TMC के बागी सासंदों के समर्थन के लिए चाणक्य का जबरदस्त खेला
जब से TMC के 20 सांसदों ने विद्रोह करके एक क्षेत्रीय पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में विलय किया और साथ ही nda को सपोर्ट करने की बात कह दी चर्चाओं का बाजार गर्म है कि ये नेता सीधे BJP में शामिल क्यों नहीं हुए क्या bjp आलाकमान ने tmc से आए किसी भी नेता को पार्टी में शामिल करने से मना कर दिया या फिर इसके पीछे की कहानी कुछ और भी है, जी हां पशिचम बंगाल के ज्यादातर लोग यही मान रहे थे कि ये सभी नेता उसी रास्ते पर चलेंगे, जिस पर और दलों के नेता चले यानी मोदी जी का दामन थामेंगे पर यह हुआ नहीं और हर कोई इसको लेकर सवाल खड़ा कर रहा है पर जानकार साफ कहते हैं कि ऐसा करके बागी नेताओं ने अपने आप को कानूनी रूप से सुरक्षित कर लिया , जी हां उन्होंने अपनी सदस्यता बचाने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति अपनाई है। क्योंकि यह क्षेत्रीय पार्टी इन नेताओं को वह कानूनी मान्यता legitimacy दे सकती है जो उन्हें अलग से एक स्वतंत्र गुट के रूप में उन्हें कभी नहीं मिल पाती। इसके जरिए बागी सांसदों को संसद में अपनी सामूहिक ताकत बनाए रखने के लिए हरी झंड़ी मिल जाएगी और BJP को भी बंगाल की जनता के विरोध का सामना किए बिना इन नेताओं से संसद में बिल पास करवाने में लाभ मिल जाएगा। वैसे चर्चा यह भी चल रही है कि इस सबके पीछे बीजेपी चाणक्य का ही दिमाग चल रहा है और उन्ही के मार्गदर्शन पर बागी नेताओं ने संसदीय और कानूनी खेला कर दिया। वैसे इसको लेकर जहां बीजेपी में उत्साह है वहीं tmc खुलेआम इसे राजनीतिक विलय ना मानकर एक विशुद्ध रूप से गई कानूनी तिकड़म है। उनका यह भी कहना है कि बड़ी चतराई से ये बागी बागी सांसद उन तमाम कानूनी पेचीदगियों से बच गए जो राज्य विधानसभा में टीएमसी (TMC) के बंटवारे के बाद पैदा हो गई थी, आपको बता दें कि हाल ही में विधानसभा में tmc के बागी विधायकों ने खुद को ‘असली टीएमसी’ बताकर आधिकारिक नेतृत्व को चुनौती दी थी, जिससे मामला तुरंत अदालती लड़ाई और दावों-प्रतिदावों में फंस गया, और इसी को देखते हुए लोकसभा के बागी सांसदों ने यह रास्ता अपना लिया। आपको बता दें कि ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया , मुख्य रूप से त्रिपुरा में स्थित एक पंजीकृत , पर गैर-मान्यता प्राप्त छोटी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है। इसका वोटर बेस बंगाली समुदाय माना जाता है।इस पार्टी के पास न कोई सांसद है न कोई विधायक है। लेकिन, TMC के बागी गुट के विलय के बाद यह सीधे तौर पर संसद में एक महत्वपूर्ण ताकत बन जाएगी।
