प्रियंका गांधी की कुर्सी दूसरी पंक्ति में कैसे पहुंची
कांग्रेस को लेकर इस बात की चर्चा लगातार बनी रहती है कि पूरी कांग्रेस पूरे चार गुटों में बंटी हुई है, पहला गुट राहुल का दूसरा प्रियंका, तीसरा सोनिया गांधी और चौथे गुट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्किकार्जन खरगे के वफादार नेता आते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से कांग्रेस में चार की बजाय दो गुट सबसे ज्यादा प्रभावशाली और चर्चा में है और दोनों के बीच चल रही खेमेबाजी को लेकर कांग्रेस में गुपचुप चर्चा भी है, जी हां हम बात कर रहे हैं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के गुटों की, पिछले कुछ समय से जिस तरह प्रियंका गांधी बहुत ज्यादा एक्टिव और मुखर हैं और बहुत से युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं ऐसे में एक बार फिर उन्हें कांग्रेस की बागडोर संभालने की मांग जोर पकड़ रही है पर दूसरी तरफ राहुल खेमा इसको लेकर नाराज है और हाल -फिलहाल में जो देखने को मिला कि कल तक जो बहन अपने भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंतर मंजर पर उतरी थी उसकी लोकप्रियता से घबराकर उसे एक बार फिर दूसरी पक्ति के नेताओं के बीच में पहुंचा दिया गया, और यही बात बीजेपी ने भी पकड़ ली और वो खुलकर इसको लेकर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं।
क्या Priyanka को Congress में अलग-थलग करने की कोई चाल
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी साफ कह रहे हैं कि कांग्रेस दो खेमों में बंट चुकी है। प्रियंका गांधी को लेकर राहुल गांधी खेमे में बहुत असुरक्षा आ चुकी है , प्रियंका गांधी को पार्टी में अलग थलग करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि उनको कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व सौंपने की बात जोर पकड़ रही है। बीजेपी नेता ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में प्रियंका गांधी को बोलने तक का मौका नहीं दिया गया यही नहीं सांकेतिक संसद की कार्यवाही में भी प्रियंका गांधी बिल्कुल अलग बैठी दिखाई दी। इससे साफ लगता है कि राहुल गांधी का खेमा प्रियंका गांधी की राजनीतिक गतिविधियों को पूरी तरह से सीमित करने की कोशिश कर रहा है।
Rahul Gandhi का असली Competition प्रियंका गांधी के साथ
बीजेपी ने इसको लेकर कईं प्रशन खड़े किए हैं कि क्या राहुल गांधी के इशारे पर उन्हें रामलीला मैदान में बोलने नहीं दिया जबकि वहां सभी दलों के नेताओं की स्पीच थी और किसके कहने पर मॉक पार्लियामेंट के दौरान प्रियंका की कुर्सी दूसरी पंक्ति में लगाई गई और उन्हें बोलने का मौका भी नहीं दिया गया। प्रदीप भंडारी यह भी कहते हैं कि प्रियंका के आगे राहुल फीके पड़ जाते हैं और इसी कारण राहुल खेमा हर हाल में प्रियंका गांधी को पीछे रखने के प्रयास में लग गया है। वहीं राहुल गांधी जो खुद लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं वो भी जन-मुद्दों के बजाय कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में ध्यान दे रहे हैं और बस अपना पद अपनी गरिमा बचाने में लगे हैं।बीजेपी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सौ से भी ज्यादा बार लॉन्च करने की कोशिश की गई है और हर बार वो फ्लाप साबित हो रहे हैं, यह भी कारण है कि दूसरो दलों के नेताओं के साथ साथ राहुल गांधी अपनी बहन सिर्फ प्रियंका के साथ भी Competition कर रहे हैं और उनसे ही डरे हुए हैं।
