बृजभूषण शरण सिंह का अदालत से बरी होना क्या BJP को होगा फायदा
बृजभूषण शरण सिंह का सेक्सुअल हरासमेंट पहलवानों के मामले में बरी किया जाना अदालत से, उत्तरप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव यह कहिए कि एक बड़ी बड़ा परिवर्तन की ओर लेके जाने वाला है। बृजभूषण शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद हैं। अभी उनके सुपुत्र उनकी सीट पर गोंडा जो अवधवाली है वहां से सांसद हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि बृजभूषण शरण सिंह जो है वो भारतीय जनता पार्टी में आने से पहले समाजवादी पार्टी के नेता थे और दबंग बाहुबली के रूप में उनकी एक छवि है। लेकिन जिस तरह से रेसलिंग एसोसिएशन है उसके पदाधिकारी हैं। थे तो अब उनका उन पर जो आरोप लगा था उसको लेकर के वो लगातार उसको डिनाई कर रहे थे। लेकिन एक उनका यह दावा था कि एक राजनीतिक योजना राजनीतिक षड्यंत्र के तहत जिसमें वो विनेश फोगाट का नाम लेते हैं, हालांकि उन्होंने बाद में कांग्रेस ज्वाइन कर ली और अभी वो कांग्रेस से विधानसभा में भी हैं। अब वो इस रिहाई को लेकर अदालत में जाने की बात कह रही हैं कि इसको अपील में जाएंगी वो अलग बात है। लेकिन अभी जो अदालत का फैसला आया है उसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब जो एक लगातार हमलावर थी विशेष रूप से इस तरह के मामले में जहां सेक्सुअल हरेसमेंट के मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का नाम लिया जाता था तो वो एक बड़ी राहत होगी, और इसके कारण जो अवध का पूरा इलाका है कि जो बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव क्षेत्र वो कोई एक जिले में नहीं है। वो गोंडा, बहराइच आसपास के बहुत सारे जिले में वो प्रभावी उनकी भूमिका रहती है। और विधानसभा के चुनाव में वो निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। योगी आदित्यनाथ के साथ क्योंकि कास्ट का भी एक वह भी बनता है उनके साथ। प्लस वोटर्स पर भी इसका फर्क पड़ेगा। जो वोटर्स डिसइल्यूजन होते थे या जो इस तरह का होता था कि अरे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर ऐसा है उस पर भी एक वो होगा मतलब उस पर भी एक रोक जैसी लगेगी और जो सामान्य मतदाता है सामान्य मतदाता है वो कॉन्फिडेंस के साथ भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ पाएगा , इनका अवध के लगभग 25 से 40 सीटों पर उनका प्रभाव है जो चुनाव में रिफ्लेक्ट करेगा।
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दूसरा महत्वपूर्ण मसला यह है कि ये जो सीजेपी का आंदोलन हुआ था इसको लेकर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी बयान आया है। जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी हैं अतुल निमय उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह जो आंदोलन है शुरुआत में वो छात्रों के द्वारा एक जेन्युइन कॉज के लिए शुरू किया था। लेकिन बाद में इसको जो एंटीनेशनल एलिमेंट्स हैं जो सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं इस देश में डेमोक्रेटिकली नहीं एनआरकी के थ्रू उन्होंने इसको टेक ओवर कर लिया और वो ठीक नहीं है और इसको जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन है उनको एक्टिवली इसके खिलाफ काम करना चाहिए और इस तरह के एलिमेंट को एक्सपोज़ करना चाहिए। अब अतुल जो है वो अभी उनको जो पिछले उसमें प्रतिनिधि सभा में उनको जॉइंट जनरल सेक्रेटरी बनाया गया था। महाराष्ट्र के चुनाव में उनकी बड़ी जीत में उनकी बड़ी भूमिका थी। और वो संघ के बहुत मतलब जिनको बोला जाए कि महत्वपूर्ण लोगों में से हैं। तो, जब वह इस तरह का कोई बयान देते हैं और अह संघ के की जो पद्धति है, उस पद्धति में सात आठ जो ऑथराइज़्ड जो लोग बयान दे सकते हैं , हां उनमें सात जो ऑथराइज़्ड बयान दे सकते हैं प्रवक्ता के अलावा। वो उनमें जॉइंट जनरल सेक्रेटरी आते हैं अतुल मधुमय का नाम आता है। तो ये बयान ऑफिशियल ही कंसीडर किया जाना चाहिए और हालांकि इसको लेकर के जो सीजेपी के नेता हैं दीपके का बयान आ गया है कि सैफरन जो वो है वो ढोंगी मतलब हिपोक्रेट्स होते हैं। लेकिन बहुत सारी चीजें अब इस आंदोलन के बाद एक के बाद एक परतें खुलने लगी हैं कि ये शायद आंदोलन उतनाऑनेस्ट नहीं था जितना ऑनेस्ट दिखाए जाने की को शिश की जा रही है। सबके बारे में बात हो रही है। दीपके के जो उसके यूएस में एजुकेशन की बात हो रही है। सौरभ दास के जो जहां रहते हैं उनके खर्चों की बात हो रही है। तो अगर इस तरह की चीजें सामने आएंगी तो उस उससे तो यह साफ ही होगा कि यह आंदोलन जो है अगर कोई व्यक्ति 5 से ₹1० लाख के किराए के मकान में रहता हो और वो अभी विद्यार्थी हो तो निश्चित तौर पर प्रश्न आएंगे। कोई व्यक्ति यूएस पढ़ने गया हो जहां ₹1 करोड़ रुपए का खर्च हो और उसके फादर की इनकम इतनी नहीं है कि वो विदेश जाकर के पढ़ पाए तो उसको अपना दिखाना तो पड़ेगा ही, बताना तो पड़ेगा ही कि उसके पास पैसे कहां से आए। तो संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस तरह की बात की। इसका मतलब यह मैसेज नीचे तक जाएगा कम से कम जो सैफरन फैमिली है उसमें।
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अब तीसरा जो महत्वपूर्ण मसला यह है कि जो विधानसभा के चुनाव हुए हैं उसमें बिहार और मध्य प्रदेश यहां बाकीपुर और दतिया ये दो सीट उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी हारी है। तो इसमें सबकी जिम्मेदारी के साथ प्रदेश के मुख्यंत्रियों की भी जिम्मेदारी होती है।लेकिन यह तो अभी फरी तौर का मामला है। मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान यहां के मुख्यमंत्री जो भारतीय जनता पार्टी के मुख्यंत्रियोंकी कार्य पद्धति है या जो काम करने का तरीका है या जो आईडियोलॉजिकल कमिटमेंट है या कानून व्यवस्था को लेकर के जीरो टॉलरेंस का मामला है। उस पूरे मामले में तीन के तीनों मुख्यमंत्री बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुए हैं। चाहे मोहन यादव की बात हो, चाहे सम्राट चौधरी की बात हो, चाहे भजन लाल शर्मा की बात हो। भजन लाल शर्मा लगातार घटनाएं ऐसी होती रहती हैं जहां परसरकार जो है वो चूकती हुई नजर आती है। वैसा ही हाल सम्राट चौधरी का है। जिस तरह से एनकाउंटर में बच्चा मारा गया था। उसके बाद सारा का सारा दामो दारोमदार जो अभी प्रशांत किशोर की जीत का है वो उसी उसमें जाता है। अगर प्रशासन संवेदनशीलता के साथ काम करता तो ऐसी स्थिति नहीं आती और उसने जो जंजी मूवमेंट है उसको और ताकत दी। वहां मध्य प्रदेश का हाल तो सबसे ज्यादा बुरा है। वहां कोई भी चीज ऑर्डर में नहीं है प्रशासन को लेकर के चाहे बात की जाए मुख्यमंत्री पर खुद भ्रष्टाचार का आरोप लग रहा है। उसके अलावा मुख्यमंत्री जो आईडियोलॉजिकल पॉइंट्स हैं या जो आइडियोलॉजिकल ग्राउंड्स हैं वहां से भी डेविएट करते हुए नजर आ रहे हैं। अब इन सबके बीच हमने एक वीडियो किया था उसमें यह बताने की कोशिश की थी कि इन सब लोगों पर ऐसे मुख्यमंत्री पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने संघ जो उन उनसे गया हुआ संगठन महामंत्री है भाजपा का उसको बताएगा और वहां से केंद्रीय नेतृत्व पर जाएगा। और यह मैसेज पहुंचने लगा है कि इन तीनों मुख्यंत्रियों के कारण केंद्र सरकार की लगातार फजीहत हो रही है। बहुत सारे जगहों पर फजीहत हो रही है। उस पर बहुत सारा करेक्शन करने की जरूरत है।
