हंस कैसे दूध में मिला पानी छोड़कर दूध पी लेता है
हंस के सामने दूध और पानी मिलाकर रख दें तो वह सारा दूध पी जाएगा और पानी छोड़ देगा। क्या यह बात सच है? तो आपको बता दें कि रियलिटी में जैसे ही कीचड़ वाला पानी इनकी चोंच में जाता है तो यह पानी को फिल्टर करके गंदगी और धूल के पार्टिकल्स को बारीक तरीके से अलग कर देते हैं। हंस की चोंच में लेमिने नाम का एक संरचना होती है। इसका काम गंदे पानी या कीचड़ से छोटे कीड़े और पौधों को कणों को छानना होता है। वहीं भारतीय साहित्य और संस्कृत परंपरा में हंस को नीरशर विवेक जल और दूध को अलग करने की क्षमता रखने वाला एक प्रतीक माना गया है। इसे एक मेटाफोर है जिसका अर्थ है कि अच्छे और बुरे में फर्क करने की समझ रखना।
एक ऐसी जगह जो गंदे पानी को वाटर प्यूरीफायर की तरह ही साफ कर देती
भारत में मौजूद एक ऐसा बीच जो गंदे पानी को वाटर प्यूरीफायर की तरह ही साफ कर देता है। लोग पहले इस बीच को मिट्टी के घड़े के बर्तन में अंदरूनी सतह पर रगड़ते थे। फिर उसमें मटमला नदी का पानी भर दिया जाता था। बीच के प्राकृतिक यौगिक पानी में तैर रहे बेहद में हीन मिट्टी के कणों को आपस में चिपकने में मदद करते थे। कुछ ही देर में कण बड़े और भारी होकर नीचे बैठ जाते थे। जिससे ऊपर का पानी पहले से काफी साफ दिखाई देने लगता था। उस बीच का नाम है कटक जिसे आज स्टेनोस पोटातरम या क्लियरिंग नट भी कहा जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। दिलचस्प बात यह है कि आज के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स भी इस संदिग्ध कैलकुलेशन और फार्मूलेशन का इस्तेमाल करते।
