देश भर में CJP के साथ विपक्षी दलों के चल रहे प्रदर्शन क्या इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है? बड़े-बड़े उद्योगपति चाहे वो अमेरिका में बैठे हों अपने फायदे के लिए उनका कहीं ना कहीं कुछ इंटरेस्ट है मोदी सरकार को अस्थिर करने का , क्या हिंदू को हिंदू से लड़ाया जा रहा तमाम बातों पर विस्तार से बातचीत की विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष – आलोक कुमार से
Ques -जो माहौल चल रहा है आजकल और जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं, जिस तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं देश भर में चाहे वो सीजेपी का हो, चाहे कांग्रेस का हो या और तमाम जो विपक्षी दल हैं। कहीं ना कहीं यह बात सामने आ रही है, कि क्या इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है?
Ans—- यह एक जांच का विषय है। जिस स्केल पर खर्चा हो रहा है। जिस स्केल पर इस अनरेस्ट को फैलाने की चेष्टा होती है। इसमें काफी लोगों को ऐसा संदेह होता है कि इसमें विदेशी हाथ- सहायता दोनों हो सकते। पर यह हो क्या रहा है इस बार मैं पिछले आंदोलन की बात नहीं कर रहा हूं उसमें नीट के एग्जाम्स के पेपर्स लीक होने का विषय था जो 24 लाख उन बच्चों के जीवन से और उनके परिवारों से संबंधित था उस इशू से हम लोग भी सहमत अभी कोशिश ये हो रही है कि जितने भी कास्टिट्यूशनल इंस्टिटूयूशन हैं उन सबकी प्रतिष्ठा गिराई जाए। उन सबका इमेज गिराया जाए। क्योंकि अगर देश के पास में इन सब इंस्टिटशंस के प्रति कोई आदर नहीं बचेगा तो फिर देश को जोड़े रखने में एक रखने में कठिनाई स्वाभाविक रूप से होगी। तो जुडिशरी पर हमला करते अभी सीईसी पर हमला कर रहे हैं। कभी संसद की कारवाई के बारे में सवाल उठाते। पूरा पूरा सत्र नहीं
चलने देते। मुझे लगता है कि ये एक ऐसा विषय है जिस पर देश की जनता गंभीरता से सोचे।
Ques—क्यों लोग जो कह रहे हैं कि इसके पीछे विदेशी ताकतें हैं। अभी एलन मस्क का जो बयान आया है वो काफी चर्चा का विषय है और वो मोदी सरकार से नाराज लगता है क्योंकि उसका बिजनेस इंटरेस्ट पूरा नहीं हो रहा। उसने कहा कि अंबानी देश के प्रधानमंत्री हैं, बड़ा ही सरकास्टिक और डेरोगेटरी रिमार्क उन्होंने बोला और कहा कि अंबानी बॉस है , तो इससे भी कहीं ना कहीं लगता है कि बहुत बड़े-बड़े उद्योगपति चाहे वो अमेरिका में बैठे उनका कहीं ना कहीं कुछ इंटरेस्ट है इंडिया में
Ans — जरूर होगा और इसलिए जिन लोगों के बारे में हमारा अंदाजा है जी वो जो इस्लामिस्ट forces हैं ,जो क्रिश्चियन forces है जो बाजार की forces हैं और जो नक्सलवाद की forces हैं और इन चारों में आपस में कॉमन कुछ नहीं। पर जब भी भारत के विरोध का विषय होता है, हमारी आस्थाओं का विषय होता है तो ये चारों ताकतें मिलकर के आंदोलन करती है मिलकर के विषय उठाती है। एक दूसरे का समर्थन करती है। क्यों करती है? इस आंदोलन में भी कौन-कौन सी ताकतें दिख रही है? मैं तो नहीं मानता कि एसएफआई—- एआईएसएफ और आईसा की कुछ हजार 2000— 5000 जो युवक हैं वो पूरे देश की zen-g को रिप्रेजेंट करते हैं ऐसा मैं नहीं मानता। वो जितना असभ्य अशिष्ट पोर्नोग्राफिक बोलते ही मैं उनको gen-z का रिप्रेजेंटेटिव नहीं मानता और मेरे पास में ना मानने के कारण भी है अगर वास्तव में देश का युवा राष्ट्रवादी धारा से छिटक गया होता तो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में विद्यार्थी परिषद को इस आंदोलन के ठीक बीच में बड़ी विजय क्यों मिली? क्यों देश के अन्य विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी परिषद देश का सबसे बड़ा छात्र संगठन बना हुआ है। और अगर समाज में यह विरोध होता
तो क्या आसाम और बंगाल के जो जी चुनावों के अभी परिणाम आए वैसा आते मैं तर्क से भी सोचना चाहता हूं पर मैं ये समझ नहीं पाता कि अगर अगर एसआईआर होने के बाद में केरल विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को तीन ही सीटें मिलती है और कांग्रेस का मोर्चा जीत जाता है। जी तो इसमें एसआईआर को दोष क्यों नहीं दिया जाता? अगर एसआईआर बंगाल में हरा सकता है तो केरल में क्यों नहीं हरा सकता? अगर तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा में फुट होल्ड भी नहीं मिलता तो फिर वहां एसआईआर को दोष क्यों नहीं दिया जाता? एसआईआर सेलेक्टिव नहीं हो सकता कि कहीं अच्छा होगा कहीं बुरा होगा। ये तो ऐसा है कि चुनाव हारे तो अंपायर को दोषी ठहराया। और अपने समर्थकों को यह विश्वास दिलाने के लिए कि वो हारे नहीं थे, जीते थे। यह तो वोट चोरी हो गई।
Ques—एक बार फिर विदेशी ताकतों की बात करते हैं। अभी अभिषेक दीपके की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी और बहुत ही ये कुछ कंट्रोवर्सी हुई कि उसमें बीबीसी के दो ques लिए, पर बाकी जो और चैनल थे जो कुछ पूछना चाहते थे उनके उनसे कोई क्वेश्चन नहीं लिए। यहां पर फिर वही फंडा आता है विदेशी मीडिया। अगर हम विदेशी मीडिया की बात करें तो विदेशी मीडिया में बीबीसी और कई एजेंसी ऐसी है जो लगातार भारत विरोधी चीजें दिखाती है। लेकिन यही एक वो मीडिया है जो अफगानिस्तान पाकिस्तान, श्रीलंका, बर्मा यहां तक कि ईरान, इराक में जो सब चलता है, आंदोलन होता है, बहुत ज्यादा अमानवीय आंदोलन होता है उसके बारे में कुछ खबर नहीं होती। भारत में कुछ होता है तो ये बहुत बढ़चकर बोलते हैं-लिखते हैं
Ans—आश्चर्य ही है इसपर , अभी यूएओ की एक बॉडी ने जी भारत के बारे में कंसर्न किया। कंसर्न किया। किस बात पे कंसर्न किया कि 3000 लोग डिटेन किए गए। जी 3000 और बैरिकेड्स लगाए गए।पाकिस्तान में पीओके में जो हो रहा है क्या उसके बारे में इनको कुछ चिंता हुई है बांग्लादेश में हिंदू समाज के साथ जो हो रहा है क्या उसके बारे में चिंता हुई है म्यामार के अंदर लोकतंत्र की जो स्थिति है और वहां सैनिक शासन है क्या इसके बारे में उनको आपत्ति हुई है। अफगानिस्तान के अंदर छोटी लड़कियों के भी सब स्कूल बंद कर दिएगए। और वहां पर ये आदेश दिया गया कि कोई महिला अगर बाहर निकलेगी और अगर उसके साथ में उसके परिवार का कोई मर्द नहीं होगा तो उसे कोई कैब ड्राइवर कैब में नहीं। नहीं। जी। हमारे यहां भी केरल के एक बड़े धर्म गुरु ने कहा तो 3000 लोगों की डिटेंशन की चिंता है। 3000 लोगों के मारे जाने की चिंता क्यों नहीं है? ये सेलेक्टिव क्यों है? और ये सेलेक्टिव है। इसलिए है कि अब्राहमिक रिलीजंस के कुछ लोगों ने मिलकर के भारत आगे ना बढ़े। भारत ऊंचा ना हो। इसका षड्यंत्र बनाया है
Ques—राहुल गांधी और कांग्रेस की बात करते हैं। जिस तरह से इंटरनेशनल मंच पर राहुल गांधी हो चाहे कांग्रेस लीडर्स हों, तमाम तरह के allegations लगाते हैं इससे विदेशी शक्तिओं को और ज्यादा बढ़ावा मिलता है। आप क्या कहते हैं
Ans— विदेशी तंत्र भारत की तरक्की से जलते हैं और नहीं चाहते कि भारत उंचाई पर पहुंचे कभी-कभी सोचता हूं कि कांग्रेस और राहुल गांधी दे स्पीक फॉर पाकिस्तान। देर स्टेटमेंट्स आर सेलिब्रेटेड इन दैट कंट्री। उन्होंने ये बोगी उठाई थी सैफरन टेरर की जो कोर्ट में टिकी नहीं।
जी जी। पर सबसे विचित्र तो ये हुआ। मैं आपसे भी पूछूंगा तो भी आप भी यही कहेंगे। अगर मैं पूछूंगा कि क्या किसी एक सिख के बारे में आप जानती हैं जिसको भारत में पगड़ी पहनने से रोका गया हो या गुरुद्वारे जाने से रोका गया हो देयर हैज़ नॉट बीन अ सिंगल सच इंस्टेंट ऐसा एक भी घटना नहीं हुई जी फिर राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा कि भारत में प्रश्न ये उठ गया है कि कोई पगड़ी पहनेगा नहीं गुरुद्वारे में जाए जाने दिया जाएगा कि नहीं ये ऐसी बात है जिसमें नरेटिव्स बिल्ड अप किए जाए एक सिंपैथेटिक कम्युनिटी जो उस नैरेटिव को एक्सेप्ट कर ले जो वनरेबल है उसको 50 जगह से रिपीट किया जाए उस पे साहित्य निर्माण किया जाए और एक छ आठ सालों में उस नैरेटिव को कम से कम यूरोपियन कंट्रीज में एज अ फैक्ट एस्टैब्लिश कर दिया जाए उस षड्यंत्र की राहुल गांधी ने शुरुआत की है।
Ques—बीजेपी के लिए जो लोग कहते हैं विपक्ष कहता है कि बीजेपी तो हिंदू मुसलमान कj रही है। लेकिन जो आजकल नैरेटिव चल रहा है समाज में हमारे आप देखिए कि जो कांग्रेस नैरेटिव बना रही है और जो ये सब लोग तमाम लोग नैरेटिव बना रहे हैं। कहीं आपको लगता है कि हिंदू को हिंदू से लड़ाया जा रहा है और कास्टिज्म को बहुत बढ़ावा दे रही है ये सब चीजें कि आप रामलल्ला के मंदिर बना तो कई लोग खुश हैं। कई लोगों को उसके अगेंस्ट खड़ा कर दिया गया है। तो आपको लगता है कि जो नैरेटिव ये बन रहा है ये बहुत ही ज्यादा खतरनाक है?
Ans—ये है हिंदू को बांटने की कोशिश और मुसलमान को कंसोलिडेट करने की कोशिश जिससे बैलेंस ऑफ पावर ये मुसलमान के हाथ में रहे। मेरे पास अगर आठ वोट है मेरे प्रतिद्वंदी के पास आठ वोट है। जी तो एक वोट फैसला करता था मुसलमान का कि कौन चुनाव जीतेगा। इसीलिए उस वोट बैंक के लिए जाते थे। अब क्या हुआ है? 2014 से मुसलमानों का भारतीय चुनाव परिणामों में जो वीटो था वो वीटो समाप्त हो गया। समाप्त हो गया। मैं नहीं कहता कि भारतीय जनता पार्टी को मुसलमानों को टिकट नहीं देना चाहिए। मैं नहीं कहता। जी पर नहीं दिया और बहुमत में आए दो बार। बिल्कुल बंगाल में महाराष्ट्र में और अबकी बार आसाम में और आसाम के उस क्षेत्र में जिसमें मुसलमानों का बहुमत है।सब जगह पर जहां मुसलमान वोट बैंक बनाने की चेष्टा की उसकी प्रतिक्रिया में एक हिंदू वोट बैंक अपने आप में जनरेट होता है। ये पॉलिटिक्स लंबी चलेगी नहीं। ये पॉलिटिक्स सफल होगी नहीं। हिंदू समाज यह सबको मित्र मानता है। हम सब ने मिलकर भारत को सेुलर कंट्री बनाया है। संविधान सभा में इस बारे में किसी के दो मत नहीं थे। हम इसको ऐसे ही रखना भी चाहते हैं। पर इस बराबरी के से आगे बढ़कर के बंटवारा करो सबका। ये तो सहन नहीं होगा। और ये हिंदू समाज भी समझ रहा है। वह भी सहन नहीं करता।
