by RUBY KUMARI
पर्यावरण का संतुलन बनाने में निभाता अहम रोल—मच्छर नहीं तो खाने के अभाव में मर जाएंगे बहुत सारे पक्षी
तमाम बीमारियों को फैलाने में मच्छर का बड़ा रोल है, यह काटता भी है, नींद डिस्टर्ब करता है , गंदगी फैलाने में भी इसका रोल रहता है पर बावजूद इसके अगर मच्छर इतने खतरनाक हैं तो कुदरत ने मच्छर जैसा हानिकारक जीव को क्यों बनाया है, इस सिशूवाल का जवाब है कि ये खतरनाक मच्छर पर्यवरण संतुलन बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाते हैं जितने की अल्य पशु-पक्षी , अब सुनने में अजीब ही लगता है कि भला मच्छर का पर्यावरण से क्या लेना , तो आज इसी पर बात करते हैं, कम ही लोग से जानते होंगे कि मनुष्य का दुश्मन नंबर वन मच्छरों की तमाम प्रजातियां , प्राकृतिक रूप से बनी भोजन द्याृंखला का एक हिस्सा है , यह मछलियों, कछुओं जैसे जलीय जीवों के साथ ड्रेगनफ्लाई, चमगादड़ों तरह तरह के कीटभक्षी पक्षियों का भी प्रिय भोजन है। घर में रहने वाली मकड़ियां तथा छिपकलियां भी घर के अन्दर रह कर इन मच्छरों का शिकार कर हमें इनके प्रकोप से बचाने का काम करती हैं, पानी में गेम्बूसिया नाम की मछलियां विशेष रूप से छोड़ी जाती हैं। ये मच्छरों के लार्वा को खाकर उनको पनपने नहीं देती। अब ज़ाहिर है सी बात है कि यदि मच्छर नहीं होंगे तो भोजन द्याृंखला को बनाने वाले इन शिकारियों पक्षियों को खाना नहीं मिलेगा और इन जीवों पर अस्तित्व खतरे में पड़ेगा जो सीधे तौर पर पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि यदि किसी जगह से मच्छरों का सफाया हो जाए, तो उस क्षेत्र में खाने के अभाव में पक्षियों की संख्या आधे से भी अधिक घट सकती है यही नहीं कुछ रिसर्च बताती हैं कि मच्छरों के ना होंने से विश्व भर में कई मछली प्रजातियों का भी यही हाल होगा, और उन्हें जीवित रहने के लिए अपना आहार ही बदलना होगा।
मचछर का परागण में भी अहम रोल — कईं तरह के फूलों का खिलना हो सकता है बंद
यही नहीं मच्छर पर्यावरण रक्षा में एक और बडी भूमिका अदा करते हैं , इनका परागण में महत्व होता है, जी हां मच्छर कई फसलों और जंगली फूलों का परागण भी करता है। परागण नहीं होगा तो फल नहीं बनेंगे। कईं तरह के फूलों का खिलना बंद हो जाएगा। आपको बता दें कि दुनिया के सुंदर फूलों में से एक ऑर्किड की कुछ प्रजातियां तो अपने परागण के लिए मच्छरों पर ही निर्भर करती हैं।
कुछ लोगों को खासकर -गर्भवती महिलाओं को क्यों काटते हैं ज्यादा मच्छर
मच्छरों के आकर्षित होने का एक अन्य कारण गंध भी है। वैज्ञानिक कहते हैं कि कुछ गंध ऐसी होती है जिसके प्रति आकर्षित होने से मच्छर खुद को रोक नहीं पाते। व्यायाम और टहलते समय लोग ज्यादा मात्रा में लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड या अमोनिया का उत्पादन करते हैं ऐसे में शरीर से निकलने वाली गंध मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करती है । एक रिसर्च में ये कहा गया है कि एल्कोहल भी मच्छरों को आकर्षित करता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति बीयर पीता है तो उसके पसीने में इथेलॉन की मात्रा बढ़ जाती है और ये मच्छरों को आकर्षित करती है। हमारी त्वचा पर पाये जाने वाले बैक्टीरिया शरीर से आने वाली गंध को काफी हद तक निर्धारित करते हैं। शोध बताते हैं कि मच्छरों की अलग-अलग प्रजाति शरीर के अलग अलग हिस्सों की ओर आकर्षित होती है। कुछ मच्छर कार्बन डाई ऑक्साइड की अधिक सांद्रता के कारण सिर और कंधों की ओर आकर्षित होते हैं। वहीं दूसरे मच्छर पैर और एड़ियों की ओर आकर्षित होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया कि मच्छर गहरे रंग जैसे कि नीला, लाल, और काले रंग की पहचान आसानी से कर लेते हैं और इन रंगों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। लेकिन कुछ लोगों तक इनकी पहुंच ज्यादा होती है जैसे गर्भवती महिलाएं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भवती महिलाओं की मेटाबोलिक रेट यानी कि चयापचय क्रिया की दर तेज़ होती है और वो सांस छोड़ते समय 21 फीसदी ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ती हैं ऐसे में कार्बन डाई ऑक्साइड का ज्यादा उत्सर्जन मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करता है। एक सबसे रोचक बात ये भी है कि कुछ लोग प्राकृतिक रुप से रैपेलेन्ट्स प्रोड्यूस करते हैं जिनसे मच्छर दूर रहते हैं तो वहीं कुछ लोग अट्रैक्टेंट्स कंपाउंड उत्पन्न करते हैं जिनसे मच्छर आकर्षित होते हैं। तो दोष मच्छरों का नहीं, आपकी शारीरिक प्रकृति का है। इतना सब जानने के बाद उम्मीद तो यही है कि अब आप मच्छरों को अपना जानी दुश्मन नहीं मानोगे, क्योंकि छोटा सा ये मच्छर बहुत से पक्षियों का खाना बनकर उन्हें जिंदा रखने में मदद करता है और पर्यावरण को सुरक्षित, सुंदर रखने में भी इसका रोल है
