PRIYANKA -RAHUL GANDHI के बीच की टसल है क्या जो नहीं बने केरल का CM

केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए पेंच फंसा हुआ है और जो तीन बड़े नाम चल रहे हैं केसी केसी वेणुगोपाल वि डी सतीशन और रमेश चथ्ला इन तीनों नामों को लेकर के लेकिन अब इसमें कुल मिलाकर के जो रमेश चरितथल्ला हैं वो लगभग दौड़ से बाहर हैं और केसी वेणुगोपाल और वि डी सतीशन के नाम पर ही बात चल रही है और अभी इसी पर कोई फैसला होगा। वि डी सतीशन नेता प्रतिपक्ष हैं केरल में और उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था और वो अपनी दावेदारी इसी नाते कह रहे हैं और यह कह रहे हैं कि वो लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया में लगे हुए थे और ऐसा अलग और उन्हीं के प्रयासों से वहां पर यूडीएफ को बड़ी सफलता मिली है। लेकिन केसी वेणुगोपाल जो संगठन महामंत्री हैं कांग्रेस के वह गांधी परिवार के नजदीकी बताए जा रहे हैं। हैं गांधी परिवार के नजदीकी और ज्यादातर संगठन से संबंधित सारे निर्णय वही लेते हैं और इसी कारण उनकी दावेदारी भी उतनी ही मजबूत है। अब क्या वो इस मामले में कुछ कर पाते हैं? उनको चुना जाता है। लेकिन इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी चाहते हैं कि वह जिम्मेदारी मिले। उसके कई कारण है। एक तो यह कि वो उनको केंद्र से प्रदेश में भेजना चाहते हैं। केंद्र में उनको लेकर के बहुत सारे विवाद खड़े हुए हैं। दूसरा ये कि वो उनके फेवरेट भी किसी जमाने में रहे हैं। दूसरी तरफ प्रियंका गांधी हैं वो वि डी सतीशन को चाहती हैं। क्योंकि वि डी सतीशन ने लोकसभा चुनाव वाईनाड से लड़ रही थी तो उनकी जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन अब इसमें जो जिस तरह से बातें निकल कर के आ रही हैं कि लगभग 50 के आसपास एमएलए जो ऑब्जर्वर गए थे मुकुल वासनिक और अजय माकन के नेतृत्व में उनका कहना है कि 63 में से 50 लोग वेणुगोपालन के समर्थन में खड़े हैं। लेकिन उसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि जो 22 के आसपास एमएलए हैं मुस्लिम लीग के वो चाहते हैं कि सतीश मुख्यमंत्री बने। तो ये एक बड़ी विषम सी परिस्थिति है कांग्रेस को जिसको निपटाना है। पांच प्रदेशों में चुनाव हुए थे। सब जगह शपथ ग्रहण आसाम के बाद पूरा हो गया। लेकिन कांग्रेस अंदरूनी विवाद के चलते केरल में अभी तक कोई निर्णय नहीं कर पाई।

BJP वोट प्रतिशत 12 से 7 पहुंचा ——आई अन्नामलाई की याद एक बार फिर

तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर के अन्ना मलाई को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है। जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी का इस विधानसभा के चुनाव में हाल हुआ है और उनका लगभग 12% वोट घट करके 7% के आसपास आ गया है। उन परिस्थिति में जिस तरह की राजनीति अन्नामलाई तमिलनाडु में कर रहे थे वही भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के लिए विशेष रूप से तमिलनाडु में सूट करता है और उसी दिशा में काम करना होगा और ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर उसी तरह की राजनीति या उसी तरह का निर्णय करते हुए नजर आ सकते हैं। ऐसा लगता है। अबकि उनको इस बार के चुनाव में सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई है। बहुत शोरशराबे के साथ उन्होंने आईडीएमके के साथ अलायंस किया था और ऐसा लग रहा था कि वो सरकार बनाने के करीब है। लेकिन जो उनका अलायंस है वो तीसरे नंबर पर पहुंचा है और अब तो एआई एडीएमके में भी फूट पड़ गई है। उस परिस्थिति में भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व यह इस पर विचार कर रहा है कि किसी तरह से वो अन्नामलाई को पार्टी की जिम्मेदारी दे या उनको अगर सीधे तौर पर अध्यक्ष नहीं बनाता है प्रदेश अध्यक्ष तो संगठन में केंद्र में संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी दे के उनको वहां पर काम करने के लिए छोड़े काम करने का मतलब इजाजत दे या जिम्मेदारी दे संगठन में केंद्रीय संगठन में उनको सचिव बनाया जा सकता है। बहुत वो हुआ तो उनको महासचिव भी बनाया जा सकता है। तो या उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इसलिए उनको जनरल सेक्रेटरी भी बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। और अगर वह जनरल सेक्रेटरी बनते हैं, तो उससे कई प्रदेशों को फ़ायदा होगा। वह कर्नाटक में अपना प्रभाव छोड़ेंगे, वो केरल में अपना प्रभाव छोड़ेंगे, वो तमिलनाडु में अपना प्रभाव छोड़ेंगे, वो आंध्रा में अपना प्रभाव छोड़ेंगे, वो तेलंगाना में अपना प्रभाव छोड़ेंगे। तो इसलिए उनको इस तरह की जिम्मेदारी दी जा सकती है और ऐसी संभावनाएं जताई जा रही हैं कि उनको यह जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी जल्द ही संगठन के विस्तार होने हैं तो संगठन के विस्तार में ही उनको कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है। इस तरह की बातें निकल कर के आ रही हैं।

 

TMC की वफादार जो लगाई IPS ने अपनी नौकरी दांव पर

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बना ली है। सरकार का शपथ ग्रहण हो गया। लेकिन इस बीच बहुत सारे रिसफल भी हुए। मनोज अग्रवाल को चीफ सेक्रेटरी बना दिया गया और ये बहुत सारी चीजें हुई। लेकिन इसी बीच ब्यूरोक्रेसी को लेकर के एक विवाद भी खड़ा हो गया। पापिया सुल्तान करके एक आईपीएस अफसर हैं। और वह आईपीएस अफसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है जिसमें प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में वो आगे की पंक्ति में बैठी हुई हैं और भारतीय जनता पार्टी के बहुत सारे एमएलए जो हैं वह खड़े हैं और जगह की तलाश कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह गवारा नहीं समझा कि शपथ ग्रहण में जो नेता आए हुए हैं उनके लिए सीट छोड़ी जाए या अगर ना भी छोड़ी जाए तो कम से कम जगह बनाई जाए और ये वीडियो है जिसमें जिसमें जो एमएलए हैं वो उनकी पत्नी जो है जर्नलिस्ट थी रश्मिदास गुप्ता स्वप्न दास गुप्ता की जो वहां से चुनाव जीत करके आए हैं। उन उन्होंने भी वीडियो शेयर किया है जिसमें वो यह बताने की कोशिश कर रही हैं और दिखा रही हैं कि किस तरह से डेफिएंट डिफाइन हो करके ये जो आईपीएस अधिकारी हैं ये पापियां ये बैठी हुई हैं। हिल रही है। जब उनसे इन लोगों ने बोला भी तो लगभग इन्होंने अनसुनी कर दी। अब ये अधिकारी का पहले भी विवादों से नाता रहा है। संदेश खाली में जो महिलाओं के साथ यौन शोषण का मामला आया था। उसके जांच की जिम्मेदारी तब की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इनको सौंपी थी। तो इन्होंने जाकर के जो विक्टिम्स थे उनसे इस बात का प्रमाण मांगा था कि आपके पास कहां कौन सा प्रमाण है? वीडियो को दिखाइए ये बताइए कि आपके साथ बलात्कार हुआ है। इसको लेकर के बहुत सारा विवाद खड़ा हुआ था। और अब यह नया एक विवाद खड़ा हो गया। लेकिन इससे और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जो आईपीएस अधिकारी हैं इस तरह का भी आरोप लग रहा है कि जब प्रधानमंत्री स्टेज पर पहुंचे शपथ ग्रहण से पहले तो सब
लोग जो एक प्रोटोकॉल होता है कि प्रधानमंत्री आने पर सारे लोग खड़े होते हैं। तो सारे लोग खड़े हो गए। लेकिन ये आईपीएस अधिकारी अपनी सीट पर ही बैठी रही प्रधानमंत्री के आने के बावजूद। तो ये इस तरह की है और सबको मालूम है कि किस तरह से किस तरह से इनके ममता बनर्जी के साथ संबंध थे। लेकिन जो ऑल इंडिया सर्विज के अधिकारी होते हैं उनका किसी नेता से संबंध नहीं होता है। उनका संविधान से संबंध होता है और ऐसा लग रहा है कि इन्होंने संविधान को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है और वह संविधान को से ज्यादा टीएमसी के संविधान को या टीएमसी के नेताओं को मानते हैं।

PM की अपील पहले से ही बचाव की रणनीती

 

प्रधानमंत्री ने जिस तरह से अपील की है कि अब लोगों को थोड़ा ऑस्टेरिटी मेजर अपनाने चाहिए। वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए। ऑयल कंसमशन कम करना चाहिए। गैस कंसमशन कम करना चाहिए। इवन एडिबिल ऑयल कंसमशन कम करना चाहिए। सोना खरीदने से बचना चाहिए। कुल मिलाकर के यह उन्होंने वो किया। तो क्या सचमुच भारत में कोई इस तरह की क्राइसिस वाली सिचुएशन आ गई है जहां पर भारत को इस तरह के मेजर्स की जरूरत है? लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा है। इसलिए कि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जो जॉइंट सेक्रेटरी हैं सुजाता शर्मा उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी हमारे पास 60 दिन का बफर स्टॉक मौजूद है। और ये 75 दिन वार के पूरा हो जाने के बाद भी हम 60 दिन का बफर स्टॉक बना करके चल रहे हैं। इसका मतलब यह कि सप्लाई जो है वह लगातार बरकरार है और उसके तहत ही काम हो रहा है। अब फिर ये इस तरह की बात क्यों? इस तरह की बात जो लगता है वह इसलिए कि कोई क्राइसिस ना हो उस सब से निपटने के लिए और जो सबसे महत्वपूर्ण बात है कि  इस तरह की क्राइसिस सिचुएशन में तेल के दाम बढ़े हैं और उसमें भारत को अब बहुत सारा फॉरेन रिजर्व खर्च करना पड़ रहा है। तो उससे अर्थव्यवस्था से बचाने के लिए आप अगर इस तरह की ऑस्टेरिटी मेजर करेंगे तो खर्च में कटौती आएगी। अब ये खर्च में कटौती आएगी। वो महत्वपूर्ण है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने अब तक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दाम नहीं बढ़ाए हैं। जबकि अमेरिका समेत जो दूसरे देशों को ऑयल सप्लाई करने की बात करता है। वहां भी लगभग 45% तक ऑयल प्राइसेस बढ़े हैं। चीन में 30% 25 से 30% अफ्रीका में 50 से 60% बढ़े हैं। यूरोप में 25% के आसपास बढ़े हैं। लेकिन भारत ने अभी अपने पेट्रोलिय प्रोडक्ट्स के दाम नहीं बढ़ाए हैं। तो उस दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है कि अगर अह भारत का खर्च जो है जो मतलब जो फॉरेन रिजर्व है अगर उसको भारत बहुत ऑस्टेरिटी के साथ खर्च करता है तो इकॉनमी मजबूत रहेगी। इसमें चिंता जैसी कोई बात निकल कर के नहीं आती है।

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