Non Vegetarian Diet कैसे बन रही पर्यावरण के लिए खतरा

 

कम ही लोग ये जानते होंगे कि जो चिकन , मीट हम खाते हैं उससे जानवरों को तो मारा जाता ही है पर साथ ही नान वेजिटेरियन डाइट हमारे परे्यवरण को भी बड़ा खतरा पहुंचा रही है, अब आप सोच रहे होंगे कि मीट -चिकन का , पपर्यावरण से क्या लेना देना पर आपको बता दें कि पूरी दुनिया में जंगलों की कटाई का एक बडा कारण फलती फूलती मीट इंडस्‍ट्री ही है, क्योंकि जंगलों को काटकर ही मवेशियों के भोजन के लिए ग्रास लैंड तैयार किया जाता है , उनको रखने के लिए बड़े बड़े फार्म हाउस बनाए जाते हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि मीट इंडस्‍ट्री धरती के इको-सिस्‍टम को तबाह कर रही है। यही नहीं मीट इंड्रसट्री को फलने फूलने के लिए मनुष्‍य के उपयोग का 30 फीसदी पानी भी चला जाता है।

 

 

Industry चलाने के लिए जंगलों में लगाई जा रही है आग

 

पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले एनजीओ ग्रीन पीस की एक रिपोर्ट तो बताती है कि दुनियाभर में जगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं पर ये आग लगती नहीं लगवाई जाती है। जिससे मीट इंडस्‍ट्री के लिए काटे जाने वाले हजारों- लाखों जानवरों के लिए चारागाह तैयार किया जा सके। अब जाहिर सी बात है कि इतनी बडी मीट इंडस्‍ट्री चल रही हैं तो जानवर तो चाहिए ही तो इन तमाम चारागाहों में गाय, भैंस, भेंड, बकरियां, सुअर, बत्‍तखें, मुर्गे, टर्की और न जाने किन किन जानवरों को पालने के लिए कैटल फार्म बनाए जाते हैं। ताकि, मीट इंडस्‍ट्री को बिना किसी रूकावट के अपने बाजारों के लिए मीट, चिकन की आपूर्ति होती रहे।

 चीन, अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया के बराबर के भूभाग पर ग्रास लैंड बन चुके जो पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा

 

साल 1960 के बाद से नान-वेजीटेरियन की संख्‍या तेजी से बढी है। माना जाता है कि दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी मांस पर निर्भर है। हांलाकि, कोई निश्चित आंकडा नहीं मिलता है पर जितनी भी research हैं वो बताती हैं कि worldwide 22 फीसदी आबादी ही वेजीटेरियन और फ्लेक्‍सीटेरियन है। फ्लेक्‍सीटेरियन वे लोग होते हैं जो अंडा और मछली को वेजीटेरियन मानते हैं।तो सोचिेए नान वेज डाइट के लिए पहले जंगल काटो, फिर जानवरों को पालो, उनको खिलाओ-पिलाओ और फिर उनको अपने पेट का निवाला बना डालो कुछ ऐसा चक्र चल रहा है। ये तो रही जमीन की बात, अब करते हैं समुद्र में होने वाली तबाही की बात। ओवर फिशिंग की वजह से मैरीन लाइफ काफी हद तक बर्बाद हो चुका है। व्‍हेल, शार्क, ब्‍लूफिन और टूना जैसी बडी मछलियां बडे खतरे में हैं। ये बात जान लीजिए जिस तरह जंगल के इको सिस्‍टम को बनाए रखने के लिए टाइगर का होना जरूरी है उसी तरह समुइ्र के इको सिस्‍टम को बनाए रखने के लिए इन लुप्त हो रही इन मछलियों का बचना जरूरी है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में हम चीन, अमेरिका और आस्‍ट्रलिया के बराबर के भूभाग पर ग्रास लैंड बन चुके हैं। अगर ग्रास लैंड ना बनाने पड़े तो जंगल आबाद रहें , धरती इतनी गर्म ना हो, बारिशे समय पर हो और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और बेगुनाह जानवरों को भी जीने का अधिकार मिलेगा।

 

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