By Ruby Kumari
Plastic कैसे बिगाड़ रहा समुद्री जीवों को बचाव के लिए मिलने वाले रसानियक संकेतो को
समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक के खतरे के बारे में आज हर कोई जानता है बावजूद इसके इस खतरनाक प्रेक्टिस में कोई कमी नहीं आ रही है, काफी रिसर्च से बात बता चुकी हैं कि प्लास्टिक sea life को पूरी तरह तबाह कर रहा है, इसके कारण हर साल हजारों समुद्री जानवर दम तोड़ रहे हैं, कईं बार देखा गया है कि प्लास्टिक बैग निगलने से पृथ्वी के सबसे भीमाकाय , विशाल, मजबूत प्राणी यानी व्हेल की मौत हो जाती है , यही नहीं प्लास्टिक खाकर या प्लास्टिक के जाल में फंसकर हजारों कछुए , समुद्री पक्षी, समुद्री सील और दूसरे समुद्री स्तनधारी जीव मारे जाते हैं। मछलियां और कई और समुद्री प्रजातियां दम तोड़ देती हैं। लेकिन समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक का खतरा केवल इतना ही नहीं है। जी हां एक शोध से बहुत ही हैरान और परेशान होंने वाली बात सामने आई है , कि प्लास्टिक में मौजूद रसायन समुद्री जीवों के व्यवहार को भी बदल रहा है , जी हां यह reserach बायोलॉजी लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुई है , वैज्ञानिकों ने यह research समुद्र में रहने वाले घोंघों पर किया है, सामान्य परिस्थितियों में ये घोंघे , अपने दुश्मन केकड़ों की गंध पहचानकर तुरंत अपने खोल में छिप जाते हैं। लेकिन जब resrarch के दौरान घोँघों को प्लास्टिक के टुकड़ों से दूषित पानी में रखा गया, तो वो खतरे को पहचान ही नहीं पाए और अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया देने में असफल रहे। यानी अपने खोल में नहीं छिप सके और शिकार बन गए।
Sea को प्लास्टिक सिर्फ गंदा नहीं कर रहा, बल्कि समुद्री जीवन के प्राकृतिक संतुलन को भी हर स्तर पर बिगाड़ रहा
इससे साफ पता चलता है कि प्लास्टिक से फैलता प्रदूषण ना केवल समुद्री जीवों की मौत का कारण बन रहा है बल्कि वो उनसे प्राकृतिक रूप से अपने दुश्मनों से बचने की क्षमता भी छीन सकता है, जिससे वे अपने शिकारियों से बचते हैं। खतरे की बात यह भी है कि वैज्ञानिकों लगतार चेता रहे हैं कि प्लास्टिक का यह जानलेवा प्रभाव सिर्फ एक जलीय प्रजाती पर नहीं बल्कि उन सभी जलीय प्रजातियों पर पड़ सकता है जो अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए, अपने बचाव के लिए रासायनिक संकेतों पर निर्भर करते हैं। मतलब साफ है कि प्लास्टिक सिर्फ समुद्र को गंदा नहीं कर रहा, बल्कि समुद्री जीवन के प्राकृतिक संतुलन को भी हर स्तर पर बिगाड़ रहा है।
Sea में 11 किलोमीटर नीचे पहुंचा प्लास्टिक मचा रहा तबाही
प्लास्टिक समुद्र की कितनी गहरईयों तक पहुच गया है इसक अंदाजा इसी से लगा लीजिए कि आर्कटिक महासागर से लेकर दुनिया की सबसे गहरी जगह यानी मारियाना ट्रेंच तक, प्लास्टिक के टुकड़े पहुंच चुके हैं। जी हां इस trench को ‘चैलेंजर डीप’ Challenger Deep और दुनिया की सबसे गहरी खाई भी कहा जात है जिसकी गहराई समुद्र तल से लगभग 11 किलोमीटर नीचे है, अब आप सोच सकते हैं कि जब इतनी गहराई में प्लास्टिक पहुंच गया है तो कितनी बड़ी मात्रा में ये समुद्र में मौजूद है माना जाता है कि समुंदर में फेंका गया हर प्लास्टिक का टुकड़ा सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि समुद्री जीवन के लिए एक मूक खतरा है। संयुक्त राष्ट्र के एनवायरन्मेंट प्रोग्राम के मुताबिक हर साल 1.9 से 2.3 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा जलीय इकोसिस्टम में पहुँचता है, जिससे झीलें, नदियाँ और समुद्र प्रदूषित हो रहे हैं। सबसे खतरनाक बात है कि अगर इसपर रोक नहीं लगी तो आशंका है कि 2050 तक समुद्र में मौजूद प्लास्टिक का वजन वहाँ की सभी मछलियों के कुल वजन से भी ज़्यादा हो जाएगा। स्थिति बहुत गंभीर है और इसपर एक देश को नहीं बल्कि पूरे विश्व को मिलबैठकर विचार करना होगा और इसका हल खोजना होगा।

