HEALTH TIPS BY FAMOUS DOCTORS
Dr Jitendra Nagpal

बच्चे का फोन आना कम हो गया- समझ जाइए
अगर आपके बच्चे ने हाल फिलहाल में किसी Institution में Admission लिया है और हॉस्टल में बच्चा रह रह रहा है अचानक उसका फोन आना कम हो जाता है , आपसे बातचीत करने का मौका कम हो रहा है , किसी बात में वो खामोश रहने लगा है, कहीं अकेले पन में रहने लगा है कुछ दिन से, जितना आप रोज बात करते थे उतना खुशी से बात नहीं करता , रात को नींद ना आने की शिकायत कर रहा है, तो समझ जाइए बच्चा परेशान है, उदास है घर को मिस कर रहा है या फिर कोई उसे तंग कर रहा है आपको अपने बच्चे के पास मदद के लिए पहुंचना है क्योंकि आपको ये इशारे मिल चुके हैं, जल्दी नहीं पहुंच सकते तो बच्चे से वीडियो कॉल करिये , उससे मिलें और और सिर्फ पढ़ाई लिखाई, जॉब और करियर और प्लेस्मेंट के बारे में बात मत करिये , आप ये बात करिये कि आज का दिन कैसा बीता , Hostel में कौन दोस्त बना, तुम्हारे दोस्त कैसे हैं, तुम कहीं खेलने गए, तुमने हॉस्टल लाइफ में कोई Important, कोई कल्चरल या लिटरी इवन्ट में पार्टिसिपेट किया. इस समय कोशिश करें कि बच्चे के साथ Communication को बढ़ाये, उसका अकेलापन दूर करने की कोशिश करे, शुरूआत में आपका थोड़ा सहयोग , बातचीत , अपनापन बच्चे के लिए आगे की राह आसान कर देगी।
Dr Mahipal Sachdeva

Photophobia —आंखों में किस बीमरी का लक्षण बताता जो खतरा बन सकती
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप घर पिक्चर देख रहे हैं। एक दो घंटे आपने पिक्चर देखी और इंटरवल हुआ और इंटरवल में सडनली ब्राइट लाइट हो गई तो आपको एकदम दिक्कत हो रही है। या आप शादी पर गए और वहां पे कोई वीडियो कैमरा वाले आपको पिक्चर बना रहे हैं। आपके शूट कर रहे हैं और ब्राइट ये जो आर्क लाइट का होता है उसकी लाइट आपकी आंख की तरफ पड़ रही है और आप उसको टोलरेट ना कर पाए। यह किस चीज के लक्षण है या इसको क्या कहते हैं? यह बीमारी जो है या यह जो लक्षण है इसको हम फोटोफोबिया कहते हैं। फोटो मतलब लाइट। फोबिया मीनंस यू आर फोबिक टुवर्ड्स इट। यानी कि आप उसको टोलरेट नहीं कर पा रहे। अब यह क्यों हो सकता है? फोटोफोबिया तब होता है जब व्यक्ति की सेंसेशन जो है वह किसी बीमारी करके स्टिमुलेट हो रही हो और लाइट उसको फदर स्टिमुलेट करती है। अब जैसे अगर आपकी आंख में कोई फॉरेन बॉडी पड़ गई हो या कंकड़ पड़ गया हो तो आपका कॉर्निया के ऊपर थोड़ा सा जख्म या वो खुरदरा जाता है जिसको हम एब्रेशन कहते हैं। तो आपको ब्राइट लाइट से इनटोलरेंस होती है। अगर आपको वह फर्दर बढ़के कोई अल्सर बन गया हो कॉर्निया के ऊपर तब भी आप फोटोफोबिया होते हैं। फोटोफोबिया यह बताता है कि यह बीमारी थोड़ी सी आंख की सीरियस की तरफ जा रही है। यदि आपको कंजक्टिवाइटिस जैसी चीज हो रही है तो उसमें आप कभी लाइट को इनटोलरेंट नहीं होंगे। वो फोटोफोबिया नहीं होगा। मगर अगर यह जो कंजक्टिवाइटिस है यह आपके कॉर्निया की तरफ जा रहा है और कॉर्निया में अल्सर कॉज कर रहा है तो आप लाइट को इनटोलरेंट हो जाएंगे तो वो फोटोफोबिक हो गए। यदि आपको यह लक्षण है कि आपको लाइट के तरफ टॉलरेंस नहीं हो रही है यानी कि आप ब्राइट लाइट को देख नहीं पा रहे हैं तो यह आंख के अंदर किसी बीमारी के लक्षण हो सकता है। जिसके लिए आपको जल्द से जल्द किसी आई स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए और उसकी जांच करवानी चाहिए और उसका जो सही ट्रीटमेंट है वो उसका करवाना चाहिए यदि फोटोफोबिया को आप इग्नोर करते हैं तो जो बीमारी है जिसके कारण यह फोटो फोटोफोबिया मैं दोबारा कहना चाहूंगा यह एक लक्षण है या सिम्टम है कि यानी आपकी आंख में कोई बीमारी है जो कि अटेंशन सीक कर रही है और अगर आप इसको अटेंशन नहीं देते हैं और यह बढ़ती जाती है तो आपकी विजन इससे जा सकती है। अल्सर है जैसे कॉर्निया का तो कॉर्निया आगे से जाकर मेल्ट हो सकता है। उसके अंदर दाग रह सकता है। उससे आपकी विजन कम हो सकती है। यूवीइटिस है तो उसमें आपको ब्राउन ऑफ द आई की इनफ्लेमेशन है तो उसमें फदर कॉम्प्लिकेशन लाइक काला मोतिया वगैरह सब कुछ हो सकता है। इवन अगर आपको काले मोतिए का अटैक हुआ हुआ है एंगल क्लोजर ग्लूकोमा का तो भी आप फोटोफोबिक होंगे। तो इसको इग्नोर नहीं करना।
DR M WALI

मुंह में छालों का होना कोई बडी बीमारी का संकेत भी हो सकता है
आमतौर पर आजकल लोगों के छाले हो जाते हैं मुंह में, म्यूकस मेंब्रेन में अल्सर्स हो जाते हैं। जुबान में अल्सर्स हो जाते हैं। खाने की मुश्किल हो जाती है। मिर्च नहीं खा पाते हैं। मुंह में जलन होती है और बोलना भी कभी-कभी उसमें एक्सट्रीम स्टेज में डिफिकल्ट हो जाता है। तो यह मुंह के छाले अल्सर्स या टंग अल्सर्स या म्यूकोसल अल्सर्स किसी सिस्टमिक बीमारी का इंडिकेशन हो सकते हैं। किसी डेफिशिएंसी का इंडिकेशन हो सकते हैं। कोई ऑटोइ्यून डिजीज का इन इंडिकेशन हो सकते हैं या स्ट्रेस से भी हो सकते हैं। तो इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए हम इन लोगों को देखते हैं। उनका विटामिन बी12 लेवल देखते हैं। बी6 लेवल देखते हैं। फोलिक एसिड लेवल देखते हैं और ऐसी किसी बीमारी का कोलेजन डिजीज का, सिस्टमिक डिजीज का, इंटेस्टाइनल डिजीज का जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस का इंडिकेशन हो सकता है। लेडीज में सिस्टमिक लपस या यह गठियाबाई में हो सकता है, रुमेटॉइड अर्थराइटिस में हो सकता है। पहले हमारे टाइम में रुमेटिक डिजीजेसेस होती थी। उसमें हो जाते थे। कुछ स्पॉट्स होते थे मुंह के अंदर, पैट के ऊपर, चीक्स के ऊपर या यह स्ट्रेस से बहुत कॉमन है। इसको हम एफ्थस अल्सर भी कहते हैं। इसका नाम दिया गया बाकायदा स्ट्रेस से होता है या डेफिशिएंसी से होता है। सो ये स्ट्रेस अल्सर्स भी हो सकते हैं। एफ्टस अल्सर भी हो सकता है, डेफिशिएंसी अल्सर हो सकता है और पेट की खराबी से हो सकता है, डेफिशिएंसी से हो सकता है या किसी भयंकर सिस्टमिक बीमारी जैसे गठिया है, ल्यूपस है। और सिस्टेमिक बीमारियां हैं कुछ उनमें हो सकता है। कोलन की बीमारियों में हो सकता है। बच्चों में मेल अब्सॉर्प्शन सिंड्रोम से हो सकता है। और हमारे देश में एक बहुत कॉमन बीमारी होती है। टीबी आंतों की टीबी में हो सकता है। और कुछ केसेस में हम नहीं जानते हैं। उसको हम एडिओयोपैथिक भी कहते हैं। तो इसमें ओरल स्टेरॉइड्स लिए जा सकते हैं। ये ऐसी बीमारी है जिसमें लोकल स्टेरॉइड्स लगाने से तुरंत आराम मिलता है। जिस चीज की डेफिशिएंसी हो जैसे फोलिक एसिड उसको खाने से तुरंत आराम मिलता है। हमारे जमाने में रोग्लिसरीन मिलाकर लगाई जाती थी। मुंह में थोड़ा सा हल्का सा नींबू के साथ प्योर भी लगाते थे ज्यादातर। तो रोग्लिसरीन इसके लिए बहुत अच्छी है। उसमें बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का मिक्सचर होता है। तो ये देसी दवाइयां हैं और इनको करने से और सबसे बड़ी इसमें जो इलाज है वो मुंह की हाइजीन है। हम रात को सोते समय गार्गस करके मुंह धो के मुंह वॉश करके और पेस्ट रात को करना जरूरी है। वह रात को जरूर करें। रात को बहुत कम लोग करते हैं।
