क्या है Whiplash जिसने मौसम का मिजाज ही बदल दिया-विश्व में पैदा किया नया खतरा
आजकल हर कोई देख रहा है, दो दिन टेंपरेचर 45 डिग्री से ऊपर रहता है और तीसरे दिन जबरदस्त आंधी और तूफान से एकदम ठंडक हो जाती है, सब इतनी जल्दी होता है कि किसी को समझ में नहीं आता कि यह हो क्या रहा हैl लेकिन वैज्ञानिकों ने इसका जवाब काफी हद तक ढूँढ लिया है और इसे एक नाम भी दे दिया है, जी हां आजकल विश्व के ज्यादातर हिस्से इसी तरह के मौसम के मिजाज से जूझ रहे हैं और ये पर्यावरण बदलाव का एक बड़ा खतरा है जिसे नाम दिया गया है क्लाइमेट व्हिपलैश का, जी हां जिसका मतलब है जलवायु का अचानक झटका, आजकल बहुत से देशों में एक ऐसी स्थिति बन रही है जहां मौसम की दो विपरीत सीमाएं जैसे भयंकर सूखा और उसके तुरंत बाद मूसलाधार बाढ़ बहुत कम समय के अंतर में आ रही है और यही वि्हपलैश है जो अपने साथ सिर्फ तबाही ही ला रहा है, आपको बता दें कि व्हिपलैश चाबुक शबद से आया हैl जैसे चाबुक एक झटके में ही अपनी दिशा बदल देता है इसी तरह आजकल मौसम भी बहत जल्द बदल रहे हैं।
क्यों बदल रहा है मौसम का मिजाज अचानक बाढ़ -अचानक सूखा
लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है यह जानना भी जरूरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार तेजी से गर्म होता वातावरण एक बड़े स्पंज के रूप में काम करता है जब बारिश होती है तो बहुत अधिक नमी सोच लेता है और फिर मूसलाधार बारिश आती है और गर्मी होने पर पर्यावरण की नमी को सोख कर भयानक सूखा पैदा कर देता हैl इसी वजह से आजकल जंगलों में अचानक आग लग जाना, भयंकर बाढ़ का आना, पहाड़ों का खिसकना बहुत आम बात बन गई है और इसके पीछे की वजह तेजी से बदलता मौसम का मिजाज माना जा रहा है। यह बात खरी उतर रही है कि आधुनिकरण की आड़ में जिस तरह से धरती के साथ, पेड़, पौधौ, पहाड़ों, नदियों के साथ मजाक किया जा रहा है उसका असर जबरदस्त जलवायु परिवर्तन के रूप में देखने को मिल रहा है।
विकास के नाम पर प्राकृतिक से छेडछाड़ कितनी खतरनाक
वैज्ञानिक मान रहे हैं कि जैसे-जैसे दुनिया गर्म होगी इस तरह के झटके और देखने को मिलते रहेगे, lइस बात की 80% फीसदी संभावना है कि अब से लेकर 2028 के बीच विश्व का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक चला जाएगा। आपको यह बात चिंता में डाल देगी कि दुनिया में होने वाले सबसे ज्यादा जलवायु परिवर्तन का असर के सूचकांक में भारत नवे स्थान पर है, माना यही जा रहा है कि भारत जैसे देश ने लगातार जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन की तरफ बिल्कुल भी ध्यान ना देकर अपने लिए अपने आप को इस कगार पर खड़ा कर लिया है। पर अभी भी समय है सरकार चेत जाए और विकास के नाम पर प्राकृतिक से हो रही छेडछाड बहुत ही समझबूझ कर करे । देखा जाए तो 2024 का मौसम का पैटर्न इस बात का उदाहरण है जिसमें अचानक भारी बारिश अचानक आई बाढ़ ने गुजरात महाराष्ट्र त्रिपुरा के लाखों लोगों को विस्थापित किया इसी प्रकार असम और बिहार की बार-बार आने वाली बाढ़ और दिल्ली राजस्थान यूपी के 48 से 50 डिग्री टेंपरेचर में भीषण लू चलना और चक्रवर्ती तूफानों जो जो स्थिति पैदा हुई थी वह हम सब भुगत चुके हैं।
