मोदी जी की दो योजनाएं  Bihar में क्यों नहीं सफल  

बिहार में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री क्या बने कईं ऐसी रिपोर्ट सामने आ रही हैं जो नए मुख्यमंत्री की नींदे हराम कर सकती हैं, जी हां ये रिपोर्ट बता रही हैं कि आने वाले समय में यूपी का ताज फूलों का नहीं कांटों से भरा है और बीजेपी को इसे विकसित बिहार बनाने के लिए एड़ी चो़टी का पसीना बहाना पड़ेगा , जरा सी चूक होगी तो बिहार की जनता से किया गया विकास का वादा खतरे में पड़ जाएगा, जिन रिपोर्ट की बात हो रही है उसमें से एक यू-डायस नाम की  एक इंटरनल कमेटी  की जिसे शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों की स्थिति का पता लगाने के लिए बनाया गया था, इस रिपोर्ट में बिहार के स्कूलों के बारे में बहुत ही खतरनाक तथ्य सामने आए हैं, रिपोर्ट बताती है कि बिहार के 20 फीसदी स्कूलों में toilets यानी  शौचालयों में पानी का कोई इंतजाम नहीं है। अब ये रिपोर्ट सीधे तौर पर pm मोदी के देशभर में शौचालय खोलने के अभियान की भी पोल खोलती नजर आती है, मतलब शौचलय खुल रहे हैं पर अगर पानी ही नहीं तो उसका कोई मतलब नहीं है, वैसे यह भी चौकाने वाला आंकड़ा है कि बिहार के लगभग  95 हजार स्कूलों में से 76 हजार में  स्कूलों में नियमित सफाई का कोई ठोस इंतजाम नहीं।यह जानकारी भी मोदी का स्वचछ भारत योजना को मुंह चिढ़ा रही है।

सम्राट चौधरी के सामने  बड़ी चुनौती घटता भूमि जल स्तर 

अब एक और रिपोर्ट की बात करें जिसने नई सरकार यानी सम्राट सराकर को एक बड़ी चुनौती दे रखी है , जी हां ये रपोर्ट है  केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट हैं जिसमें बिहार में भूजल के इस्तेमाल और उसकी भूजल की बर्बादी  को लेकर को चिंता जताई गई है और कहा गया है कि यदि बिहार में यही हाल रही तोबिहार को लोगों को आने वाले 20-25 साल में पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। हाल ये है कि पीने के पानी के अलावाखेती-बाड़ी सहित अन्य जरूरतों के लिए  लोगों की ग्राउंड वाटर  यानी भूजल पर निर्भरता तेजी से बढ़ती जा रही है। और  जितनी तेजी से जमीन से पानी निकालकर इस्तेमाल किया जा रहा है, उतनी तेजी से उसका भराव नहीं हो रहा है।  केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2004 में भूजल का उपयोग 10.77 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) था। वहीं 2025 में यह बढ़कर 14.47 बीसीएम हो गया है। यानी भूजल के इस्तेमाल में लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  बढ़ा कारण यही माना जा रहा है कि सालों साल कोई ऐसी पुख्ता व्यवसथा लागू नहीं की गई जो ग्राउंड वाटर लेवल को बढ़ाने का काम करे।  अब हाल ये है कि बिहार में पानी के हिसाब से सुरक्षित क्षेत्रों की संख्या भी बहुत कम हो गई है, 2025 तक सुरक्षित क्षेत्रों का प्रतिशत घटकर 88.04 प्रतिशत रह गया है।

गंदा पानी फसलों के साथ मानव के लिए भी घातक 

गंभीर बात जो इस रिपोर्ट में सामने आई है वो है कि पानी की कमी के कारण जमीन की गहराई से पानी खींचा जा रहा है जिससे पानी की purity यानी  शुद्धता खत्म हो रही है। इससे पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरन की  मात्रा बहुत बढ़ रही है और ये सभी ना कोवल फसलों को नुककान पहुंचाते हैं बल्कि कैंसर, किड़नी खराब जैसी कईं गंभीर बीमारियों का भी लोगों को शिकार बना रहे हैं। वैसे रिपोर्ट में भूजल संकट से बचाव के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं।  इसमें कहा गया है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग (बारिश के पानी को इकट्ठा करना), जल संचयन को बढ़ावा दे, भूजल रिचार्ज के उपाय अपनाए, कई बार जहां एक बाल्टी पानी से हो सकता है, वहां सैकड़ों लीटर पानी बहा दिया जाता है। पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कई और भी उपाए हैं।

सम्राट चौधरी किसी और पर नहीं फोड़  सकते ढीकरा

अब जाहिर सी बात है कि बिहार कि ये दोनों समस्याएं सीधे तौर पर pm मोदी के अभियान से जुड़ी हैं और ऐसे में सम्राट चौधरी के समक्ष सबसे पहले इस तरफ ध्यान देना जरूरी है, अहम बात ये भी है कि बिहर में पिछले २० साल से उसके सहयोदी दल jdu का शासन रहा, जिसमें वो भी भागीदार रहे और ऐसे में वो काम ना करने का ढिंकरा किसी और पर नहीं थोंप सकती है, जाहिर सी बात है विपक्ष इन बातों को उछाल रहा है और चूंकि बहुत ही संवेदनशील मुद्दे हैं सीधे pm modi से जुड़े हैं इसलिए सम्राट चौधरी के समक्ष बड़ी चनौती है कि जितनी जल्दी इन समस्याओं को देखें और ठोस हल निकालें नहीं तो परिणाम वो खुद जानते ही होंगे।

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