नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालन शाह चुनकर आए हैं , पहले से ही नेपाल के साथ रिश्तों में कड़वाहट बनी हुई है, फिर बालन शाह एक बार फिर भारत के हिस्सों को नेपाल का बताकर संबंधों में कड़वाहट घोल रहे हैं, उन्होंने कहा कि कि यूके और चीन को विवाद मेम इंटरवीन करना चाहिए। पर खुद इस काऱण उनकी अपनी जनता और नेता उनके खिलाफ हैं, सवाल यही है कि क्या बालेन शाह के आने पर नेपाल और भारत के रिश्तों में फिर से दोस्ती बनेगी, तमाम बातों पर चर्चा की हमारे साथ Former Major General P K Sehigal ने
Ques——बालेन शाह के किस बयान पर राजनीती गर्मा गई, भारत के साथ नेपाल में भी निंदा हो रही है।
Ans——-देखो बाल शाह साफ तौर पj कह रहे हैं कि तीन इलाके जो है जो हिंदुस्तान के पास हैं लिपधारिया, लिपुलेखा और कालापानी ये वास्तव में नेपाल की टेरिटरी है, जिनपर हिंदुस्तान ने कबजा किया हुआ है। फिर से विवाद शुरू हुआ है, लिपुलेखा को लेकर । पर बालेन शाह ने जो बयान दिया वास्तव में समझा यही जा रहा कि उनकी उम्र 35 साल है और उन्हें किसी बात का तजुर्बा नहीं है। उनको लगता था कि उनकी पॉपुलैरिटी जो है इससे बढ़ेगी और वास्तव में उल्टा पड़ा है , हिंदुस्तान ने साफ तौर पे कहा है कि ये टेरिटरी हिंदुस्तान की है ना के नेपाल की और नेपाल ने कहा है कि इस चाइना भी इन्वॉल्व होना चाहिए और यूके भी, यूके इसलिए कि ये तमाम जो ट्रीटीज थी ब्रिटिश ब्रिटिश के टाइम पर हुई थी और चाइना इसलिए क्योंकि गलवान के बाद में चाइना के साथ में कोई बॉर्डर ट्रेड नहीं हो रहा था और पिछले छ साल से कैलाश वनरोवर की यात्रा भी इस रास्ते से हो रही थी हिंदुस्तान ने एक 80 किलोमीटर की नई सड़क बनाई जो सड़क जाती है ताकि फौज की मूवमेंट के लिए डिस्ट्रिक्ट सपोर्ट के लिए असाइनमेंट हो सके और साथ ही चाइना और हिंदुस्तान का लिपोलिक के माध्यम से ट्रेड की शुरुआत हुई है। लेकिन उन्होंने चाइना को कहा है कि ये इलाका तो हमारा है और हमारी इजाजत हमारी इजाजत के बिना आप किसी प्रकार से हिंदुस्तान के साथ ट्रेड नहीं कर सकते। वो ये भी कहते हैं कि कैलाश मानसरोवर जाने के लिए नेपाल की भी परमिशन आपको लेनी देखा जाए तो 1954 से हिंदुस्तान के लोग जो है कैलाश की यात्रा इसी रास्ते से करते रहे हैं। और 1962 में जब हिंदुस्तान और चाइना का युद्ध हुआ तब से ले हिंदुस्तान की फौज इस इलाके में कायम है। लेकिन अभी तक चीन ने क्योंकि नेपाल ने कभी इसके ऊपर विवाद नहीं किया था। विवाद के चार मुख्य कारण है। सबसे पहला हिस्ट्री, दूसरा जो है जग्राफी और तीसरा है पॉलिटिक्स और चौथा है नक्शेबाजी। अगर आपको याद होगा जब केपी कुली शर्मा प्राइम मिनिस्टर थे तो वास्तव में हिंदुस्तान और नेपाल के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई , अब चूंकि बालन शाह युवा है, इन्होंने पार्लियामेंट को साफ तौर पे कहा कि मुझे नहीं पता था कि हिंदुस्तान और नेपाल के बीच में कोई बॉन्डिंग डिस्प्यूट है। उन्होंने कहा मुझे तो प्राइम मिनिस्टर बनने के बाद पता लगा है। उन्होंने ये भी कहा कि नेपाल ने भी हिंदुस्तान के ऊपर काफी इंक्रोचमेंट किया हुआ है और हिंदुस्तान ने भी नेपाल के ऊपर इनक्रोचमेंट किया हुआ है। और कहा कि हम चाहते हैं कि हिंदुस्तान के साथ रिश्ते इम्रूव हो और हम चाहते हैं कि दोनों दोस्त जो है दोस्तों की तरह इकट्ठे बैठ के इसको रिोल्व करें लेकिन साथ ही साथ उन्होंने चाइना का जिक्र भी किया और अंग्रेजों का भी किया हिंदुस्तान ने साफ तौर पे कहा कि हमारे और आपके जो ताल्लुकात है इसके इसको कैसे सुलझा सकते हैं,
Ques —-विरोध के बाद अब बालन शाह खुद कह रहे हैं कि तीसरे पक्ष को नहीं रखा जाएगा तो क्या जो विरोध भारत की तरफ से हुआ उससे डरकर वो कुछ ऐसा बोले या नेपाल की जनता ने और नेपाऊ की जो विपक्ष की पार्टी है उसने इसका काफी विरोध किया कि उन्होंने संबंधों को बिगाड़ने वाला बयान दिया।
Ans — बालेन शाह को अहसास हो गया कि कुछ गलत हो गया इसलिए वो पीछे हटे, क्योंकि वो भी भारत के साथ संबंध अच्छे चाहते हैं, बहुत पुरानी एक ट्रीटी हुई थी जिसके तहत कहा गया था कि जो काली नदी है उसके वेस्ट की तमाम जमीन जो है उसको नेपाल को छोड़नी पड़ेगी। लेकिन उसके साथ कोई नक्शा नहीं अटैच किया था और काली नदी स्टार्ट कहां से होती है उसकी कोई जिक्र नहीं था। हिंदुस्तान का कहना है कि जो काली नदी है लिपु लेख से स्टार्ट होती है और नेपाल का कहना है कि काली नदी है जो लिपु धरिया से स्टार्ट होती है और वास्तव में इसके ऊपर कोई नक्शे वगह नहीं है इसीलिए वो चाहते हैं कि इस विवाद को अंग्रेज सॉर्ट आउट करे लेकिन हिंदुस्तान कह रहा है 1830 से उत्तरा उत्तराखंड का ये हिस्सा था और रेवेन्यू डिपार्टमेंट जो है 1830 से रेवेन्यू यहां से करता रहा है ऐसे में हिंदुस्तान की जमीन है और इसमें किसी प्रकार की कोई शक नहीं है। लेकिन फिर भी हिंदुस्तान चाहता है कि हम बातचीत के माध्यम से दो पक्षी बातचीत के माध्यम से इशू को रिवॉल्व करें।
Ques- आपको लग रहा है कि अब ये मामला सॉर्ट आउट होगा?
Ans——-मेरे मुताबिक यकीनन ये मामला सॉर्ट आउट हो जाएगा। यह पार्टी के जो जितने भी इस पार्टी में नेता लोग हैं सारे पढ़े लिखे हैं। सारे के सारे मास्टर्स या पीएचडी है और इस पार्टी को जो आरएसपी पार्टी है राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी इसको फॉर्म किया था चार साल पहले काबिल लाने ने जो आज उस पार्टी के अंदर एक मिनिस्टर ने और वो मिनिस्टर हिंदुस्तान में आए मोदी जी से भी मुलाकात की, उन्होंने बातचीत की, ट्रेड, बॉर्डर विवाद पर और वो साफ तौर पे कह रहे हैं वो चाहते हैं कि हिंदुस्तान और नेपाल के रिश्ते नाते इंप्रूव हो। भाईचारे की तरह से रहे जैसे पहले रहते थे और किसी प्रकार से वो रिश्ते नाते बिगाड़ना नहीं चाहते। क्योंकि साफ तौर पे उनको नजर आता है कि हिंदुस्तान जो है बहुत ही इंपॉर्टेंट है उनके लिए और नेपनीज सरकार जो है बहुत बड़े पर डिपेंडेंट है हिंदुस्तान के लिए कई चीजों के लिए और वो साफ तौर पे चाहते हैं कि हिंदुस्तान और नेपाल जो है के बीच में अनेकों नदियां है जिनसे हाइड्रो पावर जनरेट किया जा सकता है। वो कहते हैं हाइड्रो पावर जनरेट किया जा फ्लड को कंट्रोल किया जा सकता है। वो तो चाहते हैं कि सारे जो हिंदुस्तान चाहता था फैसले जिनके ऊपर रुकावट थी बिकॉज़ ऑफ़ केपी शर्मा ये सारे के सारे रिोल्व करें और उनकी बड़ी तमन्ना है कि हिंदुस्तान के साथ ताल्लुकात इंप्रूव करेंगे।
Ques —-क्या बालेन शाह नेपाल की तस्वीर बदल देंगे
Ans ——-लगता तो है, अगर आपको याद हो के. पी शर्मा प्राइम मिनिस्टर बने या उससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे बने सबसे पहले चाइना भागे। बालन शाह ने इन्होंने साफ तौर पे कहा है कि मैं अगले एक साल तक किसी देश नेपाल को छोड़ के किसी और देश में नहीं जाऊंगा। पहले मैं नेपाल की समस्या को सॉल्व करूंगा और हिंदुस्तान के साथ रिश्तेदारों को इंप्रूव करूंगा।
