कईं लोग और खासतौर पर विपक्ष माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील को समझने में भूल कर रहे हैं।ये एक मैसेज है कि भविष्य में ऐसा ना हो कि हमें ईंधन और बाकी चीजों के चलते सख्त कदम उठाने पड़े। प्रधानमंत्री ने शुरुआत कर दी है, सारा मंत्रिमंडल, राज्यों के मुख्यमंत्री भी PM की अपील को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन विपक्ष का काम है सिर्फ अफवाहें फैलना, प्रधानमंत्री की अपील के बाद हाल ही में चांदनी चौक सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी जनता से संसाधनों का सही ढंग से संभल कर इस्तेमाल करने की अपील की है, अब चूंकि वो खुद व्यापारी वर्ग से संबंध रखते हैं तो इस अपील को उन्होंने किस तरह से आगे बढ़ाया, तमाम मुद्दों पर उनसे बातचीत की….
Ques—— जो फीडबैक आ रहा है पीएम मोदी ने जो अपील की है उससे व्यापारी वर्ग में अच्छी खासी नाराजगी है। खासतौर पे जो लोग गोल्ड के क्षेत्र में लगे हुए हैं।
Ans— क्योंकि मुझे लगता है कि लोगों ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील को समझने में भूल कर रहे हैं। उन्होंने ये जरूर कहा कि सोना मत खरीदो। लेकिन यदि आपके घर में उत्सव है तो आप जरूर खरीदो। लेकिन अनावश्यक रूप से यदि आप सोना खरीदते हो तो उससे क्योंकि हम बड़ी मात्रा में सोने को इंपोर्ट करते हैं। लगभग 900 टन के लगभग सोना हम इंपोर्ट करते हैं तो बड़ी मात्रा में हमारी विदेशी मुद्रा वो खरीदने में बाहर जाती है। तो आवश्यक है तो अवश्य खरीदें। अनावश्यक रूप से जो सोना खरीदना या अनावश्यक रूप से कोई भी ऐसा काम करना जो वर्तमान वैश्विक जो युद्ध चल रहा है वैश्विक परिस्थितियां चल रही है वो भारत के हितों के अनुरूप ही रहे।
Ques—-क्योंकि आप रिप्रेजेंट कर रहे हैं पूरा ही व्यापारी वर्ग ऐसे में आप किस तरह से इस अपील को आगे पहुंचा रहे हैं, किस तरह की समस्या आ रही है।
Ans——जो भी कुछ माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा उसके शब्दों को ना जाकर के उसके अर्थ को समझना चाहिए। जो आज प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं वो इसलिए कह रहे हैं कि कल भविष्य में ऐसा ना हो कि हमें ईंधन और बाकी चीजों के चलते सख्त कदम उठाने पड़े। तो भविष्य के भारत को समर्थ भारत बना रहे। हमारे यहां गतिविधियां सारी चलती रहे। तो आज छोटे-छोटे काम यदि हम करेंगे तो उससे हम अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं वैसे भी लोग खुद कन्वंस हो रहे हैं। मुझे कन्वस कराने की आवश्यकता नहीं है। लोग कन्विंस हो रहे हैं क्योंकि लोगों का ये मानना है कि लोग उस परिस्थिति में नहीं जाना चाहते। लॉकडाउन की परिस्थिति में नहीं जाना चाहते। इसलिए लोग आज जो भी कुछ प्रधानमंत्री जी ने कहा लोग उसके ऊपर अमल कर रहे हैं।
Ques—- विपक्ष जैसा कह रहा है और बिलकुल ठीक भी है कि आप दूसरों को नसीहत दे रहे हैं। पीएम मोदी ने एक अपील की है। लेकिन विपक्ष का यह कहना है कि अपने आप आप वीआईपी कल्चर क्यों नहीं खत्म करते हैं? और जिस तरह के वीडियो वायरल हो रहे हैं। दिख रहा है कि सरकारी कारों का दुरूपयोग हो रहा है।
Ans—–प्रधानमंत्री जी ने जबकि उनको सुरक्षा के प्रोटोकॉल उनके बहुत स्पेसिफाइड है। उसके बावजूद उन्होंने अपनी सुरक्षा को आधा कर दिया। गृह मंत्री अमित शाह जी ने अपने काफिले को आधा कर दिया। देश के बहुत सारे जो मुख्यमंत्री हैं उन्होंने अपने काफिले को आधा कर दिया। तो कहीं ना कहीं हमने शुरुआत तो की है, प्रधानमंत्री ने शुरुआत करी। विपक्ष
शुरुआत करेगा। विपक्ष का एक नेता आप मुझे बता दीजिए जिसने आज इस शुरुआत को अपने यहां से किया हो। क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं है? क्या भारत उनका नहीं है? क्या कल अगर कोई विपरीत परिस्थिति होगी तो वो क्या देश छोड़ के चले जाएंगे? माननीय प्रधानमंत्री जी ने शुरुआत करी, बहुत सारे मुख्यंत्रियों ने शुरुआत करी, सरकारी अधिकारियों ने शुरुआत करी। वर्क फ्रॉम होम के कल्चर की बात हो रही है। हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी ने लगभग उसके ऊपर निर्देश जारी किए हैं। पश्चिम बंगाल के नए नविवाचित मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी किए हैं। हमने तो शुरुआत कर दी। जी। लेकिन विपक्ष कहां है?
Ques -एक सांसद होने के नाते आपका इसमें क्या योगदान हो सकता है
Ans—— हम सब जो दिल्ली के सांसद हैं या अधिकांश सांसद हैं हम केवल एक गाड़ी के अंदर चलते हैं अब कोई हमको ये नहीं कह सकता है कि गाड़ी गाड़ी आप क्यों इस्तेमाल कर जाइए जी बिल्कुल ठीक है लेकिन आप ये अंदाजा लगाएं कि हमें दिन में 10 15 या 12 जगह जाना पड़ता है। अगर हम सार्वजनिक व्यवस्था से जाएंगे तो संभवत हम अपने उन कर्तव्यों का पालन नहीं कर पाएंगे। हमारा क्षेत्र बड़ा है। दूर है। कम समय में हमें मिलना पड़ता है। तो गाड़ी को यूज़ करना हमारी एक जरूरत है। लेकिन एक से अधिक गाड़ी हमारे किसी भी सांसद के पास में नहीं है।। मैं समझता हूं कि एक सांसद के रूप में अगर मुझे अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करना है। यदि मुझे एक छोर से दूसरे छोर जाना है और वहां पर भी अगर मैं सार्वजनिक व्यवस्था को यूज़ करूंगा तो स्वाभाविक है चार काम मेरे छूटेंगे। तो वो काम ना छूटे तो नहीं तो हम तो सार्वजनिक व्यवस्था में जाने को तैयार है।
Ques——एक बड़ा मुद्दा बहुत इंपॉर्टेंट है। नीट के जो पेपर लीक हुए हैं और आप सोचिए कि जब से ये सरकार आई है पहले भी होते थे लेकिन जो लगातार हो रहे हैं खासतौर पर जो इंपॉर्टेंट पेपर्स हैं बहुतज्यादा लीक हो रहे हैं। आपको लगता है कि कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ लापरवाही हो रही है और जो हमारा तंत्र है सरकारी तंत्र है वो उसको रोकने में फेल हो रहा है।
Ans—— देखिए मैं ये नहीं कहूंगा सरकारी तंत्र फेल हो रहा है। लेकिन जो भी लीग के लिए जिम्मेदार है उनको आइडेंटिफाई किया जा रहा है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई की जाएगी जिससे देश के किसी भी छात्र के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ ना हो ये
विश्वास मैं आपको दे सकता हूं I
Ques—— विपक्ष की मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देते हैं , नैतिकता के आधार पर ..
Ans— विपक्ष के कहने पर कोई मंत्री इस्तीफा देगा या विपक्ष के कहने पर कोई मंत्री मंत्रिमंडल में लिया जाएगा ऐसा लोकतंत्र में कभी नहीं होता यह प्रोगेटिव प्रधानमंत्री जी का है और प्रधानमंत्री जी निर्णय करते हैं। विपक्ष की सलाह की आवश्यकता मुझे लगता है हम लोगों को है नहीं।
