12 साल में पांचवा शिक्षा मंत्री और अभी भी स्थायी शिक्षा मंत्री का इंतजार
प्रहलाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है, यह समझने वाली बात है कि किसी मंत्री को इस समय शिक्षा मंत्री नहीं बनाया गया है। बल्कि प्रह्लाद जोशी जिनके पास पहले से ही उपभोक्ता मांगले और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का मंत्रालय है उनको यह अतिरिक्त शिक्षा विभाग सौंपा गया है। और इसके पीछे एक बड़ी वजह जो मानी जा रही है यही है कि इस बार मोदी सरकार किसी भी प्रकार का जोखिम शिक्षा के क्षेत्र में नहीं लेना चाहती। जी हां और बड़े सोच समझ के अब ये डिसीजन लिया जाएगा कि कौन नया शिक्षा मंत्री होगा जो युवाओं की बात को समझेगा, शिक्षा के क्षेत्र में आ रही तमाम कठिनाइयों को टैकल करने में सक्षम होगा। और जैसे कि चर्चाएं थी कि पहले शिक्षा मंत्रालय, पूरी तरह से आरएसएस के अंडर में था जो भी नीतियां बनती थी, जो भी डिसीजन होते थे, उस पर काफी हद तक आरएसएस कंट्रोल करता था। लेकिन पिछले कुछ समय से जो लगातार शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं आ रही हैं, पेपर लीक हो रहे हैं, छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, छात्रों में असंतोष है। ncert के सिलेबस को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। उन सबके बाद आरएसएस के हाथों से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार वापस सरकार ने ले लिया है। अब मोदी सरकार बहुत ही सोच समझकर शिक्षा मंत्रालय इस बार किसी को सौंपेगी। वैसे शिक्षा का रिकॉर्ड एनडीए के कार्यकाल में वो ठीक नहीं रहा है। बहुत ही अहम बात है कि 12 साल में मोदी सरकार के चार शिक्षा मंत्री बदले जा चुके हैं। धर्मेंद्र प्रधान चौथे शिक्षा मंत्री थे जिनको इस्तीफा देना पड़ा। याद कीजिए स्मृति ईरानी शुरुआती दिनों में मोदी में शिक्षा मंत्री बनी थी, स्मृति ईरानी के कई फैसले थे उसकी तारीफ हुई सबसे बड़ा फैसला उन्होंने लिया था कि डीयू में 4 साल डिग्री को स्मृति ईरानी ने वापस तीन साल का किया। जी हां, इसको लेकर छात्र डिमांड भी कर रहे थे ,उसके बाद नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क भी किया, देश भर के इंस्टीट्यूट हैं, उनमें इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से रैंकिंग देने की शुरूआत की। लेकिन स्मृति ईरानी विवादों में आई, 2016 मेंजेएनयू में जो प्रोटेस्ट हुए उसके बाद कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी हुई और उसके बाद हैदराबाद में छात्र रोहित बेमुला ने आत्महत्या की, उसके बाद स्मृति ईरानी विवादों में आई और उन्हें जाना पड़ा। उसके बाद प्रकाश जावड़ेकर को यह मंत्रालय सौंपा गया, उन्होंने डिटेंशन पॉलिसी को ख्तम किया , फिफ्थ से एट्थ के बीच में बच्चों को जो फेल हो जाते हैं उनको डिटेंड नहीं किया जाएगा, उनको किया जाए या नहीं किया जाए यह राज्य सरकारों पर सौंप दिया गया , लेकिन cbsc पेपर लीक का मामला हुआ तो प्रकाश जावड़ेकर विवादों में आए और जाना पड़ा, उसके बाद रमेश पोखरियाल शिक्षा मंत्री बने और उनके समय में ही नई शिक्षा नीति , इंप्लीमेंट हुई। लेकिन उनके कार्यकाल में जो एक चर्चा यही रही कि जमीनी स्तर पर जो काम होना चाहिए शिक्षा के क्षेत्र में वो बहुत धीमा पड़ गया। शायद वो ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए इस तरफ। और यही कारण है कि उस समय उनके टेन्योर में देश के प्रमुख पांच आईआईटी ऐसे थे जिनके director पद खाली पड़े थे और यही नहीं शिक्षा मंत्रालय के भी बहुत सारे पद खाली पड़े थे, फिर कोरोना से वो बीमार पड़े और जाना पड़ गया, उसके बाद बाद धर्मेंद्र प्रधान का नंबर आया और धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल दो बार वो शिक्षा मंत्री बने और दोनों बार सबसे लंबा समय धर्मेंद्र प्रधान ने ही बिताया। पहले जो दूसरा कार्यकाल था उसके बीच में 2019 में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बनाया गया और उसके बाद तीसरे कार्यकाल में बीच में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बनाया गया। लेकिन अब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आ गया है और अब प्रह्लाद जोशी को इसका अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, माना जा रहा है कि प्रह्लाद जोशी एक बहुत ही सुलझे हुए नेता हैं और 2004 से प्रह्लाद जोशी जो कर्नाटक की धनवाड़ा सीट है लगातार पांच बार वहां से चुनाव जीत कर आ रहे हैं। पर सभी को इंतजार है कि नया शिक्षा मंत्री कब आएगा।
प्रियंका क्या बोली अपनी अज्ञानता का परिचय दिया
पेपर लीक आंदोलन के दौरान जिस तरह से छात्रों की आड़ में बहुत से अपराधिक लोगों ने हुडदंग मचाया, गंदी भाषा , गंदे gesture का प्रयोग किया, लगता है कि विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस संसद में भी इसी माडल के साथ काम कर रही है, जी हां कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर बोलते बोलते सरकार के मंत्री और शिक्षाविद के लिए बहुत ही अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जिस शख्स को नया शिक्षा मंत्री बनाया है उन्होंने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर खुशी जाहिर की थी। इस पर संसदीय कार्यमंत्री किरेण रिजिजू ने प्रियंका के बयान को शिक्षा मंत्री का चरित्र हनन बताया और कांग्रेस सांसद से माफी मांगने की मांग की। लेकिन प्रियंका रूकी नहीं और उन्होंने शिक्षा सुधार के लिए बनी राधाकृष्णन कमेटी के लिए बहुत गंदी टिप्पणी की और कहा कि उसमें तो गौमूत्र विशेषज्ञ बैठे हैं और ऐसे लोगों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है। आपको बता दें कि प्रियंका ने जिस पर टिपपणी की वो iit मद्रास के director हैं और बहुत ज्यादा qualified हैं, अब चर्चाएं तो यही चल निकली है कि प्रियंका जो खुद खास पढ़ी-लिखी नहीं हैं वो कैसे iit director के कद को पहचान सकती हैं।
