घरों में बढ़ता कांच के दरवाजों- खिड़कियों का चलन पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा -Heat Wave आधुनिक कांच की इमारतों को पूरी तरह से भट्टि‍यों में बदल रहा

आधुनिक, Unscientific शहरीकरण ने भारतीय शहरों में गर्मी 60 फीसद तक बढा दी

आधुनिक शहरों में आधुनिक इमारतों के डिजाइन पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं,चिंता की बात ये हैं कि शीशे के महलों में रहने वाले लोगों को इस बात का अंदाजा नहीं है कि घर को Beautify ,Latest लुक देने के चक्कर में वो पर्यावरण के विनाश में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि बिल्‍डर्स जो आवास या फ्लैट बना रहे हैं वे पर्यावरण की दृष्टि से बिल्कुल उचित नहीं हैं। साल दर साल बढती गर्मी के पीछे unscientific तरीके से तेजी से हो रहा शहरीकरण बडा कारण है जो पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ रहा है। आइआइटी भुवनेश्‍वर की एक रिपोर्ट हैरान कर देती है जो बताती है कि आधुनिक, unscientific शहरीकरण ने भारतीय शहरों में गर्मी 60 फीसद तक बढा दी है। समझने वाली बात यही है कि जितनी तेज गति से विकास हो रहा है उतनी ही तेज ग‍ति से कार्बन उत्‍सर्जन हो रहा है और उतनी ही तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है जो जलवायु लगातार धरती की सतह का तापमान बढ रहा है। नतीजा साफ नजर आ रहा है कि कहीं अधिक गर्मी तो कहीं भयंकर बाढ का तांडव,

गर्मी से बचने के लिए AC हमारी जरूरत पर AC का बढ़ता उपयोग वातावरण में लगातार गर्मी बढ़ा रहा

पहले देखते हैं तो हीटवेव विभिन्‍न चरणों में होती थी और दो या तीन दिनों के लिए चलती थी। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव यह हुआ कि आजकल ग्रमियों में में हीटवेव 25 -30 दिनों से अधिक चलने लगी हैं, माना यही जा रहा है विश्वभर में बिना पर्यवरण सुरक्षा को ध्यान में ऱखकर होने वाले शहरीकरण ने बहुत से देशों में पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है, और इससे मनुष्‍य भी सुरक्षित नहीं है। एक्सपर्ट चेता रहे हैं कि यदि समय रहते डिजाइनदार इमारतों में बदलाव नहीं किया गया तो हीटवेव आधुनिक कांच की इमारतों को पूरी तरह से भट्टि‍यों में बदल देगी। पहले के मकानों में सूर्य की रौशनी के लिए खिडकियां बनाई जाती थीं। आवश्‍यकतानुसार खिडकियां बंद या खुली रखी जाती थीं। लेकिन अब आधुनिक मल्टी स्‍टोरी बिल्डिंग में कांच वाले स्‍लाइडिंग गेट लगाए जाते हैं। कहने को तो इनसे फ्लैट में रौशनी भरपूर रहती है लेकिन शीशे गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं, कईं ईमारतो तो चारों तरफ से शीशों से ही ढक कर बनाई जा रही हैं, ऐसे में अंदर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए सेंट्रली एसी बहुत जरूर बन जाता है और ऐसे बने फ्लैटों में एसी यूनिट लगाना जरूरी है, तो समझ लीजिए जितने ज्यादा ac , उतनी ही उसमें से निकलने वाली कार्बन की मात्रा, यही नहीं एसी में लगने वाली बिजली के उत्‍पादन से भी कार्बन उत्‍सर्जन बढ़ता है और पर्यावरण का तापमान भी बढाता ही है। आधुनिक डिजाइन से बनी ईमारतों में खिड़कियां खत्म हो गई हैं जिससे वाटर कूलर का उपयोग भी ना के बराबर होता है इसमें बिजली की खपत भी कम होती है और कार्बन उत्‍सर्जन भी एसी से काफी कम होता है। कमाल ही है कि गर्मी से बचने के लिए एसी हमारी जरूरत बन गया है और बदले में एसी का बढ़ता उपयोग ही वातावरण में लगातार गर्मी बढ़ा रहा है। समझना यही है कि जब कार्बन उत्‍सर्जन कम होगा तो तापमान भी निंयंत्रित रहेगा और ग्‍लेशियर के पिघलने की गति भी कम होगी। जिससे पानी की कमी पर भी असर पड़ेगा।

 

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