FDA officer खान-पान में मिलावट बर्दाश नहीं

महाराष्ट्र में FDA के नई आईएएस हैं तुकराम मुंडे उनकी कार्यप्रणाली के बारे में काफी चर्चाएं हो रही है क्योंकि इन्होंने महाराष्ट्र में खानेपीने की क्वालिटी में सुधार को लेकर जबरदस्त काम करना शुरू कर दिया है। जगह-जगह दौरे कर रहे हैं। छोटी-छोटी दुकानों पर बिकने वाला सामान कितना उतम है? उसमें कोई मिलावट तो नहीं है। कैसे दिया जा रहा है? किस तरह से दिया जा रहा है कितना Hygiene है? और वो बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और होटल्स तक को नहीं छोड़ रहे हैं। आम जनता इससे काफी खुश है कि कहीं तो कोई है जो देश में जो नकली सामान धड़ल्ले से बिक रहा है, खराब सामान धड़ल्ले से बिक रहा है। कोई उस पर निगरानी रखने वाला तो आया। जब एक राज्य में इस तरह का काम होता है तो राज्य में नहीं देश में उसकी चर्चा होनी शुरू हो जाती है। तुकराम मुंडे जो है उनके जो काम करने का स्टाइल है उसकी चर्चा अब देश में होने लगी है।

 

भ्रमित विज्ञापनों देने वाली कंपनियों को चेतावनी

इसी से शायद प्रेरणा लेकर अब यूपी की अथॉरिटी है फूड सेफ्टी ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उसने भी भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ एक अभियान शुरू कर दिया है। कंपनियों का अपने सामान को लेकर गलत दावा करना एक आम बात हो गई है, यह खाएंगे तो स्वस्थ रहेंगे, आपकी मसल्स स्ट्रांग रहेंगे, लंबे हो जाएंगे, यह क्रीम लगाएंगे तो आप गोरे हो जाएंगे, इस ब्रांड की चीज खाएंगे तो आप में ताकत आ जाएगी। तो जो मिसलीडिंग विज्ञापन हैं उसपर बकायदा चेतावनी इशू की गई है कि इस तरह से भ्रामक अगर विज्ञापन दिए जाएंगे सामने तो अथॉरिटी इस पर कड़ी कारवाई करेगी। वैसे जब से महाराष्ट्र में तुकाराम मुंडे ने इस तरह से खाने पीने की चीजों पर ध्यान देना शुरू किया। उसकी क्वालिटी पर ध्यान देना शुरू किया है। और राज्यों में भी Food Quality Control units सजग हुई हैं और अपना काम करना शुरू कर दिया है। कंपनियों को साफ कहा गया है कि अगर झूठे दावे देते हुए कोई कंपनी पाई जाएगी विज्ञापन करते हुए खाने पीने की चीजों में दवाओं में तो उस पर सख्त कारवाई होगी। वैसे हर स्टेट्स में खाने-पीने के साथ दवाईयों के सामान की उतमता पर नजर रखने के लिए एक यूनिट होती है जिनका काम ही यही होता है कि जो खाना जनता तक पहुंच रहा है, दवाई पहुंच रही है, तमाम और चीजें पहुंच रही है, उसकी क्वालिटी कैसी है? वो कितनी शुद्ध है। तो कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में तैनात तुकराम मुंडे की कारवाई से प्रेरणा लेकर यूपी में भी यह जो अथॉरिटी है उसने यह चेतावनी इशू की है।

 

FSSAI ने कंपनियों पर अपने पलेटफार्म पर सामान के बारे में झूठे दावे करने पर दी कड़ी चेतावनी

नेशनल लेवल पर खाने-पीने के सामान पर नजर रखने, कानून बनाने का काम FSSAI फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया करती है और वो भी हाल-फिलहाल में चौकस हो गई है। अथारिटी ने ई-कॉमर्स की तमाम कंपनियां चाहे Flipkart हो Amazon हो, बिग बास्केट ज़प्टो, जो अपने पलेटफार्म पर सामान के बारे में झूठे दावे करती हैं, इनके विज्ञापनों को फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कड़ी चेतावनी दी है कि आप इस तरह के विज्ञापन नहीं दे सकते। और अगर कंपनियां इस तरह का विज्ञापन देते हुए पाई जाएंगी तो उन पर कड़ी कारवाई होगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार कब आएगी वार्निंग चेतावनी

अब सुप्रीम कोर्ट भी इस तरह के मामलों को लेकर काफी संवेदनशील हो गया है। एक केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी को कड़ी लताड़ लगाई है और कहा है कि आप चेतावनी वाली लेबलिंग का काम करने में इतनी देरी क्यों कर रहे हैं। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2022 में एक सभी पैकेट फूड पर चेतावनी लेबलिंग लगाने की बात की थी ,कोई भी प्रोडक्ट अगर उसमें चीनी ज्यादा है , नमक ज्यादा है, फैट ज्यादा है या और कोई ऐसा पदार्थ ज्यादा है जिससे सेहत को डायरेक्टली और इन डायरेक्टली नुकसान पहुंच सकता है। तो पैकेट फूड पर रेड मार्क पर लेबलिंग की जाइगी, ये वार्निंग लेबलिंग होगी। पर इसपर अभी तक कोई रिजस्ट सामने नहीं आए हैं, तो इसको लेकर के सुप्रीम कोर्ट में एक मामला पहुंच गया कि फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपना वादा जो है वो पूरा नहीं किया है। तो उसको लेकर हाल ही में एक मामला आया और सुप्रीम कोर्ट ने इसको फटकार लगाई है। यहां पर बकायदा अथॉरिटी ने कहा है सुप्रीम कोर्ट में कि जल्दी से जल्दी इस पर काम हो रहा है और वो जल्दी ही इस काम को इंप्लीमेंट करेंगे और इंप्लीमेंट करने के बाद कंपनियों को बकायदा कुछ समय दिया जाएगा कि अपने प्रोडक्ट पर जो पैकेड फूड होते हैं उनपर वार्निंग लेबलिंग लगाई जाए लाल रंग के निशान के साथ लगाएं जिससे कि लोगों को पता रहे कि आप जो पैकेट फ्रूट खरीद रहे हैं वह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है या नहीं।