थलपित विजय को किसने दिया इतना बड़ा झटका
थलपति विजय जब से तमिलनाडू के मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी पूरी कोशिश है कि राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया जाए और शायद यही कारण है कि वो अपने सहयोगी दल के नेता यानी राहुल के साथ साथ केंद्र में बैठी मोदी सरकार के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं क्योंकि विजय अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य को आगे बढ़ाने और जनता से किए गए वादे को पूरा करने में उन्हें मोदी का साथ जरूर चाहिए, पर हाल फिलहाल में विजय की सरकार को एक बड़ा झटका लग गया और विकास का एक बड़ा contract उनसे आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने छीन लिया, जी हां पता चला है कि तमिलनाडु जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का बड़ा हब माना जाता है, पर हुंडई और किया जैसी कार बनाने वाली साउथ कोरिया की तीन कंपनियों ने अपने कलपुर्जे सप्लाई करने के लिए इंड्रस्टीज के लिए तमिलनाडु की बजाय आंध्र प्रदेश में बड़ा निवेश करने का निर्णय किया है। यह डील 1614 करोड़ की है और आंध्रप्रदेश की सरकार इसको पाकर अपनी विजय मना रही है और दूसरी तरफ थलपित विजय मायूस हैं क्योंकि तमिलनाडु की सरकार लंबे समय से इन कंपनियों को अपने यहां लाने के लिए कोशिश कर रही थी, इन कंपनियों का दावा है कि इससे काफी लोगों को रोजगार मिलेगा।
Maharashtra —बड़ा खेला हुआ तभी BJP आलाकमान ने किया बीचबचाव
हाल ही में हुए mlc चुनाव में बीजेपी को कईं राज्यों में अच्छी सीटे मिली और महाराष्ट्र में भी अच्छा ही किया लेकिन यहां पर नागपुर और पुणे की सीट हारने के बाद बीजेपी और शिवसेना शिंदें के बीच चल रही तल्खियां खुलकर सामने आ गई हैं, दोनों पार्टी के नेता हार के लिए खिलकर एक दूसरे को दोष दे रहे हैं और हाल ये हो गया कि अब दिल्ली में बैठे बीजेपी आलाकमान को बीच में दखल देना ही पड़ गया, पता चला है कि महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं को सख्त आदेश दिए गए हैं कि दोनों दल एक साथ बैठकर सारी गलतफहमियां दूर करें और जल्द से जल्द इस विवाद को खत्म करें। आपको बता दें कि महाराष्ट्र नागपुर और पुणे में हार के बाद बीजेपी के स्टार प्रवक्ता नवनाथ ने कहा था कि शिवसेना की तरफ से सपोर्ट नहीं मिल पाया और उस बयान के बाद शिवसेना के नेता काफी गुस्से में थे।शिवसेना नेता नीलेश राणे ने तो नवनाथ को यह तक नसीहत दे दी की वो अपनी हैसियत और सीमा में रहकर बोलें। वैसे इस कंट्रोवर्सी के बाद नवनाथ काफी चर्चा में आ गए हैं। अभी तक वह संजय राउत के उल्टे- सीधे बयानों पर पलटवार करने के लिए जाने जाते थे लेकिन पहली बार उन्होंने अपने सहयोगी दल पर निशाना साधा , वैसे नवनाथ पत्रकार से नेता बने हैं और उन्हें शब्दों की ताकत का पता है। शनिवार को उन्होंने संजय राउत को घेराकर कहा था कि विजय माल्या की सुपारी लेकर संजय राउत उन्हें ‘महात्मा’ न बताएं।
