Reiki की मदद से अपने 21 अंगों में कर सकते है एनर्जी प्रवाहित

पांच तत्व की विशेष शक्तियों के साथ मिलके हम रेकी शक्तियों को और बढ़ा सकते हैं और ये पांच शक्तियां भगवान के नाम के अक्षरों से मिली है। रेकी सीखने के आप भी अपने पूरे शरीर के 24 अंगों को हील करेंगे तो आपके अंदर जो भी रोग है वो जड़ से समाप्त हो जाएंगे। कई लोग हमारे बताते हैं कि हमें टाइम नहीं मिलता। हमें पूजा भी करनी होती है, सब कुछ करनी होती है। पर आपको बता दें कि रेकी के साथ-साथ अपने पूजा के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं। हमने पूरे शरीर को अपने 24 भागों में बांटा हुआ है। 21 विशेष भाग हमारे हैं। अगर हम 21 अंगों को हील करेंगे अपने हाथों द्वारा और साथ में अपने कोई भी मंत्र का जिसकी आप जाप करते हैं। ई देव का नमोकार मंत्र का ओम नमः शिवाय का हरे रामा हरे कृष्णा का जो भी आप जाप करते हैं गायत्री मंत्र का हर अंग पे हाथ रख के अगर आप चारचार बार उस मंत्र को जाप करेंगे 20 बार और लास्ट में जब आप 21वा अंक करेंगे अपना तो उसमें आठ बार जाप करेंगे और कल्पना करेंगे आपके शरीर के विशेष चक्रों की शक्तियां आपके अंदर जा रही है , बहुत ही जल्दी आपके अंदर शरीर में इतनी इतनी अच्छी शक्तियां आ जाएंगी। आपके अंग अंग आपके मसल्स में एक एनर्जी आ जाएगी।

पांव के तलवे का बहुत महत्व होता है

कम ही लोग ये जानते होंगे कि रेकी शक्तियों में 21 की जो संख्या है उसकी बहुत अच्छी वैल्यू है। द और एक नंबर जो होता है वह बहुत इफेक्टिव होता है। अगर ये दोनों नंबर जुड़ जाते हैं तो समझ लीजिए आपके साथ ग्रहों की शक्तियां भी काम करती है। 21 अंक को लेकर चलेंगे, मंत्र का जाप करेंगे। चाहे तो आप छोटे से ओम का जाप भी कर सकते हैं। तो सबसे पहले हमने अपने शरीर को विशेष चार भागों में बांट दिया है। हमारे जो ऊपर के पांच हिस्से हैं, हमारे सामने के पांच हिस्से हैं। हमारे बैक के पांच हिस्से हैं। और हमारे लोअर पांच हिस्से हैं। 20 हो गए और लास्ट में जो 21वा होता है, हमारे तलवे होते हैं। जहां से पूरी एनर्जी जाती है। वहां पे हम जब जाप करते हैं आठ बार तो कल्पना करते हैं। हमारे चक्रों की विशेष शक्तियां उसके अंदर जा रही हैं। और आठवां जो लास्ट वाला है जो मंत्रों का जाप है 108 नंबर वाला वो ब्रह्मांड की सफ़ेद ऊर्जा है जो हर पल आपको शक्तियां देता है।

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