है मरीज बगैर बात के। इमोशनल हो जाता है। छोटी सी बात पर रोने लगता है या लड़ाई लगने लगता है।

Dr Mahipal Sachdeva

आपको पता है आंसू भी बीमार पड़ सकते हैं

यदि आप बार-बार पलकें झपक रहे हैं तो इसका क्या कारण हो सकता है? इसका कारण जो आज की तारीख में सबसे कॉमन है वो है ड्राई आई। अगर आपके जो आंसू हैं वह खुरदरे हो गए हैं। पोल्यूशन के कारण खुरदरे हो गए हैं तो आंख को जो चिकनाहट है जो चाहिए वो कम होती जा रही है। जो टियर्स होते हैं वो कॉर्निया को सरफेस पे होते हैं और उनका एक ब्रेकअप टाइम होता है। यानी कि कुछ सेकंड के बाद 30 सेकंड के बाद वो टियर्स ब्रेकअप कर जाते हैं। जैसे ही वह टियर्स ब्रेकअप करते हैं तो रिफ्लेक्सली आपकी पलक झपकती है। तो अगर यह टियर्स कम सीक्रेट हो रहे हैं या इनकी क्वालिटी खराब हो गई है यानी कि इनका खुरदरापन आ गया है इनमें जो पोलशंस है उसके करके हो सकता है तो आप बार-बार ऐसे आंखें झपक रहे होंगे तो यह अगर आप इस चीज से प्रभावित हैं कि आप बहुत बार आंखें झपकते हैं तो प्लीज जाके अपनी ड्राई आई के लिए टेस्ट कराइए। कुछ और भी कारण हो सकते हैं जिसको हम एसेंशियल ब्लेफोस्पज कहते हैं या न्यूरोलॉजिकल डिजीज के साथ भी यह जो पलकें ज्यादा झपकती हैं वो हो सकते हैं। वो एक सेपरेट इशू है। उसका टेस्ट आपको करा सकते हैं। बट कॉमनेस्ट कॉज आज की तारीख में एक्सेसिव ब्लिंकिंग का वो है कि टियर को रिसरफेस होना होता है। आपका टियर ब्रेकअप कर जाता है और आप ड्राई आई से सफर कर रहे हैं। तो अपनी आंख को टेस्ट कराइए और ड्राई आई अगर है तो उसका ट्रीटमेंट लीजिए और यह जो अच्छा नहीं लगता बार-बार आप ब्लिंक कर रहे हैं वह उससे राहत पा सकते