BJP से ज्यादा अखिलेश को इनसे खतरा हो गया है
समाजवादी पार्टी के नेता जावेद अली खान ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी की तरफ से विवादित बयान दिया है। समाजवादी पार्टी के बहुत सारे नेता अपने विवादित बयान के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह मनोज यादव काका हो या दूसरे प्रवक्ता हो। लगातार वो संघ के बारे में,भाजपा के बारे में और एक जाति विशेष वर्ग के बारे में विवादास्पद बयान दिया करते हैं। लेकिन यह जो जावेद अली खान का बयान आया है, यह पूरे के पूरे हिंदू समाज को इन्होंने जहरीला बना दिया है। अब समाजवादी पार्टी की पूरी की पूरी राजनीति जो है वो मुस्लिम अपीज़मेंट के इर्द-गिर्द घूमती है।लेकिन मुस्लिम अपीज़मेंट का जो की जो एक सीमा है या मुस्लिम अपीज़मेंट का जो लिमिट है वो क्रॉस करके हिंदू घृणा पर पहुंच गया है। और ये अलग बात है कि यही कारण है उनके उनका जो हश्र राजनीतिक मैदान में हुआ है उसका। लेकिन फिर भी समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष समेत उनके जो पूरा का पूरा अमला है वो हिंदुओं को संघ को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बयानबाजी से बाज नहीं आता। संघ के खिलाफ आप बयानबाजी कीजिए। हालांकि संघ कोईराजनीतिक संगठन नहीं है। भारतीय जनता पार्टी को के खिलाफ बयानबाजी करने के लिए कोई भी दूसरा राजनीतिक दल पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन हिंदू समाज जो इस देश का लगभग 80% है उसके खिलाफ बयान करना और उसको जहरीला बोलना ये अपने आप में बहुत दुखद तो है ही है। लेकिन इसने लगातार समाजवादी पार्टी का नुकसान ही किया है और लगातार फिर नुकसान करेगा। अब ये सारे बयान तब आ रहे हैं जब 2027 में विधानसभा का चुनाव होना है और उसके पहले बहुत सारे राजनीतिक दल इकट्ठा हो के केंद्र में नरेंद्र मोदी को हटाने की कोशिश कर रहे थे और अब 2027 में उत्तर प्रदेश में योगीआदित्यनाथ को हराने की भरसक कोशिश कर रहे हैं और उस कोशिश में कोई भी चीज छोड़ने के लिए इन्हें तैयार हैं। चाहे झूठ का सहारा हो, चाहे विवादास्पद बयान का सहारा हो याअन्य कोई तरीका है। अलायंस की भी बात हो रही है। ये सारी चीजें हो रही है। लेकिन क्या ये बयान समाजवादी पार्टी को किसी दृष्टि से फायदा दिख दे रहे हैं या फायदा करते हुए दिख रहे हैं? ऐसा नहीं दिख रहा है।
क्या भीड़ इकट्ठा करने के लिए अपनाई गुरू की थप्पड़ रणनीती
अभिजीत दीपके को झापड़ लगना। जयपुर में अभिजीत दीपके को भीड़ के बीच जब वह भीड़ में अपने लोगों से मिल रहे थे, बातचीत करने की कोशिश कर रहे थे या एक शो ऑफ स्ट्रेंथ दिखा रहे थे। उसमें उन पर कई लोगों ने छापड़ से मारा और थोड़ी कॉस की स्थिति हो गई। अब क्याअभिजीत दीप के अपने पुराने जो प्लेबुक है समाज आम आदमी पार्टी का जिस प्लेबुक ने अरविंद केजरीवाल को इतना बड़ा नेता बना दिया इसलिए कि वो अपने ही कार्यकर्ताओं से ज्यादातर पिटते थे और यह दिखाने की कोशिश करते थे कि वो बहुत पॉपुलर हो रहे हैं इसलिए उन पर हमले हो रहे हैं। क्या अभिजीत दीपके भी वही करने की कोशिश कर रहे हैं और क्या इसका फ़ायदा होगा? यह प्लेबुक जो है अब वह पुराना हो गया है। इसके कारण स्थिति थोड़ी सी जयपुर में खराब हुई। अब कुल मिलाकर के जिस तरह से अभी अभिजीत दीप के दिल्ली गए। दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश गए। उत्तर प्रदेश के बाद वो महाराष्ट्र का उनका प्लान था। फिर जयपुर गए। कुल मिलाकर के ये वहीं जा रहे हैं जहां भारतीय जनता पार्टी का वो है। इसका मतलब जो बार-बार लगातार यह कहा जा रहा है कि अभिजीत दीपके कुछ नहीं है। सिर्फ एक ऐसे व्यक्ति हैं या एक ऐसे एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं जो भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को डिसक्रेडिट करने की कोशिश है। ये अलग बात है कि अभिजीत दीपके ना जंतरमंतर पर भीड़ जुटा पाए, ना लखनऊ में भीड़ जुटा पाए, ना जयपुर में भीड़ जुटा पाए। भारत में 100 200 लोग तो बारात में इकट्ठा हो जाते हैं। लेकिन किसी राजनीतिक दल के लिए भीड़ जमा करना या ऐसा राजनीतिक दल या ऐसा संगठन जिसके लगभग 2 करोड़ 20 लाख फॉलोअर्स हैं। वो अगर हजारों में भीड़ इकट्ठा करता है तो निश्चित तौर पर प्रश्न चिन्ह लगाए जाएंगे। तो अब अभिजीत दीपके को झापड़ मारा गया। क्या वह वही प्लेबुक है? यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन क्या इस सिंपथी के कारण उनके साथ और लोग जुड़ेंगे और क्या यह जो 2002 करोड़ 2000 2 करोड़ 20 लाख का आंकड़ा है ये स्टैटिक हो गया है। ये बढ़ नहीं रहा है। इसकी एक सीमा है और बांग्लादेशी पाकिस्तानी मिडिल ईस्ट के लोग का एक जो पूरा गैंग है वो इससे ज्यादा नहीं बढ़ सकता है। इस तरह की चीजें तो कुल मिलाकर के अभी यह वैसा ही होता दिख रहा है।
