इतनी जबरदस्त Voting क्या हो गया खेला
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव , बहुत से रिकार्ड़ टूट रहे हैं, और लग रहा है कि क्या ये बदलाव की आंधी है, सबसे पहले तो पहले चरण की वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं और 91 फीसदी से भी ज्यादा वोटिंग हुई है, अब इतनी जबरदस्त वोटिंग का मतलब तो यही निकाला जाता है कि राज्य की जनता सरकार से इतनी परेशान हो चुकी है कि उसे उखाड़ फैंकने के लिए घरों से निकल गई, अब कहा ये भी जा रहा है कि ममता को जीताने पशिचम बंगाल के तमाम लोग चाहे जिस भी धर्म, समुदाय के हों, एकजुट हुए हैं, खैर 4 मई को पता चल ही जाएगा, अब जैसा कि हमने पहले कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव कुछ अलग हट कर ही हैं, पहली बार राज्य में योगी मोदी ने इतनी रैलियां की और योगी की रैलियों में जो जन सैलाब उमड़ा वो कहीं ना कहीं संकेत दे रहा है कि कुछ बड़ा खेला हो सकता है, फिर इस बार ममता को टक्कर देने उनके अपने नेता हुमायूं कबीर ने औवेसी से हाथ मिलाया है और इन दोनों का गठबंधन चाहे कुछ ज्यादा ना करे पर ममता के वोट जरूर काटेगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने वाला है। पर दूसरी तरफ ममता का कहना है कि एसआईआर का राजनीतिक असर बंगाल चुनावों में दिखा है, लोगों ने अपने अधिकारों के लिए वोट किया है।दूसरी तरफ मोदी जी का कहना था कि जब भी वोटरों की भारी भागीदारी हुई है, बीजेपी ही जीती है। इस बार भी BJP ही जीतेगी।
CONGRESS फिर एक बगावत
कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी यही बनती जा रही है कि उसके अपने नेता ही या तो पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं या फिर खुलेआम बगावत करके कांग्रेस आलाकमान की नींदे हराम कर रहे हैं, अब हरियाणा की बात करें तो सभी को पता है कि कांग्रेस को यहां मिली जबरदस्त हार के पीछे हुड्डा और कुमारी शैलजा के बीच चली जबरदस्त गुटबाजी रही और कईं जगह इसके कारण बगावत हुई और कांग्रेस को चुनाव में मुंह की खानी पड़ी और अब एक बार फिर कांग्रेस में बगावत और फूट सामने आई है, जी हां पता चला है कि सोनपत मेयर चुनाव होंने से पहले ही कांग्रेस में फूट पड़ गई, कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी कमल दिवान ने ही चुनाव ना लड़ने की घोषणा करके कांग्रेस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया , कमल दिवान का आरोप है कि दागियों और बागियों को टिकट दिया जा रहा है और इसी कारण वो चुनाव मैदान से हट रहे हैं। आपको बता दें कि कांग्रेस का दूसरा गुट छह ऐसे पार्षद प्रत्याशियों को टिकट दिलाने की वकालत कर रहा है जिन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस की खिलाफत की और हराया, अब मेयर प्रत्याशी कमल दिवान उन्हें टिकट न देने की जिद पर अड़े गए हैं और हाल ये है कि वो इतने नाराज हैं कि दीपेंद्र हुड्डा तक का फोन नहीं उठा रहे हैं। हरियाणा के चुनाव प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी कमल दीवान को मनाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं क्योंकि वो उनके फोन का भी जवाब नहीं दे रहे।
