पांच राज्यों में चुनाव क्या जल्दी करवाने की कवायद शुरू

सरकार पांच प्रदेशों के चुनाव उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर को थोड़ा सा पहले करवा सकती है। इनमें से चार प्रदेश के चुनाव जो हैं उत्तर प्रदेश को छोड़कर के पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर यह मार्च में ड्यू है। 15 मार्च तक यहां चुनाव होने चाहिए। लेकिन जो मुश्किल है जिस कारण से चुनाव को पहले कराया जा सकता है वो ये है कि 1 मार्च , 2027 डेडलाइन है सेंसस को पूरा करने की और ऐसे में इतना सारा प्रबंधन जिसकी ज्यादातर जिम्मेदारी गृह मंत्रालय पर होती है और गृह मंत्रालय का ही काम है सेंसस करना जनगणना करना तो उन परिस्थितियों में चुनाव को पहले कराए जाने की संभावना बहुत तेजी से बढ़ रही है। अब इसमें उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां पर मई तक चुनाव कराए जा
सकते हैं। लेकिन चार प्रदेशों में चुनाव पहले हो और उत्तर प्रदेश में मई में मतलब जनगणना के बाद हों, यह भी ठीक नहीं तो उसके मद्देनजर इस तरह की संभावना बन रही है कि या तो दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 तक इन पांचों प्रदेशों में चुनाव करा लिए जाए और भी बहुत सारी संभावना हैं जिसके कारण सरकार ये चाहती है कि चुनाव पहले करा लिए जाए, लगातार सरकार को इस तरह के फीडबैक भी आ रहे हैं कि सरकार इन प्रदेशों में मणिपुर को छोड़कर के उत्तराखंड, गोवा और उत्तर प्रदेश में बहुत मजबूत स्थिति में है।
पंजाब में सरकार लगातार कोशिश कर रही है। हो सकता है कि इस बार शिरोमणि अकाली दल के साथ अलायंस फिर से हो जाए और जिस तरह से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वहां पर पंजाब में पंजाब की राजनीति में जिस तरह से उन पर लगातार उनकी आलोचना हो रही है। वो एक के बाद एक मुश्किलों में फंसते जा रहे हैं। उन सब
परिस्थितियों में इस बार अगर भारतीय जनता पार्टी अपने अलायंस के साथ वहां कुछ बेहतर कर पाती है तो उसको नहीं नकारा जा सकता और लगातार सक्रियता केंद्रीय नेतृत्व की पंजाब की तरफ बढ़ी है और पंजाब पे वो काम करते हुए दिखाई देते हैं। तो इन सारी परिस्थिति में ऐसी बात इस बात की पूरी संभावना है कि इस बार जो पांच प्रदेशों के चुनाव होने वाले हैं वो पहले हो जाएं।

 

तेजस्वी गाजियाबाद में विपक्षी एकता की प्रदर्शन कहीं यहीं से चुनाव लड़ने की तैयारी तो नहीं

तेजस्वी यादव ने अपने पुत्र का जन्मदिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मनाया। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री को अपने पुत्र के जन्मदिन को मनाने के लिए गाजियाबाद आना पड़ा। गाजियाबाद क्यों मना रहे हैं? एक मिस्टरी मिस्टीरियस सी बात है। क्या वो वहां इसमेंथे कि किसको बुलाया जाए? किसको ना बुलाया जाए? ये असमंजस था। क्या इस बहाने वो कोई पॉलिटिकल इक्वेशन सेट करना चाह रहे थे? इसलिए कि जिस तरह की बात जो गेस्ट लिस्ट थी वो काफी बड़ी थी और काफी वाइब्रेंट थी जिसमें ममता बनर्जी भी थी। अब उत्तर प्रदेश में है तो अखिलेश भी थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थे कि ये नहीं थे। ये राहुल गांधी इसमें थे और ये इस तरह के लोग थे। बड़ी वाइब्रेंट सूची अगर सूची का नाम गिना लेंगे तो पूरा कार्यक्रम उसी में चला जाएगा। लेकिन अब क्या इस बहाने ये बर्थडे डिप्लोमेसी या बर्थडे सियासत तेजस्वी कर रहे थे? अच्छा अभी वहां पर तुरंत तुरंत चुनाव हुए हैं तो अभी वहां पर अब की तैयारी को लेकर के जरूर बात हो सकती है। एक और महत्वपूर्ण मामला है कि क्या जिस तरह से ममता बनर्जी बयानबाजी कर रही हैं उस परिस्थिति में तेजस्वी एक मीडिएटर के तौर पर इस बर्थडे के बहाने
समझौता कराने की कोशिश में हैं मतलब विपक्षी एकता को एक बार फिर एक साथ ले आने की कोशिश है। यह सारी चीज़ें जो हैं यह सारे कयास हैं और एक और बात है इसको एक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन फिर एक बात रह जाती है कि तेजस्वी
यादव को गाजियाबाद में आकर के शक्ति प्रदर्शन करने की क्या जरूरत है? क्या गाजियाबाद में वो चुनाव लड़ेंगे? गाजियाबाद में उनको कितने लोग समर्थन करते हुए? अब यह मैं नहीं कह रहा हूं। गाजियाबाद में बहुत सारे बिहार के लो हैं। जिसके पास जो भी थोड़ा साधन संपन्न होता है वो गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद में घर खरीदता है। बिहार कोई नहीं लौटना चाहता। बंगाल कोई नहीं लौटना चाहता। तो इसलिए जो पूरा का पूरा इलाका है ये मतलब ये जो एनसीआर है वहां पर बिहार के लोग भरे पड़े हैं। तो लेकिन उनसे क्या होना है? वह तो ज्यादातर वोटर अब उत्तर प्रदेश के बन गए हैं तो वह भी नहीं होना है। यह एक मिस्ट्री है। क्यों गाजियाबाद में आया है? इस पर बहुत सारे राज खुलेंगे।

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