अटल जी ने हार मिली तो कहा हम नतमस्तक हैं जनादेश के सामने- राहुल को लगे वोट चोरी
राहुल गांधी के लिए क्या राजनीति पार्ट टाइम जाब है, जब चाहे सामने आ गए, प्रदर्शन कर लिया , जब चाहे संसद आ गए, जब चाहे विदेश चले गए, ये बातें बीजेपी में तो क्या खुद कांग्रेस के अंदर अंदर चलनी शुरू हो गई हैं, राहुल गांधी क्या अपनी credibility खो चुके हैं, और रही सही इज्ज्त वो प्रदर्शन में अपने कारनामों से गवां रहें है, जिस तरह से राहुल गांधी प्रदर्शन के दौरान अपने कार्यकर्ताओं को कोहनी मारते , महिला पुलिस आफिसर को खराब ढंग से पकड़ते और CM DK शिवकुमार को पीछे धकेलते कैमरे में कैद हुए , उससे बीजेपी तो क्या खुद कांग्रेस के अंदर ही कईं अनुभवी नेता इसकी निंदा कर रहे हैं, तो क्या मोदी सरकार का विपक्ष अपने ही कारनामों से खत्म हो रहा है, इन्हीं सब बातों पर हमने चर्चा की बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुधांशु मितल से ।
Ques—अभी तक यही कहा जाता रहा है कि मोदी सरकार का पूरे देश को विपक्ष विहीन बनाना है, पर जो पिछले कुछ समय से चल रहा है आपको नहीं लगता विपक्ष जनता के बीच अपनी credibilty खासतौर पर राहुल गांधी खत्म कर रहे हैं
Ans— मुझे लगता है कि इस समय विपक्ष जो है वो दिशाहीन हो गया है। वो खिलाफत के लिए खिलाफत कर रहा है। वह किसी विषय को ले खिलाफत करे जो जनता के विषय हो तब लोगों के मन तक वह बात जाती है। जैसे बिहार के चुनाव हुए राहुल गांधी जी ने क्या बात करी? वोट चोरी वोट चोरी वोट चोरी। ठीक। ना तो उन्होंने शिक्षा की बात करी। जी ना कोई प्रशासनिक व्यवस्था को लेके या वहां की स्थिति को लेके कोई बात नहीं करी। इसी वजह से जो चीज लोगों के जेहन तक जाती ही नहीं है, दिल तक उतरती नहीं है, वो उतरी नहीं और नतीजा आप सबके सामने है। आज भी जो वो एसआईआर को लेकर जो कर रहे हैं, ये जनादेश का अपमान है। आज हम लोगों ने भी इतने साल हो गए राजनीति में अपना एक कार्यकर्ता की तरह काम करते हुए। हर बार जब भाजपा हारी है तो हमने विनय विनम्र तरीके से जनादेश को स्वीकारा है। अटल जी का मुझे अभी तक ध्यान है वो कहते थे हम नतमस्तक हैं जनादेश के सामने। हम में कोई कमी रही होगी तो हम उस कमी को पूरी करेंगे और जनता का विश्वास जीतेंगे। जनता के जनादेश को नकारना यह कहकर कि यह चोरी हुई है, यह बेईमानी हुई है। यह आप अपनी विफलता पर जनता को दोषारोपण दे रहे हैं। जनता को कैसे पसंद आ सकता है? जिस जनता ने किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में अपना मत दिया। आप उस मत को यह कह के कि नहीं ये तो चोरी हुई है। उसको नकार दें। मुझे नहीं लगता जनता को कभी अच्छा लगता है। तो इसलिए मुझे लगता है कि सत्ता की के लालच में आप जनता के विषयों को छोड़ के आप ऐसी चीजों पे ध्यान आकर्षण करने की कोशिश कर रहे हैं।
जी जिनका कि वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं। पहले ईवीएम ईवीएम ईवीएम हुआ। जी बिलकुल ठीक है। अब ईवीएम की दाल नहीं गली क्योंकि जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा कि भाई ये तीन दिन तक कॉन्सिट्यूशन क्लब में रखा हुआ है। जिसको आकर जो दिखाना हो वो दिखा दे और तय हो जाए ना कि ईवीएम में बेईमानी है या नहीं है। कोई सामने नहीं आया और इसीलिए वो
नहीं चला और क्योंकि इसमें देखिए सबसे बड़ी बात क्या है? ईवीएम है एक राज में जब आप जीतेंगे तो ईवीएम में कैसे बेईमानी की बात कर सकते हैं, एसआईआर भी ले बिलकुल वही बात एसआईआर में जो एसआईआर में वोट कटे हैं कोई तरीका है क्या जानने का कि ये उसका वोटर था या भाजपा का वोटर था हर वोट जो कट रहा है जो होना नहीं चाहिए था।
Ques- हेमंता विश्व शर्मा की राहुल गांधी और DK शिवकुमार पर कटाक्ष करते हुए एक रील वायरल हो रही है, जिसमें हेमंता जी अपने 2015 के एक्सपीरियंस को दोबारा से दोहरा रहे हैं जब राहुल गांधी ने कुत्ते की प्लेट में उन्हें बिस्किट दे दिए थे, यहां शायद वो डी के शिवकुमार को समझाना चाहते हैं कि अपमान सहना बंद करो, आपको लगता है कि राहुल अपने नेताओं की तनिक भर इज्जत नहीं करते।
Ans- जनता की सेवा करना ये कोई पार्ट टाइम प्रोफेशन नहीं है। ये एक लाइफ लॉन्ग कमिटमेंट होती है। आप 24 घंटे इस देश का सोचते हैं, लोगों की सोचते हैं और लोगों के लिए क्या करना है उसके लिए आप प्रयत्नशील और अग्रसर रहते हैं। जो आदमी व्यक्तियों से ज्यादा कुत्तों को अगर महत्व देगा और अपने कार्यकर्ता को और अपने नेताओं को इस तरह बेइज्जत करेगा स्वाभाविक तौर से क्या वो नेतृत्व पा सकता है? देखिए नेतृत्व मिलता है शौर्य और पराक्रम से और नेतृत्व जब होता है जब लोग आप में एक उस आइकन को देखते हैं जिसको वो आइडलाइज करना चाहते हैं तभी तो आस्था आती है , जहां महत्वाकांक्षाओं में शालीनता सभ्यता और ईमानदारी खत्म हो जाए वहां पे यही आचरण होता है। तो राहुल गांधी के डी के शिवकुमार एक चीफ मिनिस्टर हैं। जीते हुए चीफ मिनिस्टर उनका सम्मान ना केवल एक व्यक्ति का सम्मान है। एक पद का सम्मान है और एक राज्य का सम्मान है। इस चीज से अनभिज्ञ होके अपने अहंकार में इस तरह का आचरण करें जिसका कि वर्णन हेमंत जी ने पहले भी करा था। ये राजनीति में बड़ी संवेदनशीलताएं होती हैं। उसके लिए अच्छा नहीं है।
Ques- प्रदर्शन में दिख रहा है राहुल अपने नेताओं को कम बाहरी चेहरों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, मतलब दूसरे के प्लेटफार्म को हाईजैक कर रहे हैं, और दूसरे के प्लेटफार्म को हाईजैक करने के चक्कर में वो अपने नेताओं की उपेक्षा कर रहे हैं ,पहले नेहा बोरा को उन्होंने बहुत अच्छे से करीब से अपने अपने साथ एक प्लेटफार्म दिया पब्लिसिटी हुई अब एनएसयूआई के एक छात्रा को जिसने पुलिस के साथ इतनी बदतमीजी की मारपिटाई उसको राहुल गांधी शेरनी कह रहे और इन सबके बीच जो कांग्रेस की अपनी महिला नेता हैं चाहे वो रागिनी नायर हो चाहे अलका लांबा हो सुप्रिया श्रीनेत हो वो कहीं प्रदर्शन में नजर नहीं आ रही हैं
Ans——-हमारे यहां एक कहावत थी कि घर का जोगी झोपड़ना आन गांव का सिद्ध तो राहुल गांधी जी को यही लगता है कि भाई अपने यहां के तो सारे निकम्मे बाहर वाला जो जरा भी टेलीविजन पे दिख जाए वो अच्छा होगा। अब आप सोचिए जिस संगठन को नया बोरा जिसका प्रतिनिधित्व कर रही है उसकी हैसियत क्या है?
बिल्कुल उस संगठन में उसका प्रभाव क्या है? उसकी हैसियत क्या है? आप देखिए जो भी कहिए एक इतनी पुरानी पार्टी है और मतलब उसका अच्छा और आप नेता प्रतिपक्ष है पुरानी पार्टी है सारे देश भर की पार्टी है देश भर में लोग जुड़े हुए हैं भाजपा है देश भर की पार्टी है कांग्रेस है देश भर की पार्टी है और हर कोने से देश के आपको कांग्रेस भी मिलेगा भाजपाई भी मिलेगा ऐसे में इतनी बड़ी बेस में आप अपने नेता को पीछे धकेल के आप जो चार दिन टेलीविजन पे आ गया जिसका जिसकी हैसियत या जिसका अस्तित्व या जिसका प्रभाव इतना सा हो आप जब उसको आगे करेंगे तो आपके जो संगठन के लोग हैं उनको आपके प्रति आस्था कैसी हो जाएगी खत्म हो रही है मुझे मुझे मुझे लगता है कि ये बड़ा एक शॉर्ट साइटेड मतलब क्विक फेम के चक्कर में शॉर्ट साइटेड एक्ट जो है वो संगठनों में नहीं चलता गांधी के साथ जो कर रहे हैं बिल्कुल अब तो साफ जनता के सामने भी आ गए कि जो नेता छोड़ के जा रहे हैं कांग्रेस को कहीं ना कहीं इस तरह की स्थिति उनके सामने आई होगी बहुत मजबूरी में उन्होंने बड़े-बड़े नेताओं ने छोड़ी होगी कांग्रेस स्वाभाविक तौर पे जब नेताओं को लगता है कि हमारा अस्तित्व और हमारा महत्व यहां पहचाना ही नहीं जा रहा और हमारी अपेक्षा हो उपेक्षा हो रही है तो उपेक्षा कौन सहना चाहता है जिसने 30 साल 25 साल 10 साल 20 साल विश्वसनीयता के साथ एक संगठन में काम कराओ। वो व्यक्ति आज कल का कोई आया उससे अपनी उपेक्षा करवा ले। कैसे स्वीकारेगा?
अब आप कन्हैया कुमार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष के चुनाव का जब आप इंचार्ज बनाएंगे प्रभारी बनाएंगे।
आप सोचिए जो भी रहा है एनएसयूआई का अपना अस्तित्व रहा है दिल्ली विश्वविद्यालय में। एक से एक नेता निकले हैं यहां से। एक से एक नेता जो देश में अलग-अलग राजनीतिक संगठन मतलब कांग्रेस के अलग-अलग पदों में विराजमान है और वहां पे काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को आप नकार दे और एक ऐसे व्यक्ति की जिसकी बिल्कुल विश्वसनीयता नहीं हो उसको लाके खड़ा कर दे। ये वो शख्स है जो अपनी पेड़ की डाली में खुद बैठ के उसको काटने आए हैं।
Ques—आपको लगता है कि कांग्रेस को बड़ा चिंतन करने की जरूरत है, नहीं तो कहीं 99 सीट जो हैं वो इस बार इलेक्शन में और नीचे जा सकती हैं
Ans—चिंतन मंथन से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि राहुल गांधी को डेडिकेट होना पड़ेगा। राजनीति पार्ट टाइम राजनीति नहीं होती है।उसमें कंसिस्टेंसी चाहिए होती है। तभी विश्वसनीयता बनती है। और जब तक राहुल गांधी ये देश के सामने नहीं दिखाएंगे कि वो देश की सेवा के लिए कमिटेड हैं। अग्रसर हैं और उसको प्रोफेशन नहीं ले रहे है। पार्ट टाइम प्रोफेशन नहीं ले रहे हैं। तब तक लोगों का उन पर विश्वास जमेगा मुझे नहीं मालूम। इतना चिंतन कर लीजिए जब तक नेतृत्व पर विश्वास ही नहीं होगा। और मैंने जैसा कहा देखिए नेतृत्व शौर्य और पराक्रम से आता है। नेतृत्व विरासत से नहीं आता है। विरासत से आपको मौका मिलता है। लेकिन आप विश्वास जीत लें। यह पराक्रम और शौर्य से होता है। अब देखिए कांग्रेस धीरे-धीरे हर जगह से जहां से 99 सीटें ली थी , वहां पर हर जगह से श्रिंक कर रही है कांग्रेस। एक बड़ा हिस्सा आया तमिलनाडु से एक बड़ा हिस्सा आया केरल से। एक बड़ा हिस्सा जहां से आया वहां से कांग्रेस कर रही है और जब तक कांग्रेस अपने को रीइनेंट करके जनता की आवाज बनने की कोशिश नहीं करेगी एक विरासत में मिली हुए संगठन के मालिक की तरह कोई उसको चलाएगा।

