बंगाल की राजनीति कैसे आग लगा रही यूपी में
उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव हैं लेकिन यहां पर बंगाल में हो रही बयान बाजी, घटनाओं का असर पूरी तरह से देखा जा रहा है मतलब साफ है कि यूपी तक पहुंच रहा है बंगाल की राजनीति का असर और इसका सीधा फायदा बीजेपी उठाने में लगी है, जी हां आम जनता उन्नयन पार्टी के इकलौते विधायक हुमायूं कबीर , जिन्होंने TMC से बगावत पर अपनी पार्टी बनाई है, उनके एक भडकाउ बयान से यूपी की राजनीती में हलचल मच गई और हर कोई इसकी बढ़चढ़कर निंदा भी कर रहा है क्योंकि यूपी में चुनाव हैं, जी हां हुमायूं कबीर ने बकरीद पर कुर्बानी को लेकर बहुत ही भड़काऊ बयान दिया और कहा कि, बकराईद पर 1400 साल से कुर्बानी होती आ रही है। जब तक दुनिया है, कुर्बानी होगी। गाय की भी कुर्बानी होगी, बकरी और ऊंट की भी कुर्बानी होगी। सारे पशुओं की कुर्बानी जायज है, कोई नहीं रोक सकता। बस इसके बाद बंगाल तो क्या साथ में यूपी की राजनीती में उबाल आ गया है, जगद्गुरु स्वामी श्री सतीशाचार्य महाराज ने कबीर के बयान पर बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि .ये कौन लोग हैं जो राजनीति कर रहे हैं? कौन लोग हैं, जो गलत कर रहे हैं, इनको फांसी क्यों नहीं दी जाती? इनको बंद क्यों नहीं किया जाता? हुमायूं कबीर कि इस राजनीती को यूपी के मुसलमान भी समझ रहे हैं और यही कारण है कि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने साफ तौर पर कह दिया कि हमारे देश में हमारे देश का ही कानून चलेगा। गाय को ‘गौ माता’ कहना मुसलमानों का भी फर्ज है। उन्होंने ये भी कहा कि गाय की कुर्बानी कहीं नहीं लिखी है और कुर्बानी होनी भी नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह के रसूल ने मना किया है। यही नहीं कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई भी खुलकर सामने आ गए और बोला कि गाय की कुर्बानी जरूरी नहीं है, बकरी की कुर्बानी दी जा सकती है।उन्होंने कहा कि इस देश में हम एकसाथ रहते हैं और एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं। साफ लग रहा कि यूपी की राजनीती में हिंदू-मुसलमान हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है और कुछ इस मुद्दे की आड़ में अपने वोट साधने की कोशिश कर रहे हैं।
