क्या Bihar में नीतीश की मर्जी का बनेगा CM या BJP कर देगी यहां भी खेला

क्या बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी का हाल बीजेपी के भूतपूर्व नेता सुशील मोदी जैसा तो नहीं होने वाला है, जो बिहार का cm बनने का सपना लेकर ही दुनिया से चले गए , क्या बिहार में नीतीश कुमार सम्राट चौधरी को आगे कर BJP को जाल में फंसा रहे हैं , क्या नीतीश अपनी पुरानी Strategy दोहरा रहे हैं, ये सवाल आजकर बिहार तो क्या दिल्ली तक की राजनीती में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पर इनका मतलब क्या है क्यों हो रही है इसकी इतनी चर्चा , बताते हैं दरअसल पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बिहार के डिपटी CM और BJP के कद्दावर नेता यानी सम्राट चौधरी को बिहार का CM बनाने की वकालत कर रहे हैं, कभी भरी सभी में उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं कभी उन्हें अपना छोटा भाई कहते हैं और भरी सभा में लोगों से कह भी रहे हैं कि काम यही देखेंगे तो इसमें कौन सी बड़ी बात है। सार्वजनिक सभाओं में नीतीश कुमार बार-बार सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख रहे हैं, पूरा अपनापन दिखाने की कोशिश की जा रही है, लग रहा है जैसे जनता के बीच नीतीश कोई संदेश पहुंचा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि जब नीतिश publicly इस तरह की बाते करेंगे तो सम्राट चौधरी का नाम CM पद के लिए तो उछलेगा ही।

 

CM पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम इतना क्यों उछाल रहे नीतीश कुमार

अब माना यही जा रहा है कि नीतीश जानबूझकर यह संकेत दे रहे हैं कि सम्राट चौधरी ही उनकी जगह लेंगे। और अगर होता है या नहीं होता तो दोनों ही सूरतों में नीतिश को ही फायदा होगा। अब नीतीश कुमार बहुत ही अनुभवी और खेले खाले खिलाड़ी हैं। अब उनको यह भी पता होगा अंदर से कि जरूरी नहीं है कि उनके चाहत पर या उनके कहने पर बीजेपी सम्राट चौधरी को सीएम बना देगी। तो नीतीश जानते हैं कि दोनों ही सूरत में उन्हें फायदा होने वाला है। सम्राट चौधरी का इतना नाम उछलने के बाद भी उन्हें CM नहीं बनाती तो माना जा रहा है कि इससे कुशवाहा वोटर नाराज हो सकते हैं, उन्हें ये पूरे समुदाय का अपमान लगेगा क्योंकि सम्राट चौधरी इसी समाज से आते हैं , अगर ऐसा होता है तो ये समुदाय बीजेपी से दूर होगा और ऐसे में बीजेपी बिहार में कमजोर हो सकती है, जो JDU के लिए फायदेमंद वाली बात होगी। दूसरी बात ये होगी अगर सम्राट चौधरी को कुर्सी मिलती है तो इसका श्रेय नीतीश खुद ले सकते हैं। वह कह सकते हैं कि मैंने तो बहुत पहले ही इसका संकेत दे दिया था। और सम्राट से जरिए नीतीश की बिहार में भी पैठ बनी रहेगी। दोनों ही स्थितियों में जदयू को फायदा मिलता दिख रहा है। सबको पता चल रहा है कि नीतीश के साथ सम्राट चौधरी की बॉन्डिंग बहुत ज्यादा है।

 

किसको कुर्सी मिलेगी, किस को नहीं मिलेगी, ये सब बातें PM Modi का फैसला

इन सबके बीच एक बात ये भी है जिसे समझना बहुत ज़रूरी है कि ये सब बीजेपी का आंतरिक मामला है। कौन CM बनेगा, कब बनेगा कब – किसको कुर्सी मिलेगी, किस को नहीं मिलेगी, ये सब बातें पीएम मोदी खुद डिसाइड करते हैं। और ऐसे में अगर नीतीश कुमार बढ़-चढ़कर सम्राट चौधरी का नाम ले रहे हैं। उसका नाम उछाल रहे हैं तो इसका खामियाजा कहीं आगे चढ़कर खुद नीतीश कुमार को और सम्राट चौधरी को ना उठाना पड़े। और यहां सुशील मोदी का उदाहरण देना जरूरी है जिस तरह से सुशील मोदी बिहार के cm बनने का सपना लेकर चले गए , बीजेपी ने उन्हें सीएम नहीं बनाया, साल 2005 के बाद से नीतीश कुमार और सुशील मोदी की बिहार में बहुत जबरदस्त बॉन्डिंग होनी शुरू हो गई थी। बहुत अच्छी तरह से दोनों तालमेल करके काम कर रहे थे और यही बात दिल्ली में बैठे बीजेपी के कई टॉप नेताओं को पसंद नहीं आई और हुआ क्या? इसका खामियाजा खुद सुशील मोदी को उठाना पड़ा। उनको दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया। नीतीश कुमार को कुछ ऐसे बीजेपी के नेताओं के साथ काम करना पड़ गया जिसको वो नहीं चाहते थे लेकिन उनकी मजबूरी रही क्योंकि बीजेपी ने कह दिया कि नहीं आपको इनके साथ काम करना है तो वही जो स्ट्रेटजी है वही जो हाल है क्या अब दोबारा एक बार रिपीट होगा नीतीश कुमार चाह रहे हैं नाम उछाल रहे हैं सम्राट चौधरी का लेकिन अगर बीजेपी उनको सम्राट चौधरी को सीएम नहीं बनाती है और उनको दिल्ली ट्रांसफर कर देती है क्योंकि नाम बहुत उछल गया और कुछ ऐसे नेताओं को नीतीश के बिहार की गद्दी थमा देती है जो नीतीश कुमार की Close बुक में नहीं हैं तो ये भी नीतीश के लिए ठीक नहीं होगा।

BJP को इंतजार है 10 April का


वैसे बीजेपी अभी सब चुपचाप देख रही है, कोई रिएक्शन नहीं आ रहा है , बावजूद इसके नीतीश कुमार लगातार कह रहे हैं ये बात इशारा कर रहे हैं कि सम्राट चौधरी कंधे पर हाथ रख रहे हैं बोल रहे हैं आगे का हमें नहीं इनको संभालना है लेकिन बीजेपी चुप है और ये बात है कि बीजेपी शायद इंतजार कर रही है 10 अप्रैल का क्योंकि माना जा है कि नीतीश कुमार इसी दिन इस्तीफा देंगे क्योंकि राज्यसभा की जो कारवाई है इसी दिन से शुरू होने वाली है तो कब वो इस्तीफा देंगे उसके बाद बीजेपी अपने पत्ते खोलेगी कि वो किसको बिहार की कुर्सी पर बिठा रही है|

Bihar कोई अनजाना चेहरा ना बन जाए CM


लेकिन एक बात तो बहुत साफ है और ये जनता भी जानती है सब जान भी गए हैं जिस तरह से पुराने इलेक्शन हुए हैं चाहे वो मध्य प्रदेश का सीएम हो चाहे वो राजस्थान का सीएम हो या किसी और प्रदेश का सीएम हो जहां बीजेपी जीतती है जो नाम चर्चा में होते हैं उनमें से कभी भी कोई मुख्यमंत्री नहीं बनता है। कोई दूसरा ही अनजाना नेता CM बना दिया जाता है, हाल ही में दिल्ली के इलेक्शन में भी यही हुआ था कि प्रवेश वर्मा का नाम इतना उछल गया था क्योंकि केजरीवाल को हराया था लेकिन बन गई CM रेखा गुप्ता, यह बात बीजेपी के साथ है कि जिसके नाम उछलते हैं वह सीएम नहीं बनते हैं। लेकिन हां बिहार में बीजेपी क्या करने वाली है? उसने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अब इंतजार तो बस यही है कि नीतीश कुमार कब इस्तीफा दें और कब बीजेपी अपने पत्ते खोलें।

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