पांच राज्यों में इलेक्शन हुए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा है पश्चिम बंगाल को लेकर। बीजेपी ने प्रचंड जीत यहां पे हासिल की है और जिस तरह से परिणाम आए हैं जो एग्जिट पोल थे वही सही हो गए। पश्चिम बंगाल में इस बार बीजेपी जीतने वाली है , चर्चाएं चल रही थी और अब जीत के बाद इसके पीछे कई कारण दिए जा रहे हैं और सबसे ज्यादा श्रेय दिया जा रहा है मोदी जी को , योगी जी को हिमंत बिस्व सरमा को , जो बड़े-बड़े स्टार प्रचारक बंगाल पहुंचे जिन्होंने वहां का माहौल बदल दिया लेकिन कहते हैं ना कि सामने रहकर कर जो काम करते हैं , वो ही चमकते हैं, अगर 10 लोग सामने रहकर काम करते हैं तो उसके पीछे 100 चेहरे ऐसे छुपे होते हैं जो पीछे रह के छोटे-छोटे ग्रुप में काम करते हैं और चुनाव प्रचार करते हैं और पश्चिम बंगाल में यही हुआ।
मोदी -योगी की थी बहुत डिमांड
इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी जी की वहां बहुत डिमांड थी। योगी जी वहां गए और भीड़ बहुत इकट्ठी हो गई। हिमंत विश्व सरमा के कारण, कोई कह रहा है योगी ने बहुत वहां पे जादू किया खेला हो गया। मोदी के कारण हो गया।जीत के पीछे बड़े-बड़े नेताओं के नाम लिए जा रहे हैं ,लेकिन जीत की असली वजह जो असली स्टार्स थे उनका नाम अभी सामने नहीं आ रहा है। लेकिन उन्होंने पीछे रहकर जिस तरह से बंगाल में वोटर्स को इक्ठा करने का काम किया उसी कारण बीजेपी को इनता बड़ा बहुमत मिल पाया है। पिछले चुनाव में भी 2021 मेंजो चुनाव हुए थे उसमें सभी नेता उतरे थे पर उनका जादू नहीं चला तो इस बार कुछ तो अलग हटकर हुआ है जो जानना जरूरी है।
अलग अलग समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए बुलाए गए राज्यों के कईं नामी नेता
सबसे पहले हम बात करते हैं कि साउथ के बहुत फेमस बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की , जो पश्चिम बंगाल पहुंचते हैं और वहां जाकर वो कैंपेनिंग करते है,टीएमसी नेता कह रहे थे कि इनको क्यों उठाकर लिया? लेकिन किस तरह के क्या स्ट्रेटजी के तहत काम किया है कि वहां पर पश्चिम बंगाल में जो थोड़ा बहुत सेक्टर जहां पे साउथ के लोग रहते हैं उनको एड्रेस करने के लिए तेजस्वी सूर्या को वहां पर बकायदा भेजा गया और यही नहीं वहां जाकर तेजस्वी सर्या ने बकायदा योगी आदित्यनाथ का एक छोटा सा इंटरव्यू ले लिया और उनसे टिप्स लिए तो अपने आप में वो प्रचार हुआ चाहे छोटे से पॉकेट में प्रचार हुआ , इसके बाद अगर हम बात करें कि मनोज तिवारी को वहां चुनाव के लिए उतार दिया गया प्रचार के लिए अब मनोज तिवारी भोजपुरी सिंगर हैं। पश्चिम बंगाल में भोजपुरी लोग रहते हैं उनको मोदी पक्ष में करने के लिए मनोज तिवारी को उतारा गया, फिर सम्राट चौधरी को उतारा गया पश्चिम बंगाल में रह रहे बिहारियों में अपने पक्ष में करने के लिए क्योंकि बिहार में सम्राट चौधरी का नाम बड़े नेता के रूप में सामने आया था और उनकी अपराधी विरोधी छवि को पशिचम बंगाल में रह रहे बिहारियों के बीच भुनाया गया।फिर वहां पंजाब के कुछ लीडर्स गए और सिख समुदाय से बात की , तो इन नेताओं ने छोटे छोटे इलाकों में रहने वाले अपने समुदाय के लोगों को मोदी पक्ष में करने में पूरी मदद की और सफलता भी मिली। हेमा मालिनी, कंगना रनाउत लिएडेंर पेस जैसे नामी लोगों को यहां उतारा गया और ये स्ट्रेटजी बहुत हद तक कामयाब भी हुई, सामने था मोदी – योगी का फेस और पीछे काम कर रहे थे ये तमाम नेता । जो रणनीति बीजेपी ने बनाई बहुत ही सोच समझकर एक रणनीति के तहत इस बार वो उतरे थे पश्चिम बंगाल में और उनकी यह रणनीति काम आई।
WEST BENGAL से बाहर रह रहे बंगालियों ने भी इस बार ममता से खिलाफत की और वोट दिया

दूसरा बड़ा फैक्टर अगर हम बात करें कि हजारों लाखों की संख्या में जो माइग्रेंट है बंगाल से जो निकले हुए हैं। अब जाहिर सी बात है बंगाल से क्यों निकले? क्योंकि वहां उनको नौकरी नहीं मिली है। अच्छा जीवन नहीं था। नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। सेटल हो गए हैं। लेकिन कहीं ना कहीं पेरेंट्स वहां पे हैं। भाई बहन वहां पे हैं। लिंक है पश्चिम बंगाल से। तो हजारों की तादाद में जो ये लोग वापस गए कहा यही गया कि sir के डर से वोट डाला कि कहीं नाम ना कट जाए , लेकिन इसके पीछे एक बड़ा फैक्टर दूसरा था जिस पर कम लोगों का ध्यान गया। चर्चा की कि अलग-अलग राज्यों में रहकर रह रहे बंगाली लोग चर्चाएं तो बहुत करते थे हिंदू बंगाली की। बंगाल में जो कुछ हो रहा है वो अच्छा नहीं हो रहा है। लेकिन इसके खिलाफ ममता के खिलाफ उन्होंने वोट करने के लिए कभी अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं किया और अंदर ही अंदर बात करते थे। बोलते रहते थे आपस में कि बंगाल में चेंज होना चाहिए। ममता बनर्जी को जाना चाहिए। हिंदू वोटर्स का बुरा हाल है। हिंदू बंगालियों का बुरा हाल है। लेकिन कुछ कारण नहीं। इस बार वो सारे वोटर्स तमाम राज्यों से उठकर बंगाल पहुंचे। अपने मतों का अधिकार का प्रयोग किया और ममता बनर्जी की जड़े उखाड़ फेंकी।
तुष्टिकरण की राजनीति नहीं चलेगी BJP समझ गई पर ममता नहीं समझी

एक और बात जिसने बंगाल में बाजी पलटी वो है ममता बनर्जी की अपीज़मेंट की राजनीती ममता बनर्जी जिसको लेकर चल रही थी शुरू से ले हुई थी कि अपीज़मेंट करनी है। एक विशेष समुदाय का बढ़-चढा समर्थन कर रही थी।बाद में उनका थोड़ा डायवर्जन हुआ। वो हिंदू हिंदू वोटर्स को भी उन्होंने अपनी तरफ लुभाने की कोशिश की। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। और इस बीच बीजेपी को समझ में आ गया था कि अपीसमेंट की जो पॉलिटिक्स है उसको जनता ना उसको बर्दाश्त नहीं करती है। जनता को वो पसंद नहीं आती। डिवीजन जो करता है ना कोई उसको ज्यादा जनता बर्दाश्त नहीं करती है।इसको बीजेपी ने लपक लिया और इस बार अगर आप देखें तो हिंदुत्व के मुद्दे पर कम बात हुई। डाउन प्ले किया है बीजेपी ने विकास के नाम पर, करप्शन के नाम पर, महिलाएं की सुरक्षा के नाम पर बीजेपी के जितने भी तमाम नेता थे उन्होंने बढ़-चढ़कर प्रचार किया। इवन योगी आदित्यनाथ तक ने हिंदुत्व के मुद्दे को हेमंत विश्वकर्मा ने हिंदुत्व के मुद्दे को ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया बंगाल में। अपने चुनाव प्रचार में अपीसमेंट की पॉलिटिक्स से दूर रही बीजेपी पर दूसरी तरफ ममता बनर्जी और उसके तमाम नेताओं ने जमकर अपीसमेंट की पॉलिटिक्स की खुलकर हिंदू बंगालियों के खिलाफ बोला कि अगर टीएमसी आती है तो आपको देख लेंगे डराया जा रहा था वोटर्स को और सब डरे हुए थे कि अगर दोबारा ममता आ गई तो हमारा क्या होगा? तो अपीज़मेंट की पॉलिटिक्स ममता ने की और बीजेपी इससे दूर रही, इसका पूरी फायदा बीजेपी को हुआ ।
दीदी को उखाड़ फेंकना मुश्किल था क्योंकि वो एक फाइटर है और सालों साल बीजेपी के खिलाफ खड़ी रही, पर उनकी और पार्टी के कुछ गलतियों ने ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।
