पप्पू यादव के बाद रेणूका चौधरी का संसद के बाहर ड्रामा

 

लगता है आजकल विपक्ष के तमाम नेताओं में होड़ सी लग गई है कि संसद के अंदर या बाहर कौन सा ऐसा ड्रामा करें की मीडिया की सुर्खियां बन जाएं और हर जगह उनकी चर्चा हो, पर इस चक्कर में संसद में आजकल काम तो कुछ नहीं हो रहा सिर्फ हंगामा , गाली-गलौज और सबसे ज्यादा ड्रामा करने की कोशिश हो रही है, अब हाल ही में बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव काफी चर्चा का विषय बन गए, संसद के अंदर से लेकर बाहर तक वैसे तो पप्पू यादव को कोई ज्यादा पूछता नहीं है तो बस जनाब ने चर्चा में रहने का एक अनोखा तरीका निकाल लिया, उनका वो वीडियो काफी वायरल हो गया जिसमें वो साधु के वेश में संसद के बाहर बैठे और लोगों से चंदा ले रहे थे, संसद में ड्रामा करने में उन्होंने राहुल गांधी को भी पीछे छोड़ दिया, पर राहुल तो राहुल हैं वो भी कहां पीछे रहने वाले थे और पप्पू यादव को चंदा देने सबसे पहले पहुंच गए और सुर्खियां बटोर ली, हालांकि इन दोनों नेताओं की इसके लिए काफी निंदा हुई, जनता ने भी इसे बड़ा नाटक करार दिया, यही नहीं समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने तो इसे खुलकर गलत बताया और जता दिया कि इससे साधु-संत का अपमान हुआ है।

 

रेणूका चौधरी का संसद के बाहर ड्रामा क्या संसद में नहीं उठ सकते मुद्दे

 

खैर पपूप यादव का ड्रामा अभी चर्चा में ही है पर इस बीच संसद में रेणुका चौधरी ने भी संसद में एक और ड्रामा कर डाला, गजब यही है कि संसद के अंदर ये नेता बोलते नहीं ना किसी को बोलने देते पर संसद के बाहर आते ही इन्हें सारे मुद्दे याद आ जाते हैं , अब रेणुका चौधरी ‘मोदिया बिंद के मरीज जो चश्मा पहनते हैं वो पहनकर संसद में पहुंची और मीडिया को सरकार के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। उन्होंने अपना मोदिया बिंद’ लिखा चश्मे दिखाते हुए कहा कि ये चश्मे उन ‘अंधभक्तों’ के इलाज के लिए हैं जिन्हें देश में हो रही समस्याएं दिखाई नहीं देतीं। रेणुका तंज कसने में भी माहिर हैं और यह भी कह दिया कि अगर मोतिया बिंद का इलाज हो सकता है, तो इसका भी इलाज कराया जाएगा।रेणुका चौधरी ने कहा लोगों को चोरी का मामला नहीं दिखता, पुल का गिरना नहीं दिखता और NEET परीक्षा से जुड़ा मुद्दा भी नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ तारीफ करना दिखाई देता है।

 

मल्लिकार्जुन खरगे का अपने ही नेताओं पर बस नहीं चलता पर MODI पर कटाक्ष करने में अवल

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे साहिब भी अपनी फुल फार्म में चल रहे हैं वो लगातार अमित शाह को सदन में आकर अपना बयान देने की बात कर रहे हैं पर सवाल यही है कि जब सरकार को कोई नेता सवालों के जवाब देने सदन में खड़ा होता है तो खरगे साहिब का अपने ही नेताओं पर कोई बस नहीं चलता और वो किसी को सुनने की बजाय हंगामा ही करते हैं, लेकिन खरगे जी यह भी कहते हैं कि सदन के नहीं चलने के लिए विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार जिम्मेदार है। वो सीघे तौर पर इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

देश के बहुत से जरूरी काम इंतजार कर रहे संसद चलने का

पर खरगे को जवाब देते हुए संसदीय मंत्री किरण रिजूज ने यह तक कह दिया कि अमित शाह आकर जवाब देंगे लेकिन उनका सुनना पड़ेगा। लेकिन यह बात तो साफ दिखती है कि सरकार और विपक्ष के बीच चली तनातनी में , संसद का मूल्यवान समय खराब हो रहा है और देश के हित में लिए जाने वाले बहुत से फैसले बस संसद चलने का इंतजार ही कर रहे हैं।

 

क्या एक बार फिर उद्वव देंगे NDA का साथ

क्या आने वाले समय में उद्दव ठाकरे पार्टी भी NDA की दोबारा सहयोगी बन सकती है, क्या इंडी गठबंधन से उद्दव का मोह भंग हो चुका है , हाल ही में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026 यानी FCRA संशोधन बिल को लेकर उद्दव पार्टी के नेता के एक बयान के सामने आने के बाद राजनीती गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है, जी हां उद्दव पार्टी ने कहा है कि वह देश हित वाले विषयों का विरोध नहीं करती, पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने एक इंटरव्य में खुल कर कहा है कि कहा है यह कोई नया एक्ट नहीं है, 1976 में इंदिरा गांधी यह लेकर आई थी, उसके बाद संशोधन होते रहे हैं। जो संशोधन बिल सरकार लेकर आ रही है, जिसके बारे में सुन रहे हैं, पर हमे draft नहीं मिला है, . हम हर चीज का विरोध नहीं करते पर सरकार एक बार हमें ड्राफ्ट जरूर दिखाए, हम उसपर चर्चा करेंगे और अगर सब कुछ ठीक है तो हमें उसका समर्थन करने से कोई परहेज नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार से हम ज्यादा देश भक्त हैं। उन्होंने यह भी कह दिया कि अगर किसी के पास कोई ट्रस्ट या एनजीओ है और उसे विदेश से पैसे मिलते हैं, तब सरकार का अधिकार है कि वह स्रोत के बारे में जाने…चाहे कोई भी सरकार हो, चर्चा होनी चाहिए पर साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि लुका-छिपी का कोई खेल नहीं होना चाहिए।क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा में आपके पास मैनडेट है और आप इसे ला रहे हैं तो यह कहीं न कहीं तानाशाही रवैया है, यह आपका अहंकारी रवैया है और बस इसी की लड़ाई है। उन्होंने यह भी कह दिया कि उनकी पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर से लेकर 370 हटाने पर पूरा सहयोग दिया।