Maharashtra —शतरंज बिछ चुकी है किसके हाथ लगेगी जीत
महाराषट्र की राजनीति में अंदर ही अंदर कोई बड़ा खेला चल रहा है और माना जा रहा है कि उद्वव ठाकरे की पार्टी एक बार फिर टूट के कगार पर खड़ी हुई है, जी हां शिंदे गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उद्वव ठाकरे के 7 लोकसभा सांसद और 16 विधायक उनका साथ छोड़ सकते हैं , आपको बता दे कि उद्धव ठाकरे ने अपने निवास ‘मातोश्री’ में संसदीय दल की बैठक बुलाई थी उनमें 5 सांसद व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंचे थे, और कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उनमें से दो सांसद सीधे तौर पर उनके संपर्क में बने हुए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि संसद के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से पहले ही उद्वव के नौ में से सात लोकसभा सदस्य पाला बदलकर शिवसेना शिंदे गुट में शामिल हो जाएंगे और दलबदल कानून की पेचीदगियों से बचने के लिए पूरी तरह से रणनीति तैयार कर ली गई है। उन्होंने यह भी कह दिया कि ना केवल सांसद बल्कि 20 में से 16 विधायक भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के पास आ रहे हैं, वैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने साफ कहा कि यह बेबुनियाद खबरें हैं बैठक में पांच सांसद ऑनलाइन जुड़े थे’, वैसे इस खबर के फैसने से महाविकास अघाड़ी भी परेशान है क्योंकि इससे गठबंधन भी कमजोर होगा और आगामी चुनावों से पहले यह सबके लिए बड़ा झटका होगा।
Up ——औवैसी का बहाना नसीहत तो अखिलेश को दे रहे ये कांग्रेसी नेता

भक्ति हो तो कांग्रेस नेता इमरान सूद जैसी ही होनी चाहिए जिन्हें अभी तक राहुल गांधी के नेतृ्तव मे हारे गए लगभग 100 इलेक्शन नजर ही नहीं आते हैं और वो एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी को ही शिक्षा दे रहे हैं कि राहुल जी के नेतृत्व में ही लड़ाई को जीता जा सकता है। दरएसल इमरान मसूद औवैसी के उस बयान का जवाब दे रहे थे जिसमें औवेसी ने कहा था कि है कि वे उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराने के लिए किसी भी गठबंधन को तैयार हैं। इस पर सबसे पहले राहुल के भक्त इमरान मसूद जी का बयान सामने आ गया और उन्होंने कहा कि फैसला औवैसी का है। लड़ाई उत्तर प्रदेश में हो या देश में, लड़ाई बिल्कुल सीधी है। एक तरफ राहुल जी हैं और दूसरी तरफ मोदी साहब हैं। बीच का कोई रास्ता नहीं है वैसे सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विपक्षी दलों को यह भी बता दिया कि पश्चिम बंगाल में tmc का जो हाल हुआ वो इसलिए ही हुआ कि वहां ममता दीदी ने राहुल के साथ दोस्ती का हाथ नहीं बढाया, वैसे माना जा रहा है कि औवैसी के बहाने इमरान मसूद ने अखिवेश यादव को नसीहत देने की कोशिश की है , समय रहते राहुल का दामन थाम लें नहीं तो यूपी में समाजवादी पार्टी का हाल टीएमसी जैसा ही हो जाएगा।अब ऐसे भक्तों के बारे में क्या कहा जाए जो ये नहीं देख पा रहे कि जहां राहुल जाते हैं वहां जीत होते होते हार में ही बदल जाती है क्योंकि उन्हें विपक्ष के साथ तालमेल करना ही नहीं आता और अपने ही बयानों-विवादों में फंसे रहते हैं।
Congress कोई मुद्दा नहीं बचा कैसे खुश करें अपने आलाकमान को -यही सही
राजनीति के गलियारों में इस समय तीन बयानों पर जबरदस्त चर्चा या कहिए विवाद छिड़ा हुआ है और इसे इतिफाक कहिए या जानबूझकर कि एक साथ अलग अलग मंचों से मोदी और मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की गई है और तीखे कटाक्ष भी किए गए हैं, इन सब के बीच चर्चाएं यह भी जोरों पर हैं कि विपक्ष और खासकर कांग्रेस के पास मोदी सरकार को घेरने का कोई मुद्दा ही नहीं बचा है और उसके सभी नेता इस काम में लगे हुए हैं कि बस कुछ मिल जाए , मोदी को घेरा जाए और कांग्रेस आलाकमान को खुश किया जाए, सोमवार को इसकी शुरूआत कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने और मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि माई डियर फ्रेंड डोनाल्ड ट्रंप भारतीयों को मार रहे हैं और उनके मित्र देश के प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहे हैं। यही नहीं pm मोदी के फ्रांस दौरे को भी कांग्रेस ने उनपर हमला बोला और सवाल किया है कि अगर फ्रांस में मोदी जी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे तो उनसे हाथ मिलाएंगे। अब कांग्रेस ये क्यों पूछ रही है तो आपको बता दे कि कांग्रेस अमेरिकी नेवी द्वारा ओमान की खाड़ी में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के मामले को लेकर लगातार मोदी सरकार को घेर रही है। अजीब बात यह है कि कांग्रेस पहलगाम हमले को इस घटना से जोड रही है और अपना ही मजाक बनाने में लगी है। कांग्रेस का कहना है कि तब पाकिस्तान हत्यारा था, आज अमेरिका हत्यारा है’ लेकिन जैसा पहले भी कहा कि बेचारी कांग्रेस करे भी तो क्या करे कोई मुद्दा ही नहीं मिल पा रहा सुर्खियों में रहने का,
खैर अब बात करते हैं कांग्रेस के एक ओर कद्दावर नेता अशोक गहलोत की , वो तो और भी महान हैं और कहते हैं कि इंदिरा गांधी आज जिंदा होतीं, तो बीजेपी जैसी पार्टियों पर बैन लगा देती, उनको अचानक क्या सुझता है कि अचानक बयान दोकर बीजेपी पर ‘हिंदुत्व के नाम पर भड़काओ और राज करो’ की नीति अपनाने का आरोप लगा देते हैं , अशोक गहलोत सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि अब देश की सियासत में ‘आर-पार’ की लड़ाई का वक्त आ चुका है, जहां मुकाबला किसी भ्रम में नहीं, बल्कि सीधा ‘मोदी बनाम राहुल गांधी’ का होना चाहिए , अब अशोक गहलोत सीधे ही राहुल गांधी को मोदी की टक्कर में खड़ा करके कहां अपने points बनाने में लगे हैं ये सब जानते ही हैं।
