औवैसी और RSS में कोई फर्क नहीं दोनों एक ही काम कर रहे हैं।
हालांकि बहुत से स्टेट में इस समय चुनाव चल रहे हैं लेकिन बंगाल का चुनाव इस समय चर्चाओं का विषय है क्योंकि सीधा मुकाबला ममता वर्सेस मोदी का माना जा रहा है और जिस तरह से आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं और इन सबके बीच जो तमाम डेवलपमेंट हुई हैं उनके बारे में बातचीत करने के लिए हमारे साथ हैं तारिक अनवर जी- सीनियर लीडर है कांग्रेस के सांसद हैं।
Ques – तारिक जी जो खबर अभी बिलकुल हाल फिलहाल में आई है कि राहुल गांधी बंगाल जाना चाहते थे रैली करने के लिए। लेकिन कहा ये जा रहा है कि ममता बनर्जी के अधिकारियों ने उन्हें परमिशन नहीं दी। कितनी सच्चाई है इसमें?

Ans- मेरा ख्याल है कि उसमें ममता बनर्जी जी के ऑफिस से उनको परमिशन लेने की आवश्यकता नहीं है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता अपोजिशन लीडर होने के कहीं भी जा सकते हैं। मेरा ख्या है इससे सूचना में कोई दम नहीं है।
Ques- क्या कारण है कि बंगाल में जब से यह हुआ है कि कांग्रेस ममता के साथ नहीं लड़ेगी, अलायंस नहीं होगा। लगता है कि कांग्रेस ने बिल्कुल ही सरेंडर कर दिया है वहां पर। कोई भी सीनियर लीडर बंगाल में नजर नहीं आ रहा ?

Ans- ममता जी और कांग्रेस, हम इंडिया गठबंधन में हैं तो यह तो पहली बात है , दूसरा जैसा आपने शुरू कहा कि वहां जो लड़ाई है वो बीजेपी वर्सेस तृणमूल कांग्रेस है। तो हमारा कांग्रेस का जो प्रेजेंस है जहां जहां पर जिस पॉकेट में वहां हमारे उम्मीदवार लड़ रहे हैं चुनाव और पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। लेकिन
जहां हमारा पॉकेट नहीं है वहां पर हम अगर जाते हैं तो उसका फायदा बीजेपी को है। वोट का जितना डिस्ट्रीब्यूशन होगा , वह बंटेगा उसका फायदा बीजेपी को मिलेगा तो हम मेरा फर्स्ट एनमी जिसको हम कहते हैं राजनीतिक प्रतिद्वंदी वो बीजेपी है हमको बीजेपी को हर हालत में रोकना है।
Ques- तो आप ये मान रहे हैं कि वहां पर वोट कटेंगे इसलिए कांग्रेस वहां पर साइलेंट है। कांग्रेस एक्टिवली काम नहीं कर रही क्योंकि जहां जहां कांग्रेस जाएगी बीजेपी को फायदा होगा?

Ans- हम लोग ये मान के चलते हैं कि ममता जी हमारी पार्टनर है। हमारी है और इसलिए उनका जितना हमारे लिए कोई ये कह सकते है नुकसानदेह नहीं है। और लेकिन अगर भारतीय जनता पार्टी अगरजीतती है तो उससे पूरा जो हमारी विचारधारा है बीजेपी के साथ हमारी वैचारिक लड़ाई ममता जी का विचार विचारधारा और कांग्रेस का विचारधारा लगभग सेम है
Ques- देखा जा रहा है ममता जी का पब्लिसिटी स्टाइल है वह बदल गया है,महुआ मित्रा को पूरा साइड लाइन किया हुआ है और एक ब्राह्मण महिला विधायक , ममता के साथ हैं, और उन विधायक का जो स्टाइल है बिल्कुल डिफरेंट है कि वो साड़ी पहन रही है, तिलक लगा रही है, मंदिर में जा रही है। तो चर्चा यह भी चल रही है कि ममता दीदी ने कहीं ना कहीं क्या बीजेपी का स्टाइल अपनाया है वहां पर चुनाव प्रचार में?
Ans- ममता जी को हम आज से नहीं जानते हैं। पिछले 40 साल से जब वो राजनीति शुरुआत में युवा कांग्रेस में वो सक्रिय थी और हम ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट थे। तब से मैं उनको जानता हूं। वो हमारे साथ सांसद रही तो वो एक जुझारू महिला है और वो नाटक नहीं जानती है वो जमीन से जुड़ी हुई महिला है जमीन से जुड़ी हुई राजनेता है और बिल्कुल जिसको कहा गया कॉमन मैन से उनका संबंध है तो इसलिए उनके बारे में अगर इस तरह की कोई बात कही जाती है तो गलत है
Ques- राजनीति में चर्चा में है। जब से हुमायूं कबीर टीएमसी से अलग हुए हैं और ओवैसी साहब ने उनसे हाथ मिलाया है। कहीं ना कहीं बंगाल में क्या मुस्लिम वोटर्स ममता दीदी को छोड़ देंगे और इनके पास जाएंगे?

Ans- सवाल ही नहीं है। हुमायूं कबीर एक्सपोज हो गए कि उनको एक हजार करोड़ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ऑफर मिला। तो ये बात सरेआम हो चुकी है सार्वजनिक हो चुका है। तो मुसलमान किसी भी कीमत पर ऐसे किसी व्यक्ति को प्रमोट नहीं करना चाहेगा जो आगे चलके बीजेपी का साथ दे। मुस्लिम वोट बिल्कुल नहीं कटेंगे।
Ques – बंगाल में पिछले कुछ समय से हिंदुओं के ऊपर अत्याचार बढ़े हैं, उनके घर जलाए जो रहे हैं, हिंदू घर है वहां पर आगजनी हो रही है उन अत्याचार हो रहे हैं। कई तरह के मामले सामने आ रहे हैं। आपको लगता है कि बंगाली हिंदू जो है इस बार ममता का साथ छोड़ेंगे?

Ans- बिल्कुल नहीं। देखिए ऐसा है के जो लड़ाई हो रही है वो पार्टी लाइन पर हो रही है। वो हम तमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता हो सकते हैं। वो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हो सकते हैं और कोशिश भारतीय जनता पार्टी की लगातार रहती है। हर चुनाव में रहती है। वहां भी यही उनका प्रयास यही है कि उसको हिंदू मुस्लिम किया जाए। लेकिन बंगाल में ये दाल नहीं गलने वाली है।
Ques – जिस तरह से योगी आदित्यनाथ और हेमंता बिस्वा शर्मा की चुनाव प्रचार के लिए बहुत ज्यादा मांग है क्योंकि बहुत ज्यादा भीड़ उभर रही है क्या जो ये मांग है जो भीड़ उभर रही है जनता की इससे ममता को कोई खतरा नहीं?
Ans – ऐसा कुछ नहीं है कि सिर्फ उनहीं की मांग हो रही है तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की भी मांग हो रही है कांग्रेस के नेताओं की भी मांग हो रही है तो मांग तो चलती रहती है तो उसी हिसाब से और उसको अरेंज किया जाता है। जो उनके प्रभाव क्षेत्र है भारतीय जनता पार्टी के वो अपने नेता को वहां ले जाएगी जहां उनका प्रभाव है या जहां तृणमूल तृणमूल का प्रभाव है वहां तृणमूल के नेता जाएगा। तो इन सब से ममता बनर्जी को कोई खतरा नहीं है।
Ques – बंगाल में चुनाव में रिजल्ट आ जाएंगे कितने मार्क्स आप देंगे आपको क्या लगता है ममता दीदी क्योंकि एग्जिट पोल बोल रहे हैं कि ममता दीदी वहां पे विजय होंगी लेकिन राजनीति में कुछ नहीं कह सकते एग्जिट पोल बहुत दिन पहले हुए थे और अब का जो हालात है वह बदले हैं?
ANS- हमारी जो सूचना है हमारी जो वहां के कार्यकर्ताओं से बातचीत होती है या वहां के पत्रकार जो हमारे उनसे बात होती है। सबों का यह मानना है कि ममता बनर्जी एकदम कंफर्टेबल मेजरिटी से जीतेगी और वो फिर एक बार सरकार बनाएगी , तारिक अनवर जी का मानना है बहुत ही क्लियर है कि बंगाल में ममता बनर्जी की ही सरकार बनने वाली है। चाहे वहां योगी पहुंच जाए, चाहे वो हेमंता विश्व शर्मा पहुंच जाए और चाहे मोदी जी की भी अपनी बहुत पर्सनल वहां प रैलियां हो जाए। सरकार वहां पर वो ममता दीदी की ही बनने वाली है।
Ques – चलते चलते बिहार में आपके एक नेता ने खुलकर बोला था कि कांग्रेस में मुस्लिम नेताओं को इतना महत्व नहीं दिया जाता और आपके नाम भी उछला था। राशिद अलवी जी का भी नाम उछला था , क्या कहना चाहेंगे?

Ans – देखिए हम लोगों ने जो राजनीति किया है जो हमारा राजनीतिक है उसमें कभी हम लोगों ने कॉमनल लाइन पर राजनीति नहीं किया हम मुस्लिम नेता बनने की हमने कभी कोशिश की हम लोग सेुलर मिजाज के लोग हैं। हम एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आते हैं। तो जो हम लोग को ट्रेनिंग दी गई है उसमें कहीं भी किसी तरह की भी सांप्रदायिकता की गुंजाइश नहीं है। चाहे वो हिंदू संप्रदायता हो, मुस्लिम संप्रदायता हो। हम लोग इसीलिए ओवैसी के खिलाफ है क्योंकि ओवैसी जी भी मुस्लिम संप्रदायता को हवा देने की कोशिश करते हैं। वो मुसलमानों को एकजुट करने की बात कर रहे हैं। जिस तरह से आरएसएस हिंदुओं को एकजुट करने की बात तो हम समझते हैं कि ये दोनों ही देश के लिए समाज के लिए खतरनाक है। जहां तक कांग्रेस में माहौल बना है, प्रोमिनेंट लीडर्स है उनको कहीं ना कहीं अनदेखा किया जा रहा है। यह बिल्कुल गलत है।
