Table of Contents

ट्रंप की लेटेस्ट अनाउंसमेंट अभी ईरान पर कोई हमला नहीं , करेंगे। कहीं ना कहीं नेगोशिएशन चल रहा है तो क्या डोनल्ड ट्रंप बहुत जबरदस्त प्रेशर में है, क्या ईरान तैयार है इसके लिए तमाम बातों पर चर्चा की Former Major General P.K Sehigal से

Ques—— ट्रंप कह रहे हैं कि की लेटेस्ट अनाउंसमेंट कि अब वो ईरान पे कोई हमला नहीं करेंगे। सर क्वेश्चन वही है कि इतना कंफ्यूजिंग हो रहा है कि कब लड़ाई हो रही है, कब स्टॉपेज हो रहा है, कब बातचीत चल रही है, कब मनमुटाव हो रहा है? इस समय ट्रंप ने जो कहा उसका क्या मतलब है?

Ans ——डोन्ड ट्रंप पर बहुत सारे जबरदस्त प्रेशर है। सबसे ज्यादा उनके पास इकोनमिक प्रेशर है। अमेरिका के अंदर में ग्रोसरी की कीमत, ऑयल की कीमत, गैस की कीमत, रियलस्टेट की कीमत दैट इज हाउसिंग की और एस वेल हेल्थ केयर की कीमत बढ़ गई है। जिससे वहां के लोग बहुत ज्यादा नाराज हैं। है। दूसरा वहां की जनता जो है और उनकी अपनी रिपब्लिक पार्टी है वो लड़ाई के अगेंस्ट है और ट्रंप साफ तौर पर जानते हैं कि मिड टर्म इलेक्शन में जो है वो हाउस ऑफ सेनेट का और हाउस रिप्रेजेंटेटिव का दोनों दोनों का पक्ष खो सकते हैं। उनके डिप्लोमेटिक दबाव के अंदर नेगोशिएशन चल रही है और ईरान जो है वो मंजूर कर रहा है कि स्टेट ऑफ हर्मूाज को खुला रखा जाएगा बिना किसी शर्त केऔर दूसरा न्यूक्लियर वह कभी नहीं बनाएगा।

Ques—-यह ट्रंप ने अनाउंसमेंट की है लेटेस्ट कि वह ईरान पे हमला नहीं करेगा, तो क्या इसमें सऊदी अरब और कुछ और देशों क जो रिप्रेजेंटेटिव है उनका बहुत बड़ा हाथ है और उन्होंने काफी बातचीत करी ट्रंप के साथ और फिर जाकर ये डिसीजन पर पहुंचे हैं?

Ans ——- ट्रंप के ऊपर जबरदस्त डिप्लोमेटिक प्रेशर भी है खासकर कतर से और सऊदी अरेबिया से क्योंकि जब जब ट्रंप ईरान के ऊपर हमला करते हैं तो ईरान की जवाबी कारवाई अमेरिका के खिलाफ तो नहीं होती , जीसीसी कंट्रीज के खिलाफ होती है और साफ तौर पे उसमें कतर है कुवैत है और कईं देश हैं और ईरान ने साफ तौर पे कह दिया है कि वो स्टेट ऑफ हार्मूज के अलावा बाब बलदेव को भी बंद कर देगा, अपने प्रोक्सीस के माध्यम से वो सऊदी अरेबिया के ऊपर हमले उनके जारी हो गए और सऊदी अरेबिया का अभी तक बहुत जबरदस्त एक्सपोर्ट हो रहा था ऑल एंड गैस वो भी कंप्लीटली बंद हो गया है ऐसे में जबरदस्त प्रेशर उनको सऊदी अरेबिया की तरफ से और कतर की तरफ से भी है और साथ ही साथ इजिप्ट की तरफ से और टर्की की तरफ से भी और पाकिस्तान की तरफ से भी है। प्रेशर किसी ना किसी तरीके से जंग को रोका जाए। इसी माफी का प्रेशर पूरी दुनिया की तरफ से भी है। क्योंकि पूरी दुनिया जबरदस्त प्रभावित है। और ट्रंप को साफ तौर पर नजर आ रहा है कि टाइमिंग इस समय उसके फेवर में नहीं है। तो ईरान के ऊपर प्रेशर बनाने के लिए उन्होंने साफ तौर पे कहा है कि अगर ये डील अगले तीन चार दिन में डील नहीं होती तो बड़े पैमाने पे आई लॉक एंड लोडेड और मैं इतनी बड़ी पनिशमेंट अभी दूंगा जो सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद इसके बराबर पनिशमेंट होगी।

Ques——कुछ खबरें ये भी आई है सामने की ईरान कह रहा है कि वो अब बिलीव नहीं करेगा यूएस पर और अपनी तरफ से पूरी तरह से तैयार है वो किसी भी मकाबले के लिए तो क्या जो अब बात चल रही है, नेगोशिएशन का दौर चल रहा है, ईरान क्या बिलीव कर लेगा क्योंकि लास्ट टाइम भी ऐसा देखा गया था कि जब नेगोशिएशन हुई थी दोनों के बीच में उसके बाद में ईरान ने हर हमले जारी रखे थे कुछ देशों पर। तो क्या इस समय अगर ये नेगोशिएशन होती है तो ईरान भी इसको एक्सेप्ट करेगा?

Ans—— ईरान ने साफ तौर पर कहा कि कोई डायरेक्ट नेगोशिएशन उनके साथ अमेरिका के साथ नहीं हुई। डोन ट्रंप साफ तौर पर कहना शुरू कर दिया कि उनकी डायरेक्ट नेगोशिएशन शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा किसी प्रकार से हम इसकी पुष्टि नहीं करते। हम किसी प्रकार से कोई बातचीत अमेरिका के साथ नहीं करेंगे क्योंकि हम अमेरिका को किसी प्रकार से ट्रस्ट नहीं करते। लेकिन उन्होंने ये भी साफ तौर पे कहा कि बातचीत हो रही है थ्रू अदर मीन्स। दैट इज थ्रूकतर एंड थ्रू सऊदी अरेबिया और दूसरे पाकिस्तान के वगैरह से वगैरह की तरफ से। लेकिन एस ऑफ टुडे वो कह रहे हैं अगर अमेरिका की तरफ से किसी प्रकार की कोई कारवाई हमारे खिलाफ होती है तो हम हर प्रकार से जॉवबी कारवाई करने के लिए पूरे तैयार है।

Ques——यहां पे एक बहुत बड़ा बात है जो चर्चा में भी आता है कि अगर शुरू से देखा जाए हर कोई ये कह रहा था कि ट्रंप और मोदी जी के रिलेशंस बहुत अच्छे हैं और इस वॉर को रुकवाने में मोदी जी को इनिशिएटिव करना चाहिए। आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पाकिस्तान आगे बढ़ गया। लेकिन उसके बाद जो पाकिस्तान की जग हंसाई हुई है क्योंकि ट्रंप तो किसी की मानते नहीं है चाहे वो नेगोशिएशन हो चाहे बातचीत का दौर हो तो इन सबके बीच जो भारत का अपना कदम था कि भारत ने थोड़ी दूरी बना के रखी ट्रंप के बीच में ईरान के बीच में जो बातचीत चल रही थी और जो देशों के बीच में बातचीत चल रही थी तो क्या ये हमारे देश के लिए अच्छा कदम साबित हुआ?

Ans——-मेरे मुताबिक जो मोदी का इनिशिएटिव रहा बहुत ही लाभदायक रहा है क्योंकि वास्तव में ना तो डोनाल्ड ट्रंप जो है किसी की बात मानते हैं ना किसी की बात सुनते हैं और मोदी अगर इन्वॉल्व हो जाते हैं तो बार-बार उनको झटका लगता क्योंकि ट्रंप जो है वही करते हैं जो उनके मन में होता है तो अपने एडवाइजर की बातचीत भी नहीं सुनते उनके जो वाइस प्रेसिडेंट जेडी वास है और उनके जो चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ है जनरल के वो साफ तौर पे कह रहे हैं कि उनका अपना आसन खत्म हो रहा है किसी प्रकार से जंग को आगे मत बढ़ाए रोका जाए क्योंकि उसके बावजूद आज ट्रंप ने चेतावनी दे दी है कि अगर मंडे तक कुछ डील नहीं होती तो बहुत बड़े पैमाने पर वो अटैक करेंगे और इतना बड़ा अटैक करेंगे जो सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद कभी नहीं हुआ। आज उसी के बारे में अगाची जो है उनके फॉरेन अफेयर्स मिनिस्टर वो साफ तौर पर इशारा दे रहे हैं कि ट्रंप कुछ भी कर सकते हैं इंक्लूडिंग द न्यूक्लियर अटैक और लेकिन वो कहते हैं अगर इसी को उन्होंने गलती की तो ईरान भी ऐसी सजा देगा जो आज तक अमेरिका को कभी नहीं दे। वैसे ट्रंप पे प्रेशर बहुत ज्यादा है। चाहे वो इंटरनल हो, चाहे वो एक्सटर्नल कंट्रीज का हो। ट्रंप की जबरदस्त कोशिश है कि किसी ना किसी तरीके से अमेरिका को उस लड़ाई से अलग किया जाए। क्योंकि अगर अलग नहीं होता अमेरिका और पोजीशन स्ट्रेंथ नजर नहीं आती खास करके उसको डिप्लोमेटिक सक्सेस नहीं मिलती और फ्रंट को सक्सेस नहीं मिलती तो उसको साफ तौर पर नजर आता है कि वो लिमिट हो जाएगा बुरे तरीके से सेनेट भी उनके हाथ से जाएगा , जिससे उसकी पावर जो है बहुत ही कम हो जाएगी ऐसे में उसकी जबरदस्त कोशिश है कि किसी ना किसी तरीके से कोई ना कोई समझौता हो जाए ये डिपेंड करता है ईरान के ऊपर क्योंकि ईरान साफ तौर पर जानता है कि टाइम जो है जो इस समय ईरान के पक्ष में है। उसका फायदा किसी प्रकार से डोनाल्ड ट्रंप को ना हो। वो प्रोजेक्ट करना चाहते हैं कि जीत हमारी हुई है। मिलिटरी अमेरिका इन द बैकफुट। और अगर अमेरिका साफ तौर पे नजर आए उनकी पब्लिक को कि अमेरिका बैकफुट पर है तो फिर भी डोनाल्ड ट्रंप इलेक्शन में बुरी तरह से क्रॉस हो
जाएंगे।