UP – कहीं अपने ही ना बिगाड़ दें योगी का खेल
जैसे जैसे यूपी चुनाव पास आते जा रहे हैं समाजवादी पार्टी योगी सरकार पर बहुत ज्यादा आक्रमक हो गई है. अखिलेश यादव सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं, हाल ही में हरदोई में गोपामऊ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक श्याम प्रकाश ने एक विवादित बयान देकर अखिलेश यादव के हाथ में योगी सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका दे दिया, जी हां विधायक श्याम प्रकाश ने हाल ही में प्रधानों के कार्यकाल में 6 माह की वृद्धि समारोह में खुलेआम कहा कि चुनाव विकास से नहीं, बल्कि तिकड़मसे जीते जाते हैं. बस इस बयान के सामने आते ही जहां समाजवादी पार्टी जमकर हमला बोल रही है वहीं बीजेपी नेताओं को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बीजेपी का खुद का नारा सिर्फ और सिर्फ विकास का ही है। अखिलेश के साथ कईं विपक्षी दल अब खुलकर बोल रहे हैं कि यह साफ हो गया है कि बीजेपी हर चुनाव बेईमानी से जीतती है और खुद बीजेपी विधायक ने यह बात कहकर भ्रष्ट भाजपाई राजनीति का एनकाउंटर कर दिया है।उसके ऊपर बुलडोज़र भी चलवा दिया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए यह भी कह दिया कि अब देखना यही है कि श्याम प्रकाश को पार्टी से निकाला जाता है या भाजपा की ओर से अगला मुख्यमंत्री घोषित किया जाता है। क्योंकि वो तिकड़म से चुनाव जीतने और जीताने में माहिर होने की बात कर रहे हैं। वैसे दूसरी तरफ ये आरोप भी लग रहे हैं कि श्याम प्रकाश के बयान को तोड़मोड़ पेश किया जा रहा है उन्होंने प्रधानों को यह सलाह जरूर दी थी कि साम, दाम, दंड, भेद जो भी तिकड़म करनी है करना पर अगला चुनाव आपको ही जीतना है , लेकिन विधायक ने साफ तौर पर यह भी कहा था कि प्रधान कोई ऐसा कार्य न करें जिससे भाजपा सरकार का उनपर से विश्वास उठ जाए।
Tamilnadu बीजेपी को मिलने वाला एक ओर झटका
विजय थलपति की जीत तमिलनाडू में कईं राजनीति बदलावों का सीधा संकेत मानी जा रही है . सबसे पहला की द्वविड राजनीति से आम लोग उब गए हैं और वो किसी नए नेतृत्व को स्वीकार करने में नहीं हिचकिचाएंगे जो उनके लिए काम करे, कम ही लोग ये जानते होंगे कि विजय काफी समय से आम लोगों के बीच अपनी ngo के माध्यम से काम कर रहे थे, जिसके कारण ही माना जा रहा है उन्हें लोगों ने चुना, और खबरें आ रही हैं कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई अपनी नई पार्टी बनाने की सोच रहे हैं और अगर ऐसा हुआ तो तमिलनाडु में एक और बड़ा राजनीतिक खेला हो सकता है। अब ये भी बात कम ही लोग जानते हैं कि अन्नामलाई काफी समय से अपना एक एनजीओ वी द लीडर्स चला रहे हैं और इसी के जरिए वह युवाओं को राजनीति से जुड़ने के लिए ट्रेनिंग देने की सोच रहे हैं जो आगे जाकर उनकी पार्टी के लिए मजबूत वोटर्स के रूप में काम करेंगे। कहा जा रहा है कि अन्नामलाई कि इस पार्टी का नाम मक्कल शक्ति अय्यकम होगावैसे BJP आलाकमान की ओर से इस नई बनने वाली राजनीतिक पार्टी को लेकर कोई बयान नहीं आया है। पर हां कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने BJP पर तंज कसते हुए कह दिया है एक और पार्टी बनने वाली है। आपको बता दें कि बीजेपी ने AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी की एक शर्त को मानकर अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को राज्य अध्यक्ष बनाया था, बीजेपी से गठबंधन करने के लिए उन्होंने अन्नामलाई को हटाने की मांग की थी, और उसके बाद से ही अन्नामलाई बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं।
West Bengal ममता दीदी को अचानक राहुल क्यों अच्छे लगने लगे
इसमें कोई दो राय नहीं कि राजनीति में आया बुरा समय दोस्त को दुश्मन बना देता है और विरोधियों को करीब ले आता है,
हाल फिलहाल में इस तरह की कमिस्ट्री राहुल गांधी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC के बीच साफ देखने को मिल रही है. ये वही ममता बनर्जी हैं जिन्होंने चुनावों में कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से साफ इंकार कर दिया था और राहुल गांधी के लिए भी कईं बार जनसभाओं में तंज कसे, पर आज ममता बनर्जी और उनका भतीजा दोनों ही राहुल गांधी के गुणगान गा रहे हैं , इसके पीछे छ्पे कारण को भी जानना जरूरी है. जी हां जिस तरह से TMC सांसद कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमलों की राहुल गांधी ने निंदा की तो बस ममता की पार्टी को जैसे एक बड़ा सहारा मिल गया क्योंकि पार्टी की हालात ऐसी हो गई है कि उसके नेता ही छोड़ छोड़कर भाग रहे हैं, ऐसे में राहुल गांधी का सपोर्ट मिलने से ममता और अभिषेक खुलकर राहुल की तारीफ कर रहे हैं, अभिषेक बनर्जी ने हमले के बाद समर्थन जताने के लिए राहुल गांधी का सोशल मीडिया पर आभार भी व्यक्त किया।अब सवाल यही है कि आखिर राहुल कैसे ममता की उपेक्षा को इतनी जल्दी भूल कर उनसे करीबी बनाने की कोशिश कर रहे हैं तो राजनीती गलियारों में चर्चा यही है कि कांग्रेस को भी पशिचम बंगाल में अपनी पैठ दोबारा बनाने के लिए एक मजबूत सहारे की जरूरत है और ममता से अच्छा कोई सहारा हो ही नहीं सकता क्योंकि अभी भी पश्चिम बंगाल के एक बड़े वर्ग में ममता की पूरी पकड़ है और इसी बात का फायदा कांग्रेस उठाना चाहती है। अब देखना यही है कि राहुल और ममता की करीबी विपक्षी गठबंधन को मजबूती देती है या वहां भी ये दोनों अहम की लड़ाई लेकर खड़े रहते हैं।
