ASSAM में अब BJP को बड़ा झटका

जिस तरह से कांग्रेस के बड़े बड़े नेता अपनी पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम रहे हैं , उससे यही लगने लगा हे कि वो दिन दूर नहीं जब बीजेपी में अपने नेताओं से ज्यादा कांग्रेसी चेहरे नजर आएंगे, लेकिन इसका खामियाजा भी बीजेपी को उठाना पड़ता है क्योंकि उसके अपने कद्दावर, निष्ठावान नेता अपनी उपेक्षा से दुखी पार्टी छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं ,अब असम में यही देखने को मिला है, अभी तक , यहां लगातार कांग्रेस छोड़ नेता भाग रहे थे लेकिन इन सब के बीच बीजेपी को भी एक बड़ा झटका लग गया , जी हां पता चला है कि टिकट न मिलने से नाराज होकर वरिष्ठ भाजपा नेता जयंत दास ने बगावत कर दी और दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करा दिया, आपको बता दें कि इस सीट पर बीजेपी ने हाल फिलहाल में बीजेपी में शामिल पूर्व कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई को टिकट दे दिया है। अब जाहिर सी बात है ये बात बीजेपी के नेता को रास नहीं आई और उन्होंने बगावत कर दी। अब असम के दिसपुर में त्रिकोणीय मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी दोनों को परेशान करेगा, खासकर बीजेपी को क्योंकि अब जयंत दास बागी होकर बीजेपी पर हमले कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है।उन्होंने यह भी कहा कि वो अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी के अनुयायी हूं और इस समय असम में कांग्रेस के दो नेता हैं – एक हिमंता बिस्वा शर्मा और दूसरे गौरव गोगोई। असली भाजपा कहीं नहीं है।

UP-अखिलेश की क्या मजबूरी जो याद किया फूलन देवी को

यूपी के चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी और बीजेपी सबसे ज्यादा तैयारियों में लगी दिख रही है और यह होना भी था क्योंकि यूपी में बीजेपी को टक्कर देने के लिए इस समय समाजवादी पार्टी ही सामने खड़ी है, जहां तक बहुजन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का सवाल है वो तो खुद हाशिए पर ही खड़े दिख रहे हैं, 2027 के चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक नारे को मजबूत करने के लिए एक हैरान करने वाला कदम उठाया है ,पता चला है कि अखिलेश चुनावों में फूलन देवी के नाम का सहारा लेकर अपनी दलित राजनीती को चिमकाने की तैयारी कर रहे हैं, जी हां अखिलेश ने जालौन की रुक्मिणी देवी को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है और आपको बता दें कि रुक्मिणी जी फूलन देवी की बड़ी बहन हैं तो यहां पर अखिलेश ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है एक तरफ उन्‌होंने निषाद समाज को अपने पाले में करने की कोशिश की है , जो पिछले चुनावों में बिखर गई थी वहीं दूसरी तरफ जनता के बीच पार्टी का महिला सशक्तिकरण पर विश्वास का संदेश भी पहुंचेगा। रूकमणी देवी की नियक्ति यूपी में इसलिए भी चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि यहां पर चुनाव जाती के आधार पर ही हारे या जीते जाते हैं। चूंकि रूकमणी देवी को अपनी पहचान जनता तक पहुंचाने के लिए कोई बड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि यूपी तो क्या देश के ज्यादातर लोग दस्यु सुंदरी और सांसद फूलन देवी को अच्छी तरह जानते हैं और उनकी बड़ी बहन को राजनीती में इससे पूरी मदद मिलेगी। अब देखना यही है कि अखिलेश का ये पासा सीधा पड़ता है या उल्टा क्योंकि फूलन देवी से यूपी का एक बड़ा वर्ग नाराज भी है। ऐसे में रुक्मिणी देवी की नियुक्ति कोर ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनावों में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *