NDA का बड़ा मकसद Women Reservation Bill के पीछे
2023 में वुमेन रिजर्वेशन बिल असेंबली लोकसभा में पास किया गया था , उसमें सरकार एक व्यापक संशोधन लाने की तैयारी में है। बिल का नाम नारी शक्ति अभिनंदन अभियान था। इसके तहत लोकसभा में विधानसभाओं में महिलाओं को 33% मतलब एक तिहाई आरक्षण दिए जाने की बात थी। लेकिन मामला यह था कि इस बिल को जो नया सेंसस आएगा उसके बाद जो डीलिमिटेशन नया निर्धारित होगा उसके बाद लागू किया जाएगा और इसको लेकर के आलोचना विपक्ष की तरफ से की जा रही थी कि बिल पास कर लिया और इसको 2029 में लागू किया जाएगा। प्राइमरी कारण यही था। लेकिन अब सरकार इसको जल्द से जल्द लागू करने के लिए कुछ संशोधन ला रही है। अब चूंकि अब पहले की जो स्थिति थी मतलब 2019 की लोकसभा में जिस तरह की मेजॉरिटी थी और अभी की मेजॉरिटी में थोड़ा अंतर है और इन सब के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह जो भी राजनीतिक दल हैं जिनसे इस मामले में मदद की संभावनाएं हैं उनसे बात कर रहे हैं। चाहे वो जो वाईएसआर कांग्रेस हो चाहे बीजेडी हो इस तरह के सभी मतलब पक्ष के तो है ही है लेकिन विपक्ष के सभी दलों से मांग कर रहे हैं ।
बिल को 2011 की जनसंख्या के आधार पर तैयार किया जाएगा -बड़ी संख्या में मिलेगा महिलाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार

बिल में जो मोटे तौर पर बदलाव है वो यह कि अब इस कानून को या रिजर्वेशन जो है महिलाओं का इसको 2011 के सेंसस के आधार पर लागू किया जाए और अगर उस आधार पर लागू किया जाता है तो जो लोकसभा की वर्तमान सीटें हैं 543 वह बढ़कर के लगभग 816 हो जाएगी। मतलब यह कि इनमें से 273 सीटें जो हैं वो महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अब इसके लिए एक कंसेंसस बनाए जाने की जरूरत है। लोगों से बात की जा रही है। अमित शाह लगातार सबके साथ संपर्क है। बहुत सारे विपक्षी नेताओं के साथ उन्होंने बात किया है। और जो अभी ये ये सारा का सारा अभी जो कैबिनेट कमेटी की मीटिंग हुई थी कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स उसके बाद इस जो ये जो मामला 2029 से लागू होना था उसको अब लागू किया जा सकता है.
अब इसमें अड़चन क्या है? इसमें अड़चन ये है कि पहले जो मेजॉरिटी थी उस आधार पर इस बिल को तो पास करा लिया गया। अब इसमें बहुत सारे लोगों को ऑब्जेक्शन था , जैसे समाजवादी पार्टी का है। समाजवादी पार्टी का ऑब्जेक्शन ये था कि इसमें कोटा विदिन कोटा चाहिए। मतलब ये कि जो 33% आरक्षण है
उसमें जनरल का, महिलाओं का, एससी, एसटी का मतलब 33% में जो कोटा फिक्स होगा वो चाहिए था और इसी तरह का ऑब्जेक्शन आरजेडी का था। लेकिन अब आरजेडी के सांसद पहले नहीं थे। इस बार चार हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी का कद इस बार बढ़ा हुआ है। उसके लगभग 37 सांसद हैं लोकसभा में। तो स्थिति थोड़ी सी इस बार मुश्किल है और इसीलिए लगातार जो भारतीय जनता पार्टी है वो अमित शाह के माध्यम से लोगों को आउटरीच कर रही है कि इस मामले को जल्दी से लागू किया जाए। तो जो बेनिफिट महिलाओं को 2029 से उपलब्ध होता वो उसके पहले जितनी जल्दी हो सके उसको इसलिए कि अब लोकसभा के चुनाव तो 2029 में ही होंगे। लेकिन विधानसभा के चुनाव में इसका फायदा लोगों तक पहुंच पाए। इस तरह की कवायद पर काम हो रहा है। पर इस मामले में बहुत सारे और लोगों को भी ऑब्जेक्शन हो सकता है। हालांकि ज्यादा ऑब्जेक्शन जो नॉर्थ की पार्टीज हैं उसमें है। कांग्रेस तो निश्चित तौर पर बिना विरोध के तो ये इसको सीधे तौर पर
स्वीकार नहीं करेगी। उसके अपने तर्क होंगे। उसके अपने वो होंगे और अभी तक की जो सूचना है उस सूचना के आधार पर भारतीय जनता पार्टी या भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने या गृह मंत्री ने कांग्रेस तक अभी इस मामले में संपर्क नहीं किया है। लेकिन निश्चित तौर पर संपर्क कांग्रेस को भी किया जाएगा किया जा सकता है। अभी तक कोई सूचना नहीं है।
Congress -समाजवादी पार्टी विरोध करने को तैयार

कांग्रेस का जिस तरह का नजरिया होता है या जिस तरह का एटीट्यूड होता है लगातार मतलब विरोध के लिए विरोध करने वाला उस नाते कांग्रेस से संपर्क करेगी और कांग्रेस का क्या रिस्पांस होगा ये सबको मालूम है। खैर तो कुल मिलाकर के ये जो पूरा पूरी की पूरी चुनाव ये प्रक्रिया है इस प्रक्रिया को रिवजिट करके इसको जल्दी से जल्दी लागू करने की सरकार की मंशा है और उस मंशा पर सरकार ने ऑलरेडी काम कर दिया है और बजट सत्र में ही इसको लागू करने का मतलब एकद दिन में इसको पेश करने का पेश करने की सरकार की योजना है और ये नारी शक्ति वंदन अधिनियम जो 10 छठा संविधान संशोधन था उसके आधार पर इसको लाया गया था उसमें ये सारे सारे परिवर्तन ले आएगी। अब जिन लोगों को विरोध करना शिवसेना से भी भारतीय जनता पार्टी ने संपर्क किया है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी से भी संपर्क किया है। हालांकि बहुत सारे लोग जो इसके खिलाफ या जो इस पर वॉइस हुआ करते थे वो अब संसद में नहीं है। बहुत सारे रिटायर हो गए हैं। लेकिन जो अड़चन है सबसे बड़ी वो समाजवादी पार्टी की ही है जिसके 37 सीट हैं लोकसभा में। अब इस सबको कैसे मैनेज करती है? ये तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन सरकार इस पर बहुत सीरियसली वो कर रही है। एक और बात है अगर इसको विरोध बहुत तरीके से बहुत विरोध करती है तो उन पार्टियों का भी इस मामले में नुकसान हो सकता है।
असम में प्रियंका की राह मुश्किल होती दिख रही

आसाम में भारतीय जनता पार्टी लगातार मजबूत होती हुई दिख रही है। उसके पीछे कारण ये है कि आसाम में जो कांग्रेस के बड़े नेता थे चाहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हो सांसद और एमएलए हो जिसमें प्रद्युत बारदुलई शामिल थे या इस तरह के और नेता वो लगातार कांग्रेस को छोड़ के जा रहे हैं। जिस तरह से कांग्रेस की रणनीति है वो विशेष रूप से बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर के वो और दूसरा केंद्रीय नेतृत्व का प्रदेश के नेतृत्व को निगलेक्ट करना।बावजूद इसके कि आसाम की जो इंचार्ज हैं वह कांग्रेस की महासचिव और गांधी परिवार की प्रियंका गांधी वाड्रा है। लेकिन फिर भी स्थिति वहां संभलती हुई दिख नहीं रही है। और अगर इसी तरह से जैसे अह इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अब तक 11 कांग्रेस के लोगों को जो कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी में आए हैं उनको उतार चुकी है। और उसमें बहुत सारे ऐसे हैं जिनकी अपनी मजबूत साख और पकड़ है। ऐसे तो हेमंत विश्व शर्मा भी पुराने कांग्रेसी हैं। लेकिन वो लंबे समय से पिछले चुनाव से पहले कांग्रेस में आ गए थे। पिछले सर में वो सर्वानंद सोनवाल के मुख्यमंत्री में मंत्री थे। मुख्यमंत्री काल में मंत्री थे और अब खुद वो मुख्यमंत्री हैं और यह सारा वो जो कांग्रेस के लोगों को ले आ रहे हैं। इसमें हेमंत विश्व शर्मा की बड़ी भूमिका है औरवो ले आ रहे हैं और और यह जो कहा जा रहा
लड़ने के लिए नहीं Congress के पास HINDU नेता

है कि कांग्रेस में हिंदू नेता खाली हो गए हैं और जो गोगोई साहब हैं गौरव गोगोई। गौरव गोगोई के बारे में जो बात निकल कर के आ रही है उनकी पत्नी जो है वो ब्रिटिश सिटीजन है। उनके बच्चे जो है वो ईसाई हो गए हैं। ऐसा हेमंत विश्व शर्मा का दावा है और प्लस उनके जो आईएसआई से संबंधों का आरोप हेमंत विश्व शर्मा लगा
रहे हैं। उसके बाद उनकी स्थिति और खराब हुई है। ये शायद मुस्लिम मतदाताओं के बीच इसका प्रभाव ना पड़े लेकिन हिंदू मतदाताओं पर और जो ट्राइबल मतदाताओं पर इसका निश्चित तौर पर प्रभाव पड़ने वाला है और वो दिख रहा है। तो जिस तरह से लोग छोड़ कर के जा रहे हैं उसके बाद कांग्रेस के पास क्रेडिबल कैंडिडेट्स नहीं मिल रहे हैं। ये एक बड़ा संकट है उनके सामने। अब वह चुनाव निश्चित तौर पर लड़ रहे हैं। किस तरह से चुनाव को बंदोबस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। एक दो समझौते भी उन्होंने किया है। अलायंस भी किया है। इन सब के बाद क्या कांग्रेस वहां पर कुछ इस तरह का परफॉर्म कर पाएगी कि वह सरकार बनाने की स्थिति में हो या तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी वहां पर चुनाव जीत करके आएगी। इसलिए कि अगर पिछले चुनाव की बात करें तो लगभग दोनों का वोट परसेंट एक था और अलायंस और बाकी सबके सहयोग से भारतीय जनता पार्टी डिसाइसिवली चुनाव जीत के आई थी। तो ये एक स्थिति है जिस पर चर्चा हो रही है की जानी चाहिए।
