Congress ने क्यों Trojan Horse जैसे भारी भरकम शब्द से साधा Modi पर निशाना

कम ही लोगों को यह पता होगा कि संसद के पिछले मॉनसून सत्र में मोदी सरकार यानी गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन विधायक पेश किए थे, उस समय भी उसको लेकर विपक्ष में जबरदस्त हंगामा हुआ था और विपक्ष ने सीधा आरोप लगा दिया था कि इसके जरिए सरकार ग र भाजपा सरकारों को गिराने के रास्ते बना रही है, खैर उस समय वो तीनों विधायक  पास नहीं हुए  और उन्हें   बहस के लिए संयुक्त संसदीय समिति में भेजा गया।लेकिन हाल ही में  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन संशोधन विधेयक को ‘विधायी ट्रोजन हॉर्स’ जैसा  भारी भरकम नाम देकर एक तरफ तो सरकार पर हमला किया है पर दूसरी तरफ इस नाम को लेकर आम जनता में उत्सुकता भी बढ़ा दी है कि आखिर ये विधायक क्या हैं और इसे ऐसा नाम क्यों दिया जा रहा है, चलिए हम आपको समझाते हैं दरअसल इस कानून के बनने से मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को हटाया जा सकता है अगर से लेकर वो गंभीर आपराध के आरोप लगने पर जिसमें  कम से कम पांच साल की सजा का  प्रावधान हो और साथ ही अगर नेता लोग बिना जमानत के  30 दिनों तक जेल में रह जाते हैं तो उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा ही। इस समय चर्चा यह भी  चल निकली  थी कि केजरीवाल के केस को देखते हुए इस तरह का कानून लाने की पहल की जा रही है जो लंबे समय तक जेल में रहे और अपना पद छोड़ने से मना कर दिया।

‘ट्रोजन हॉर्स’ का मतलब खतरनाक सॉफ्टवेयर 

अब खरगे साहिब का यह मानना है कि इस कानून को बनाकर  बीजेपी ना केवल पर चुनावों की अहमियत खत्म करना चाहती है बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है जो बहुत खतरनाक है। इसलिए यह’ विधायी ट्रोजन हॉर्स ‘ है। आपको बता दें कि कंप्यूटर की दुनिया में ‘ट्रोजन हॉर्स’ का मतलब ऐसे खतरनाक सॉफ्टवेयर  के लिए इस्तेमाल किया जाता है , जो  सामने से तो सही और सरल नजर आता है, पर  वह कंप्यूटर के पूरे सिस्टम (हार्ड ड्राइव) को  तबाह करने की क्षमता रखता है।   मतलब है कि इस साफ्टवेयर को जानबूझकर इस तरह डिजाइन  किया जाता है जो ऊपर से देखने में बहुत फायदेमंद  अच्छा लगता है,पर  इसका उपयोग बहुत ही गलत  और खतरनाक इरादों से किया जा सकता है। खरगे ने अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया  और उसमें बीजेपी के 11 वर्षों के शासन को निशाना बनाते हुए 130वां संविधान संशोधन को ‘विधायी ट्रोजन हॉर्स’ भी बता दिया।  खैर खरगे के  आरोप कितने सही हैं कितने गलत ये फैसला खुद जनता को लेना है कि क्या अपराध में लिप्त नेताओं को जनता की कुर्सी पर बैठने का हक है या नहीं । पर हां इस भारी भरकम शब्द को लेकर राजनीती गलियारों में चर्चा जरूर हो रही है।

Modi पर साधा निशाना तेजस्वी ने खाई मुंह की 

ऐसा क्या हुआ कि  प्रधानमंत्री जी के बिहार दौरे के सामने एक बार फिर लालू जी का चारा घोटला बिहार की राजनीती में चर्चा का विषय बन गया और एक बार फिर तेजस्वी यादव को मुंह की खानी पड़ी दरअसल pm मोदी के बिहार के पूर्णिया में दौरे से पहले तेजस्वी यादव ने एक लंबा चौडा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया और pm मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि जुमलों की बारिश करने से पूर्व कृपया अपने सभा स्थल से 2-3 किलोमीटर के दायरे में टूटी-फूटी  सड़क, शिक्षकविहीन स्कूल, बदहाल स्वास्थ्य केंद्र, महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, युवाओं की जनसमस्या भी जान लीजिए । तेजस्वी ने यह भी कहा कि जितना पैसा pm अपने दौरों पर खर्च करते हैं उससे बिहार का बढिया विकास हो जाता । बस फिर क्या था बीजेपी के तेजतर्रार बड़बोले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मैदान में कूद पड़े और तेजस्वी यादव   पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधी सलाह दे डाली कि  वो पहले अपने पिता लालू प्रसाद यादव से पूछें कि अगर चारा घोटाला न होता तो बिहार का कितना विकास हो जाता, बिहार की तस्वीर ही कुछ  अलग होती। वैसे पीएम मोदी के दौरे के दौरान ही जिस तरह से जीतन राम मांझी की पार्टी की भी बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं माना जा रहा है बीजेपी आलाकमान तक अपनी ज्यादा सीटों की मांग पहुंचाने के लिए जानबूझकर   मांझी ने यह समय चुना जिससे उनकी मांग के साथ   पार्टी के गठन के दस साल बाद भी मान्यता प्राप्त दल का दर्जा न मिलने की की नाराजगी उपर तक पहुंच जाए।

UP एक तीर कईं शिकार कर डाले अखिलेश यादव ने 

यूपी में आजकल जबरदस्त राजनीतिक गहमागहमी मच गई है और वो इसलिए कि समाजवादी पार्टी ने पंचायत चुनाव से  हटने का  ऐलान जो कर दिया है  जी हां शिवपाल यादव ने इटावा में  पंचायत चुनाव को लेकर यह बड़ी घोषणा कर डाली  है, अब सबको पता है कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर हैं और  पार्टी में एक बड़ी जिम्मेदारी रखते हैं और  ऐसे में बिना  अखिलेश यादव की सहमति के वो इतना बड़ा बयान नहीं दे सकते हैं , चर्चा यही है कि  इस बयान के पीछे  अखिलेश यादव की ही पूरी रणनीती छुपी हुई है माना यही जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बिना पार्टी सिंबल के चुनाव में उतरेंगे और ऐसा करके अखिलेश जमीन पर अपनी पकड़ की  भी टोह ले सकेंगे। साथ ही, समाजवादी पार्टी के ना उतरने से है  कांग्रेस सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है और ऐसे में समाजवादी पार्टी यानी अखिलेश को  कांग्रेस की ताकत को देखने का भी मौका मिलेगा जिससे विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में आसानी होगी।तो चर्चाएं यही हैं कि पंचायत चुनाव ना लड़कर अखिलेश यादव एक तीर से कई शिकार कर सकते हैं जो उनको यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार कर देगा।

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