सम्राट चौधरी इस नेता से क्या भुला पाएंगे अपनी पुरानी रंजिश

बिहार में जब से सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की गद्दी मिली है , राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चा शुरू हो चुकी है और कईं ऐसे पुराने विडियो वायरल हो रहे हैं जो सम्राट चौधरी से जुडे हैं , बात करते हैं साल 2021 की जब बिहार की राजनीती में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के बीच तकरार होना आम बात थी। एक विडियो जिसमें जिसमें सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के बीच बहुत तेज जुबानी जंग हुई थी और सम्राट चौघरी को बाद में अपने व्यवहार के लिए सॉरी भी कहना पड़ा था , जी हां सबको पता है कि सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा एक ही पार्टी के नेता होने के बावजूद अलग-अलग सोच रखते थे। 2021 में जब विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे और सम्राट चौधरी मंत्री थे और सवालों के ऑनलाइन जवाब देने के मुद्दे पर दोनों के बीच जबरदस्त बहस हो गई थी। मामला काफी गर्म हो गया था। पर बाद में सम्राट चौधरी को ही झुकना पड़ गया पर अब हालात बिल्कुल बदले हुए हैं, आज हकीकत ये है कि सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री हैं और डिप्टी सीएम रहे विजय सिन्हा अपने लिए किसी पद का इंतजार कर रहे हैं। यही राजनीती है अब देखना यही है कि ये दोनों नेता किस तरह से नई सरकार में अपने बीच तालमेत बिठाते हैं, पर कहते हैं ना राजनीती में पुरानी दुशमनी अंदर ही अंदर पकती रहती है और इतनी जल्दी नहीं भूलाई जा सकती है।

BJP का नया खेला है क्या नया परिसीमन बिल

संसद में होंने वाला नया परिसीमान बिल 2026 और माना जा रहा है इस बिल के जरिए आने वाले समय में बीजेपी South के तमाम राज्यों पर जीत हासिल करने के रास्ते खुल जाएंगे, जैसे कि सभी को पता है कि इस समय बीजेपी का लगभग पूरे देश में दबदबा है पर South के किसी भी राज्य में कर्नाटक को छोड़कर उसने और किसी भी राज्य में जीत का स्वाद नहीं चखा है और कर्नाटक में भी बीजेपी बलबूते पर कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। लेकिन अब नया बिल किस तरह से बीजेपी के लिए जीत के रास्ते खोल सकता है ये समझने की कोशिश करते हैं, ऩए परिसीमन बिल में सभी राज्यों की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है और इस हिसाब से उदाहरण के तौर पर लेकर चलें तो तमिलनाडु की मौजूदा लोकसभा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42, आंध्र प्रदेश की 25 से बढ़कर 38 सीटें और केरल की 20 से बढ़कर 30 सीटें हो जाएंगी , इसी प्रकार तमाम और राज्यों में भी लोकसभा की सीटे बढ़ेंगी। इसके चलते लोकसभा में अधिकतम 850 सीटों का प्रावधान रखा गया है जैसे की इस समय लोकसभा में 550 सीटों की ऊपरी सीमा है, जबकि सदन में असली संख्या 543 ही है, अब अगर यह बिल पास होकर लागू हो जाता है तो माना जा रहा है कि इससे ना केवल दक्षिण में सीटें बढेंगी , बल्कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें हिंदी बेल्ट राज्यों के मुकाबले लगभग 4% कम हो सकती हैं और इसी बात का फायदा बीजेपी को होगा और विपक्ष इसी का विरोध कर रहा है, विपक्ष इसे खतरनाक बता रहा है और कह रहा है कि इसके आने से दक्षिण, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और अन्य छोटे राज्यों का हिस्सा सदन में कम हो जाएगा, वहीं राहुल गांधी इसे राष्ट्र-विरोधी मान रहे हैं , तमिलनाडु के अलावा और दूसरे दक्षिण के राज्यों में इसका विरोध शुरू हो गया है, तमिलनाडू के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने तो परिसीमन विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया।

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