MAMTA की हार अखिलेश की नींदे क्यों गायब होंगी

पश्चिम बंगाल में ममता का किला ढहने से जितनी दुखी और परेशान ममता दीदी हैं, उनसे भी ज्यादा दुखी समाजवादी के मुखिया अखिलेश यादव होंगे, समझने वाली बात यही है कि अखिलेश बंगाल चुनाव परिणाम से इतने क्यों बौखला गए हैं, दरअसल जिस तरह से अखिलेश यादव ने बंगाल जाकर ममता के लिए तारीफों के कसीदे पढ़े थे और खुलकर उनकी मस्लिम appeasement की वकालत की थी, अखिलेश मान कर बैठ गए थे कि तुष्टिकरण की यह राजनीती बंगाल में ममता को जीताएगी और फिर यूपी में उन्हें भी जीतने का रास्ता दिखा सकती है, पर पूरा गेम उल्टा पड़ गया, जबरदस्त खेला हुआ, अखिलेश की fighter दीदी तो चुनाव नहीं जीत सकी पर इस चक्कर में अखिलेश ने बंगाल जाकर खुलकर एक विशेष समुदाय की वकालत करके यूपी में अपने खिलाफ तमाम जातियों में बंटे हिंदू वोटर्स को ना केवल नाराज कर लिया बल्कि उससे भी उनको एकजु़ट होने का रास्ता भी दिखा दिया। इन सब के बीच बडी बात यही देखी गई कि appeasement की राजनीती जनता को नहीं भांति यह बात शायद बीजेपी को समझ आ गई और उन्होंने इस बार बंगाल में हिंदूत्व के मुद्दे को थोड़ा down play ही किया, और यह राणनीती सफल रही पर ममता के साथ अखिलेश को यह बात समझ नहीं आ पाई अब देखना यही है कि जिस तरह से बंगाल की जनता ने appeasement को पूरी तरह से नाकार दिया क्या अगले साल यूपी में होने वाले चुनावों में अखिलेश की appeasement की politics भी उनका खेला कर देगी।
इस गांव में लड़कियों को नहीं देख सकते गंदी नजरों से भी
यमुनागर में पश्चिमी यमुना नहर के किनारे बसे गांव कांजनू की। कहने को तो यह गांव है पर अगर यहां चले जाओं तो लगता है कि किसी पाँश , आधुनिक शहर के दर्शन कर रहे हैं और ये सब संभव हो पाया है यहां की सरपंच बहू रिंपी कांबोज की मेहनत और कोशिशों से। खुद वो स्नातक हैं और चाह रही हैं कि गांव का हर व्यकित शिक्षित बने खासतौर पर महिलाएं, रिंपी ने नवंबर 2022 में यह पदभार संभाला और उसके बाद से ही गांव तरक्की की ओर बढ़ने लगा, हरियाणा लड़कियों की कम जन्म दर के लिए मशहूर है पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस गांव में लड़कियों की जन्म दर लड़कों से काफी अधिक है। यहां 1000 लड़कों पर 1400 लड़कियां है। इसके पीछे बेटियों को सम्मान देने के लिए शुरू की गई कईं योजनाएं हैं, सरपंच प्रत्येक बेटी के जन्म पर 5100 रुपये का शगुन देती हैं। उसके बाद उनकी सुरक्षा , पढाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दिया जाता है, यहां की साक्षरता दर करीब 92% है।सुबह-शाम सैर और खेलने के लिए करीब दो एकड़ में बलिदानी ऊधम सिंह पार्क बना दिया गया है।बेटियों को खेल में करियर बनाने के लिए बाकायदा यहां एक 25 लड़कियों की हाकी टीम बनी हुई है जिसकी महिला कोच लडकियों को खेल नर्सरी में नियमित अभ्यास करवाती हैं। और सबसे अहम किसी भी प्रकार के झगड़े मिल बैठकर निपटा लिए जाते हैं मकसद गांववालों के साथ गांव की लाडली बेटियों को कभी असुरक्षित -अकेला महससू ना करें।
