विजय थलपति ना केवल जीत बल्कि दो कद्दावर दलों को पहुंचाया टूट के कगार पर

तमिलनाडु में एक्टर विजय का धमाल सिर्फ जबरदस्त जीत तक ही नहीं सीमित नहीं रह गया है, उनका नाम और काम का करिसमा इतना ज्यादा है कि एक तरफ जहां उन्हें समर्थन देने के लिए aiadmk टूट के कगार पर खड़ी हो गई है , पार्टी के दो तिहाई विधायक यानी पार्टी के 30 से ज्यादा विधायक TVK को समर्थन देने के लिए बगावत पर आमादा हो गए हैं।वहीं कांग्रेस भी dmk के साथ अपना सालों पुराना गठबंधन तोड़कर उसे समर्थन देने को तैयार है, और इस कारण तमिलनाडू की राजनीति में चुनाव और रिजल्ट से ज्यादा अब हलचल मच गई है। पता चला है कि कांग्रेस ने टीवीके को दो मंत्री पदों की शर्त के साथ अपना समर्थन देने का फैसला किया है। कांग्रेस के विधायक समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपने की तैयारी में हैं। इससे DMK खेमे में बड़ी नाराजगी है, चुनाव परिणाम आए 48 घंटे ही हुए हैं और कांग्रेस के इस रंग पर DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने तंज कसते हुए कांग्रेस को पीठ में छुरा घोंपने वाली पार्टी बता दिया।और कांग्रेस को ‘गद्दार घोषित कर दिया। वहीं जयललिता के निधन के बाद aiadmk वैसे ही टूट चुकी है। अब विजय को समर्थन देने के लिए उसके बहुत से विधायक अड़ गए हैं जिससे महासचिव के. पलानीस्वामी की मुश्किलें बहुत बढ़ा गई हैं, उनके सामने बड़ी चुनौती है कि कैसे पार्टी को टूटने से बचाया जाए। चर्चा यही है कि विजय की नई पार्टी ने तमिलनाडू की बरसों पुरानी पार्टी dmk और aiadmk को खत्म सा कर दिया है। वैसे टीवीके को 108 सीटें जीती हैं। बहुमत के लिए करीब 10 सीटों की जरूरत है।

Rss पर्दे के पीछे से क्या कर दिया बड़ा खेला

बंगाल की जीत bjp के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है और इसका सेहरा मोदी-योगी, हिमंता बिस्व सरमा के सिर सजाया जा रहा है पर कम ही लोग ये जानते होंगे कि इस जबरदस्त जीत के पीछे rss यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग 15 साल से चल रही रणनीती काम आई है, जी हां साल 2011 में बंगाल में rss की लगभग 530 शाखाएं थीं, जो अब 2500 से ज्यादा हो चुकी हैं। पिछले साल ही यहां 583 नई शाखाएं खोली गई थी, पता चला है कि चुनाव से पहले rss ने पर्दे के पीछे रहकर बंगाल की जनता के साथ लगभग एक लाख से ज्यादा छोटी -छोटी बैठके करके जीत का नैरेटिव सेट कर दिया था। RSS बाकायदा 2021 की हिंसा के बाद संघ सुरक्षा कवच की भूमिका में आया। पीड़ितों के घर जा जाकर उन्हें आर्थिक और कानूनी मदद दी और इनके बीच बीजेपी की पैठ बढ़ाई। इसके साथ संदेशखाली जैसे इलाकों में सीधे टकराव की बजाय वहां के लोगों का भरोसा जीतने की रणनीति अपनाई। महिलाओं व पीड़ितों से लगातार बातचीत की और बताया कि संगठन उनके साथ है। स्थानीय त्योहारों, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों के जरिए भाजपा को स्थानीय विकल्प के रूप में पेश किया गया। सबसे बड़ा बंगाल के वोटर्स का डर तोड़ने का काम rss ने खूब निभाया और अभियान चलाकर गांव-मोहल्ले तक पहुंचकर वोटर्स वर्कर्स में भरोसा बनाया कि निडर होकर वोट दें। लोगों को बूथ तक लाने की तैयारी की। और जैसे ही वोटर बूथ पहुंच गया शुरूआत हो गई बीजेपी की जीत की

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