राधव चड्डा- स्वाती मालीवाल दोनों करेंगे केजरीवाल का भांड़ा फोड़

राघव चड्ढा को पार्टी ने उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी ने पूरी तरह से अलग कर दिया है और लगातार एक दूसरे पर मतलब राघव चड्ढा आक्रामक है आम आदमी पार्टी पर और उसका उल्टा आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा पर यहां तक कि राघव चड्ढा पर यह भी आरोप लगाया गया कि वो जो अभी आपके नेताओं पर छापेमारी हुई है उनके उसका उसकी सूचनाएं जो है वो राघव चड्ढा ने लीक की है बीजेपी और ईडी को तो ये एक बड़ा मामला है जो उन पर आरोप लगा है। लेकिन ये जो असली मामला है वो ये कि क्या राघव चड्ढा पंजाब चुनाव से पहले भाजपा की शरण में होंगे। भाजपा ज्वाइन कर लेंगे और अगर नहीं भी ज्वाइन करते हैं तो वह पंजाब में आम आदमी पार्टी का खेल बिगाड़ेंगे भाजपा के पक्ष में। इस तरह की संभावनाओं को इंकार नहीं किया जा सकता और इस तरह की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है और जिस तरह से राघव चड्डा बात कर रहे हैं जिस तरह से वो आम आदमी के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं, ये बहुत स्पष्ट लग रहा है कि वो आगे आने वाले चुनाव में निश्चित तौर पर आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले हैं। अब दो बहुत महत्वपूर्ण नेता दो राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल और राघव चड्ढा यह दो के दोनों नेता जो हैं वो आम आदमी पार्टी की कब्र खोदने पर लगे हुए हैं और जिस तरह से आम आदमी पार्टी उनके साथ व्यवहार कर रही है। उसके बाद ये स्पष्ट है कि अगले साल होने वाले पंजाब के चुनाव में इन्हीं इन दोनों नेताओं से स्वाति मालीवाल हरियाणा से बिलोंग करती हैं और जो राघव चड्ढा है वो पंजाबी हैं। पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। तो यह एक बड़ी विकट परिस्थिति है जिसको आम आदमी पार्टी फेस करने वाली है

 

आईपैक की विदाई क्या बढ़ाएगी ममता की परेशानी

आईपैक की पश्चिम बंगाल से विदाई ,अब आईपक वही कंपनी है जिसके ऑफिस में छापे पड़े थे उसके बाद से वहां पर विवाद शुरू हो गया था। विवाद इसलिए शुरू हो गया था कि आईपक छापे में मुख्यमंत्री पहुंच गई थी। मुख्यमंत्री के पहुंच जाने के कारण एक फाइल छीन करके भागने के बाद से और विवाद हो गया था और
ईडी का यह आरोप था कि जो है ईडी अब आरोप लगा रही थी कि वो वो कोल स्कैम की फाइल है और ममता बनर्जी का दूसरा वो था कि नहीं उसमें उनकी लिस्ट थी। अब वो पुरानी कहानी है। अभी मामला क्या है? अभी मामला ये है कि कहा ये जा रहा है कि उन उन्होंने टेक्निकल रीजन से अपना ऑफिस बंद किया है 11 मई तक।
लेकिन सूचनाएं जो आ रही है वो यह कि गिरफ्तारी हो गई है विनेश चंदेल की जो आईपक के कोफाउंडर हैं कोल स्कैम में तो अब वो वहां से अपना ऑपरेशन बंद कर रहे हैं। इस पर इस बात को ताकत और मिलती है जब तृणमूल कांग्रेस के लोगों का स्टेटमेंट आता है कि जो लोग भी अनइंप्लॉयड होंगे आईपैक के ऑफिस शिफ्ट होने के कारण उन सब लोगों को तृणमूल कांग्रेस कहीं ना कहीं अकोमोडेट करेगी। अब ये पूरा का पूरा जो मामला है जो साल्ट लेक वाले ऑफिस में जहां पर पहुंची थी ईडी और उसके बाद ममता बनर्जी पहुंची थी इस बात को लेकर के जो ईडी है वो सुप्रीम कोर्ट भी गई और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी को लताड़ भी
लगाई थी और बोला था कि यह मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए किसी भी व्यक्ति के लिए मतलब अनबिकमिंग ऑफ सिंग चीफ मिनिस्टर संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई थी। अब यह सारा का सारा मामला किसी न किसी तरह से चुनाव से जोड़ने की कोशिश की गई। आई पैक जो है वह चुनाव प्रबंधन का काम करता है। उसका हर राजनीतिक दल से जुड़ाव रहा है। कांग्रेस से भी समाज उसके बाद तृणमूल कांग्रेस से भी भारतीय जनता पार्टी से तो उन्होंने शुरुआत ही की थी। लेकिन ममता बनर्जी के साथ जो उनका जुड़ाव है और जिसको लेकर के उनको टारगेट किया जा रहा था उसमें कोल स्कैम का मामला था। और ईडी का आरोप लगाया कि जो कोल स्कैम से जुड़ी हुई वो थी वो लेकर के ममता बनर्जी चली गई थी और किसी भी मुख्यमंत्री को किसी प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के साथ उसके मदद के लिए क्यों आना है लेकिन ममता बनर्जी ऐसा करती रही हैं। ममता बनर्जी शेख शाहजहां के लिए लड़ी हैं। ममता बनर्जी राजीव कुमार जो जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप था जिनसे सीबीआई पूछताछ करना चाह रही थी उसके लिए धरने पर बैठ गई थी तो ये ममता बनर्जी करती रही हैं।

 

West Bengal में भी हीरो हैं योगी आदित्यनाथ

पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे ज्यादा चुनाव प्रचार के लिए डिमांड में है। एक वीडियो सर्कुलेट हुआ था। सोशल मीडिया पर, जहां पर नेता प्रतिपक्ष पश्चिम बंगाल असेंबली में नेता प्रतिपक्ष जो हैं वो योगी आदित्यनाथ के सामने दंडवत मतलब पूरी तरह से लेट करके उन्होंने उनको प्रणाम किया था और उसके बाद योगी आदित्यनाथ ने उठ के उन्होंने उन्हें उठाया था और उनका अभिवादन किया था। लेकिन जिस तरह से हिंदुत्व की राजनीति पश्चिम बंगाल में धीरे-धीरे घुसना शुरू हुई है और इस बार के चुनाव में वो काफी प्रभावी तरह से काम कर रही है। उन सबके मद्देनजर इसलिए कि शुभेंदु अधिकारी हिंदुत्व की राजनीति की बात कर रहे हैं। जय श्री राम के नारे के साथ वो अपना चुनाव प्रचार करते हैं। जय श्री राम के का नारा वो हर जगह लगाते रहते हैं और वो हिंदुत्व की बात करते हैं। खुल के हिंदुत्व की बात करते हैं। उस दृष्टि से योगी आदित्यनाथ का इस चुनाव में जिस तरह से उनको रैलीज़ में जिस तरह से उनको सभाओं में बुलाया जा रहा
है और वह पहुंच भी रहे हैं। उनके कार्यक्रम लग रहे हैं। वह बड़ा महत्वपूर्ण है और वह प्रभावी भी नजर आ रहा है। और वह योगी आदित्यनाथ सीधे तौर पर हिंदुत्व की बात करते हुए रह रहे हैं। वो घुसपैठियों की बात कर रहे हैं। वो जो अपीज़मेंट की पॉलिटिक्स है वो बाबरी के खिलाफ बोल रहे हैं। वो इस तरह की बात बहुत खुले तौर पर कर रहे हैं और इसका प्रभाव मतदाताओं पर दिख रहा है। बहुत स्पष्ट तौर पर दिख रहा है। योगी आदित्यनाथ का पिछल कुछ चुनावों के सेह जो उत्तर प्रदेश के बाहर के प्रदेशों में जिस तरह से मांग बढ़ी है, उसने उन्हें एक पैन इंडिया नेता के रूप में स्थापित किया है और अपने प्रदेश में जिस तरह से प्रशास चलते हैं बहुत सारे जगहों पर दिल्ली जैसे प्रदेश में बोला जाता है कि योगी चाहिए। पश्चिम बंगाल में बोला जाता है नहीं हमको योगी चाहिए। तो योगी ने अपनी एक अलग छवि बनाई है और इसीलिए उनकी डिमांड बहुत ज्यादा है।

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