राहुल गांधी जिस तरह से संसद पहुंचते हैं, जिस तरह ड्रेस अप होते हैं, जिस तरह का उऩका व्यवहार होता है, जो Body Language सामने आती है, उससे कहीं ना कही Impression यही जाता है कि राहुल संसद की गरिमा, संसद के काम को कतई गंभीरता से नहीं लेते, अभी तक यह बातें बीजेपी के नेता तो करते ही हैं पर कांग्रेस के कईं कद्दावर नेता संसद में राहुल के पहनावे , उनकी बातचीक के लहजे से खुश नहीं हैं, अब हाल फिलहाल में बीजेपी नेता कंगना राणौत ने तो यह तक कह दिया कि राहुल जिस तरह का व्यवहार करते हैं वो महिलाओं के लिए असहज हो जाता है, यही नहीं संसद में गिरिराज सिंह
ने भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और बोले कि देश में एलपीजी की समस्या नहीं बल्कि एक ही समस्या विपक्ष के नेता का है, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में सभी राजनीतिक दलों से इस घड़ी में एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं पर विपक्ष खासतौर पर राहुल अपनी ही दुनिया में चल रहे हैं। उनकी अगुवाई में ही कांग्रेस हर चीज में राजनीति देख रही है। गिरिराज सिंह
ने फिर दोहरा दिया कि देश में एलपीजी की कोई समस्या नहीं है; देश में सिर्फ एक ही समस्या है, विपक्ष के नेता की समस्या, क्योंकि केवल विपक्ष के नेता को ही पता है कि वे कहां रहते हैं,
नीतीश कुमार को समझना होगा कि अब आ गए हैं छोटे भाई की भूमिका में
चर्चाएं थी कि अब नीतीश कुमार दिल्ली कूच कर रहे हैं तो उनकी समृद्धि यात्रा खत्म हो चुकी हैं पर जैसे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समृद्धि यात्रा के पांचवे चरण की शुरूआत कर दी तो एक अलग ही चर्चा ने जन्म ले लिया कि आखिर उनके दिमाग में क्या खेल चल रहा है जो अब भी वो आराम से नहीं बैठ रहे हैं और नीतीश अब समृद्धि यात्रा के जरिए बिहार में क्या तलाश रहे हैं। छन छन कर खबरें आ रही है कि एनडीए के अंदर गृह विभाग को लेकर चल रही तनातनी नीतीश परेशान कर रही हैं, क्योंकि उनका अपना ही पुराना फॉर्मूला था कि जो सीएम होगा वह गृह विभाग अपने पास रखेगा। अब वो चाह रहे हैं कि चाहे मुख्यमंत्री बीजेपी का हो पर गृह विभाग JDU के पास होना चाहिए जैसा कि साल 2025 विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद गृह विभाग भाजपा ने हथिया लिया। पर इससे बीजेपी सहमत नहीं है और बात यहीं पर अड़ी दिख रही है। पता चला है कि बीजेपी Home Ministry में सम्राट चौधरी मॉडल चलाना चाहती है,और उसके जरिए जो पॉपुलैरिटी हासिल कर ली है उसे पूरी तरह भूनाना चाहती है। अब चर्चा यही है कि नीतीश समृद्दि यात्रा के जरिए बिहार में अपना समय लंबी खींच रहे हैं जिससे इस मुद्दे पर पूरी क्लियरिटी बने दूसरी तरफ गृह विभाग से बीजेपी की जो एक नऊ इमेज बनी है वो बीजेपी किसी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहती और साफ लग रहा है कि बीजेपी पूरी कोशिश करेगी की jdu उन्हें बड़े भाई के रूप में देखना शुरू कर दे।
Congress की एकला चलो की नीती कहीं भारी ना पड़े
लगता है आजकल कांग्रेस ने एकला चलो की राजनीती करनी शुरू कर दी है पर जिस तरह से कांग्रेस का जनाधार धीरे-घीरे खत्म हो रहा है माना यही जा रहा है काग्रेस की यह रणनीती उसे ले डूबेगी, जीता जाता उदाहरण हरियाणा ही है जहां कांग्रेस ने आप को साइड लाइन कर दिया और इस चक्कर में उसके काफी वोट कटे और उसे हार दिलवा दी, अब बंगाल में भी कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़ने का मन बना बैठी है और इसके बाद असम से खबरें आ रही हैं कि उसने अपने पुराने पाटनर झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा से असम में दूरी बना ली है, कांग्रेस ने उसके साथ सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनाई और हारकर झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया। वैसे इससे पहले बिहार में भी RJD ने उसे भाव नहीं दिया था। अब पहले बिहार और अब असम में अपने सहयोगी दलों के इस अपमान से पार्टी के आलाकमान गुस्से में तो हैं और इसका सीधा असर झारखंड पर पर सकता है जहां कांग्रेस , झारखंड मुक्ति मोर्चा के सहयोग से सरकार में बनी हुई है। झारखंड में जल्द ही राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है, और कांग्रेस एक सीट पर अपना दावा ठोक रही है पर सवाल यही है कि क्या झामुमो से बिगाड़ कर राज्यसभा की एक सीट जीत सकती है, आने वाला समय ही बताएगा कि गठबंधन के भीतर की यह दरार कांग्रेस पर कितना भारी पड़ती है।
