Bihar – बिना सुरक्षा के बाहर निकलो लालू कहीं रोहिणी की नसीहत तो नहीं

बिहार की सड़कों पर अचानक लालू यादव का बिना किसी सुरक्षा के निकल जाने से कईं तरह की चर्चाएं गर्म होने लगी है और इसमें सबसे बड़ी यही है कि सिंगापुर से लौटने और वहां अपनी बेटी रोहिणी आचार्य से मिलने के बाद लालू अचानक एक्शन मोड में आ गए हैं और बिहार की जनता के बीच एक बार फिर अपनी पैठ बनाने की तैयारी में है, कहा जा रहा है कि उन्हें सलाह मिली है कि बिहार तेजस्वी से नहीं संभल रहा आपको ही सारी बागडोर अपने हाथों में लेनी होगी। और यही कारण माना जा रहा है कि सिंगापुर से लौटते ही लालू यादव ने बिना किसी सुरक्षा के जनता के बीच जाने का फैसला किया, आपको बता दें कि रोहिणी आचार्य लालू की वही बेटी हैं जिन्होंने तेजस्वी पर जमकर आरोप लगाए थे और राजनीति से अलग होने की बात कह डाली थी। रोहिणी ने पार्टी के अंदर चल रहे घमासान और स्थितियों को लेकर भी टिप्पणी की थी , माना जा रहा है शायद उसी की सलाह मानकर लालू यादव बिहार में खुद एक्टिव होकर कार्यकर्ताओं के अंदर जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं और चर्चाओं में वापस आने के लिए बिना सुरक्षा के कार में पटना की सड़क पर निकल गए, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या अब लालू को तेजस्वी की क्षमता पर भरोसा नहीं रहा इसलिए खुद ही जिम्मेदारी उठाने को दोबारा तैयार हो रहे हैं। जैसे की सबको पता है कि कम सुरक्षा देने के विरोध में लालू ने अपनी पूरी सुरक्षा वापस लौटा दी है।

 

ममता दीदी क्या अब Congress के सामने झुक जाएंगी


पशिचम बंगाल में इस समय जबरदस्त राजनीतिक उठा-पठक चल रही है, एक तरफ चर्चाएं हैं कि TMC कांग्रेस के साथ विलय करने की तैयारी कर रही है और दूसरी तरफ पता चला है कि ममता बनर्जी से बगावत कर बीजेपी को सपोर्ट करने वाले सांसदों में शत्रुघन सिन्हा और सांसद यूसुफ पठान का नाम भी शामिल हो गया है। चलिए बात करते हैं ममता और सोनिया के मिलने की , जिस तरह से ममता और सोनिया मिले थे चर्चाएं तो चल ही गई थी कि कुछ बड़ा खेला होने वाला है और अब TMC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से लगभग 90 मिनट तक मुलाकात की , पता चल है कि इसमें तृणमूल कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए मजबूत गठबंधन की इच्छा जताई है। यह बैठक 10 जनपथ पर हुई थी। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से यह भी सामने आया कि विलय का कोई भी प्रस्ताव TMC की तरफ से ही आना चाहिए, कांग्रेस किसी पर दबाव नहीं बनाएगी। वैसे आपको बता दें कि ममता बनर्जी 1998 में कांग्रेस छोड़कर ही तृणमूल कांग्रेस बनाकर अलग हुई थीं। 2011 में दोनों पार्टियों ने मिलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार को हराया था, लेकिन बाद में रिश्ते खराब हो गए, वहीं दूसरी ओर TMC सांसद सुष्मिता देव ने भी इस्तीफा दे दिया और उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात भी की। यह भी NEWS सामने आ रही है कि लोकसभा TMC के करीब 20 सांसद BJP के साथ जाने को तैयार हैं और अब इसमें शत्रुघन सिन्हा और यूसुफ पठान का नाम भी शामिल हो गया है। अब यह तो समय बताएगा कि ममता बनर्जी अपना राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए कांग्रेस के साथ कितनी करीबी बढ़ाती हैं और या फिर कांग्रेस का हिस्सा बन जाती हैं।

Modi और नेहरू बराबरी पर आए पर दोनों में जमीन-आसमान का अंतर

चर्चाएं चल रही हैं PM मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बराबर पहुंच गए हैं, जी हां बराबरी तो हुई है लंबे समय तक देश का प्रधानमंत्री बने रहने की, नेहरू जी ने 13 मई 1952 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, वह 1964 को अपने निधन तक कुल 4,398 दिन इस पद पर रहे और नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू के इस कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया।,लेकिन इस बराबरी के बावजूद दो प्रधानमंत्रियों की शिक्षा, पारिवारिक ताना बाना, लाइफस्टाइल , पालन-पोषण, सोच, स्वभाव, कार्यशैली, और राजनीतिक सोच ने उऩ्हें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग ही किया है , दोनों में हर चीज को लेकर जमीन आसमान का अंतर है और आज जब मोदी जी ने नेहरू के लंबे समय तक pm बने रहने का रिकार्ड तोड़ा है तो इसी अंतर पर गौर करना जरूरी है।

नेहरू का बचपन स्वीमिंग पूल, टेनिस कोर्ट में बीता-मोदी ने अपनी मां को दूसरे घरों के बर्तन मांजते देखा

बचपन से शुरूआत करें तो नेहरू का बचपन बेहद अमीर परिवार में बीता , कहा जाता है उनके बैरिस्टर पिता के घर में 42 कमरे थे और घर में अंग्रेज गवर्नेस, आयरिश शिक्षक और कई नौकर-चाकर थे। नेहरू जी ने हैरो स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, जहां ब्रिटिश वर्ग अपने बच्चों को पढ़ाता था। फिर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में अध्ययन किया। आपको बता दें कि नेहरू जी ने अपनी आत्मकथा में खुद लिखा है कि उनका बचपन बहुत सुरक्षित था , घर में बगीचा, टेनिस कोर्ट, स्विमिंग पूल सभी मौजूद थे । दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। वह अपने पांच भाई-बहनों के साथ रहते और उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की छोटी-सी दुकान चलाते थे। मोदी जी ने स्थानीय भाषा के स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।

Modi में नया सीखने की बहुत क्षमता जबकि नेहरू भावुकता में काम कर देते थे

नरेंद्र मोदी के बचपन में उन्हें अखबार, टूथब्रश, टूथपेस्ट, शॉवर, शौचालय या नल की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिली और 17 वर्ष में आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया, जवाहरलाल नेहरू ने लिखा कि उन्होंने अपने पिता को आयातित लाल वाइन पीते देखा, तो उन्हें लगा जबकि नरेंद्र मोदी ने बचपन में अपनी मां को दूसरों के घरों के बर्तन साफ करते देखा।
इसी कारण नेहरू जी की Personality ने हमेशा अमीर लोगों को अपनी ओर खींचा जबकि मोदी गरीबों के मसीहा बने। नेहरू पर अंगुलियां उठती हैं कि उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय में अनावश्यक देरी की,मामला संयुक्त राष्ट्र ले गए और भारतीय सेना को उस पूरे क्षेत्र पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण (पीओके से चला गया , इसी तरह चीन पर नेहरू ने भरोसा दिखाया और भारत को अक्साई चिन क्षेत्र खोना पड़ा। नेहरू ने सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी का अधिकांश जल मिलने लगा। दूसरी तरफ मोदी ने 72 वर्ष बाद, कश्मीर से विशेष दर्जा हटाकर एक ऐसा काम कर दिखाया जिसे लगभग असंभव ही माना जाता था। मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया। मोदी ने सीमाओं की सुरक्षा के लिए सक्रियता दिखाई। नौकरशाहों यह भी मानते हैं कि मोदी काम करते हुए सीखने की असाधारण क्षमता रखते हैं। वह ध्यान से सुनते हैं, नई बातें जानने के इच्छुक रहते हैं , उन्हें अधूरी तैयारी और लापरवाही कतई पसंद नहीं। दूसरी तरफ कईं एक्सपर्ट मानते हैं कि नेहरू को बारीकियों और विवरणों में दिलचस्पी नहीं थी। स्वभाव भावुक होने के कारण वो अक्सर भावनाओं के आधार पर फैसले ले लेते थे और , अपने विचारों पर अड़े रहते थे। आपको बता दें कि नेहरू के प्रशंसक जेआरडी टाटा ने एक इंटरव्यू में यह तक कह दिया था कि नेहरू को अर्थशास्त्र में कोई खास रुचि नहीं थी। चर्चाओं के दौरान वो अकसर बातचीत के खिड़की से बाहर बगीचे में खेल रहे एक विशाल पांडा को देखने लगते थे।

PM मोदी का रूटीन- न परिवार, न दोस्त न छुट्टियां, रोज कम से कम 16 घंटे काम


माना जाता है नेहरू ने सोवियत शैली की पंचवर्षीय योजनाएं, भूमि सुधार, बड़े बांधों और भारी उद्योगों पर जोर था, पर विकास का लाभ आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा, इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया। जबकि मोदी ने गरीबी कम करने के लिए बहुत ही प्रभावी ढंग से काम किया , करोडों बैक खाते खुलवाकर यह निशिचत किया कि सरकार से मदद के रूप में मिलने वाला पैसा सीधे गरीब के पास पहुंचे पिछले 12 साल में उनके नाम कईं ऐसे काम दर्ज हो गए जो सदियों तक याद किए जाएंगे। जबकि नेहरू काल में कोई भी ऐसी उपलबधि नहीं हुई जिसे आज याद किया जा सके । देश के घर-घर में लाखों टायलेट का होना सिर्फ मोदी जी की सोच से ही संभव हो पाया है, फिर कोविड के संकट से देश को बाहर निकलना, राम मंदिर का निर्माण, धाऱा 370 हटाना, जीएसटी , यूपीआई, सरकारी कामों का पूरी डिजीटलाइजेशन सब मोदी की देन है महिला आरक्षण विधेयक का पारित होना, मेक इन इंडिया को बढ़ावा सब मोदी राज में हुआ। मोदी ने शुरू किया स्वच्छ भारत मिशन जिसपर देश को गर्व है, और इस समय भी pm बने मोदी जी का रूटीन जानेगे तो चौक जाएंगे न परिवार, न दोस्त। न छुट्टियां, न अवकाश। रोज कम से कम 16 घंटे काम।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *