क्या अखिलेश 2027 के चुनाव में Congress पर भरोसा जता पाएंगे

 

अभी इंडी गठबंधन की बैठक हुई थी उसमें समाजवादी पार्टी ने पूरी बैठक में कांग्रेस के व्यवहार पर कांग्रेस के आचरण पर प्रश्न चिन्ह लगाया। विशेष रूप से जिस तरह से उसने डीएमके को तमिलनाडु में डंप किया। उसके बाद ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी कांग्रेस पर कितना भरोसा करेगी कितना नहीं करेगी इसको लेकर के संदेह है। उसके कई कारण है। पहली बात यह कि कांग्रेस जो है वो पैरासाइट की तरह से काम करती है। उसके पास अपना कोई वोट बैंक नहीं बचा हुआ है। अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो लगभग 2 से 2.5% का वोट बचा हुआ है। वो कितना कॉम्प्लीमेंट करेगी समाजवादी पार्टी को ये एक बात है। दूसरा ये कि कब समाजवादी पार्टी को डंप कर दे कांग्रेस एक ये प्रश्न है। तीसरा ये है कि क्यों समाजवादी पार्टी 2% वोट के कारण अपनी सीटें शेयर करेंगी? इसलिए कांग्रेस की तो मांग बढ़ेगी। सीटों की मांग ज्यादा होगी। इन सब के मद्देनजर कांग्रेस के नेतृत्व पर इसलिए कि अह जिस तरह से कांग्रेस का नेतृत्व व्यवहार कर रहा है और उत्तर प्रदेश की अह कांग्रेस की लीडरशिप विशेष रूप से जो एमपीज हैं जैसे इमरान मसूद हैं जैसे अजय राय हैं ये लोग जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं और जैसा व्यवहार कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मध्य प्रदेश में किया था। उसके बाद क्या समाजवादी पार्टी कोई लीनियंसी कांग्रेस को2027 में दिखाएगी? और यह जो पीडीए को एकजुट करने का है मंशा उसमें क्या अल्पसंख्यक एकजुट हैं और क्या अल्पसंख्यक कांग्रेस को विश्वास कर रहे हैं या कांग्रेस की तरफ कितना जाएंगे या समाजवादी पार्टी की तरफ रहेंगे या बहुजन समाज पार्टी की तरफ जाएंगे या तीनों में बंटवारा होगा ये भी एक बड़ा प्रश्न है। तो इन सब के बीच में कितना भरोसा समाजवादी पार्टी कांग्रेस को जता पाएगी 2027 के चुनाव में इसलिए कि अब साल भर से कम का समय बचा है ये एक बड़ा प्रश्न है।

TMC से आए नेता BJP में शामिल नहीं किएं जाएंगे

तृणमूल कांग्रेस को एक के बाद एक लगातार उनके नेता छोड़ते जा रहे हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि लोकसभा में जो उनके हैं जो दस्तेदार एमपी हैं उनके नेतृत्व में जो एक सांसदों का धड़ा अलग हुआ है। उसको अब सयानी घोष जैसे शत्रुघ्न सिन्हा जैसे और यूसुफ पठान जैसे नेताओं ने भी जाइन कर लिया है जो लगभग असंभव दिख रहा था। एक और महत्वपूर्ण बात है कि और भी बहुत सारे नेता हैं जो संपर्क में हैं। लेकिन अब सयानी घोष या शत्रुघ्न सिन्हा ये सयानी घोष बहुत वोकल थी। जिस तरह से वह पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री से लेकर के सब पर बहुत तीखा प्रहार करती थी। वह उसके बाद वह विपक्ष जो बिखरा हुआ दल है उसके साथ आ रही हैं और एक अलग ग्रुप बना करके एनडीए के समर्थन में नजर आएंगी। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा युसुफ पठान युसुफ पठान के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि  उनसे बोला गया कि वो अपनी सीट से त्यागपत्र दे दें। उस सीट पर बाय इलेक्शन जब होंगे तो ममता बनर्जी वहां से चुनाव लड़ के लोकसभा जा सकती हैं और जिससे वो पार्टी की लड़ाई है उस लड़ाई को मजबूती से आगे ले जाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। लेकिन युसुफ पठान ने मना कर दिया है। यह भी एक बड़ी चुनौती है और इस तरह से लगभग सभी जो आदेश हैं या जो सभी इंस्ट्रशंस हैं
उसको उनके नेता डिफाई कर रहे हैं। महुआ मोहत्रा ने भी तारीफ कर दी है शुभेंदुअधिकारी की। इसका मतलब यह कि वह भी डबल माइंड हो गई हैं और यह जो है वह लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी को अपने दल में शामिल करने से मना कर दिया है। ये एक इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी की तरह से रहे लेकिन भारतीय जनता पार्टी में इनका शामिल होना मुश्किल है।

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